DAILY BALOD NEWS

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नेक भावना- 18 साल की उम्र से कर रहे रक्तदान, 13 साल में 40 बार रक्तदान, पूरे छत्तीसगढ़ में परायों से बनाया खून का रिश्ता

भावना फाउंडेशन बनाकर 6000 लोगों को दिला चुके ब्लड, इनके पीछे 1000 से ज्यादा डोनर भी है तैयार

बालोद। विश्व रक्तदाता दिवस( 14 जून) पर आज हम बालोद जिले के डौंडीलोहारा के रहने वाले एक ऐसे रक्तदाता की कहानी सामने ला रहे हैं। जो खुद 18 साल की उम्र से रक्तदान कर रहे हैं और आज उनकी उम्र 31 साल है। इन्हें 13 से 14 साल के अंतराल में उन्होंने 40 बार रक्तदान किया है। उनका प्रयास यही तक नहीं रुका है। यह बात जानकर आपको हैरानी होगी कि इनके साथ एक हजार से ज्यादा डोनर भी खड़े हैं। यह 1000 डोनर अकेले बालोद जिले में नहीं बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में फैले हुए हैं। अलग-अलग जिलों में उनके साथी समूह बनाकर रक्तदान करते हैं। लोगों को ज्यादा से ज्यादा रक्तदान के लिए प्रेरित करना और डोनर तैयार करना इनका मकसद होता है। बात हो रही है समाजसेवी व भावना फाउंडेशन के संस्थापक दीपक थवानी की। जो लोगों को स्वयं या साथियों के जरिए ब्लड दिलवाकर उनके जीवन में नया उजाला लाते हैं। बालोद व अन्य जिलों में भी अब तक 100 से ज्यादा ब्लड कैंप लगवा कर 1000 से अधिक नए लोगों को रक्तदान करने का जज्बा पैदा करवा चुके हैं। वे और उनके साथी रक्तदान के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। भावना फाउंडेशन लोगों को ब्लड डोनेट करने प्रेरित तो करती ही है, साथ ही थैलेसीमिया नामक भयंकर बीमारी के प्रति जागरूकता अभियान भी चला रही है। कोरोना काल में जहां लोगों की मदद करने के लिए भी फाउंडेशन आगे रही, तो वहीं रक्तदान का सिलसिला भी जारी रहा। भावना फाउंडेशन से जुड़े उनके कई साथी इस मुहिम में काम कर रहे हैं। बालोद से कादम्बिनी यादव, गायत्री साहू, चिराग गुजराती, कमलकांत साहू, रायपुर से प्रिया गुप्ता, पूनम अग्रवाल, जशपुर से अमित रंजन सिन्हा, जगदलपुर से मनीषा सोनी, शिव कुमार गुप्ता सहित अन्य लोगों का विशेष योगदान है। जो मदद के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।

पहले परिवार के लोग हो राजी, फिर संभाल लेंगे हम बाजी

भावना फाउंडेशन के संस्थापक दीपक थवानी का उद्देश्य यह भी है कि आजकल लोग डोनर या अन्य संस्थाओं पर ब्लड के लिए निर्भर होते हैं। लोग खुद ब्लड देना नहीं चाहते और सोचते हैं कि कोई संस्था या समूह से डोनर मिल जाए और वह अपने लोगों की जान बचा सकें पर अब फाउंडेशन यह प्रयास भी कर रही है कि लोगों को रक्तदान के प्रति जागरूक करना है। उन्हें ज्यादा से ज्यादा डोनर के रूप में तैयार करना है। इसलिए अब मदद के पहले यह शर्त भी रखी जाती है कि पहले परिवार के लोगों से डोनर तलाशिए। एक डोनर की कम से कम व्यवस्था करें। फिर बाकी ब्लड की जरूरत संस्था से पूरी करेंगे। इस तरह लोगों के सामने जब शर्त आती है तो फिर वे भी अपने लोगों की जान बचाने के लिए रक्तदान को तैयार होते हैं। एक बार रक्तदान करने के बाद आमतौर पर लोगों का डर भी दूर हो जाता है और वह दोबारा डोनर बनते जाते हैं और लोगों को रक्तदान करने में सुकून महसूस होने लगता है।

6000 से ज्यादा लोगों को मदद

थवानी ने 40 बार रक्तदान किया है और अभी तक 6000 से ज्यादा लोगो को रक्त उपलब्ध कराया है। वहीं थैलीसीमिया मरीजो को फ्री(जांच शुल्क रहित) में रक्त उपलब्ध कराते हैं। थैलीसीमिया नामक भयंकर बीमारी के लिए जनजगरुकता अभियान चला रहे हैं कि शादी के पहले आप एचएबी 2 टेस्ट करवा लें, उसके बाद ही शादी करें। लोगो को रक्तदान के लिए प्रेरित किया जाता है कि जो व्यक्ति 18 साल आयु या उससे अधिक हो जिसका वजन 50 किलो ग्राम से ऊपर हो और शरीर में 12.5 ग्राम से हीमोग्लोबिन की मात्रा ज्यादा हो वो रक्तदान कर सकता है। रक्तदान करने से हमारे शरीर मे किसी प्रकार की कोई बीमारी है या नही इस बात का भी पता चलता है।

18 साल की उम्र से ऐसे हुई मुहिम की शुरुआत

अपने दोस्त के भाई को 18 साल की उम्र में रक्तदान करके दीपक ने ये मुहिम चालू की। ऋषभ उपाध्याय जो कि दीपक थवानी के मित्र राहुल उपाध्याय के घनिष्ठ मित्र हैं, उनके छोटे भाई को सिकलिंन था 18 साल को उम्र में जब उसके भाई को रक्त की जरूरत पड़ी तो दीपक ने अपना रक्त छोटे भाई को दिया तब से उन्होंने ठान लिया कि हर 3 महीने में रक्तदान करूँगा और लोगो को इसके लिए जागरूक करूँगा।
दल्ली राजहरा में एक प्रेग्नेंट महिला को एबी निगेटिव, जो कि रियर ब्लड ग्रुप है, ये बहुत कम मिलता है उसकी जरूरत पड़ी तो रात 11 बजे उन्होंने अपनी गाड़ी से राजनांदगांव जाकर डोनर को लेकर आये और रात 2 बजे उनका रक्तदान करा उस महिला को जीवन दान दिया। चाहे रात हो या दिन ब्लड की जरूरत होने पर वे कहीं भी चले जाते हैं और जरूरतमंद को रक्त उपलब्ध कराते हैं।

20 से ज्यादा संस्था कर चुकी सम्मान, राज्य के बाहर भी नेकी

दीपक थवानी को अभी तक 20 से ज्यादा अलग अलग संस्थाओं ने सम्मानित किया है। रायपुर, दुर्ग, भिलाई,धमतरी,डोंगरगढ़ की समाजसेवी संस्थाओं ने सम्मान दिया है छत्तीसगढ़ ही नही, बाहर भी रक्त की उपलब्धता वो अपने संस्था के माध्यम से अलग अलग संस्था से जुड़े होने के माध्यम से आसानी से करा देते हैं। दुर्ग भिलाई रायपुर धमतरी बालोद कांकेर कोरबा जशपुर के अलावा बाहर मुंबई, दिल्ली, वेल्युर, बैंगलोर में भी रक्त उपलब्ध करा देते हैं।

छोटे भाई भी चले बड़े के नक्शे कदम पर

दीपक के कार्यों से प्रेरित होकर उनका छोटा भाई राहुल भी उनके नक्शे कदम पर चलने लगे हैं। वे भी रक्तदान करते हैं। हर साल अपने जन्मदिन पर अपने दोस्तों और मित्रों के साथ जाकर रक्तदान करते हैं। अभी तक वे भी 15 बार रक्तदान कर चुके हैं। इसके अलावा दूसरे लोगों को भी रक्त दिलवाने, ब्लड डोनर तलाशने में मदद करते हैं।

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