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प्रयोगशाला बना शिक्षा विभाग- त्रुटियों को बताने के बाद सेटअप संबंधी आदेश निरस्त

शिक्षा विभाग 2 कदम आगे 4 कदम पीछे की रणनीति पर

बालोद– छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन बालोद के जिलाध्यक्ष दिलीप साहू ने विज्ञप्ति जारी कर बताया कि एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष संजय शर्मा, प्रदेश संयोजक सुधीर प्रधान, वाजिद खान, प्रदेश उपाध्यक्ष हरेंद्र सिंह, देवनाथ साहू, बसंत चतुर्वेदी, प्रवीण श्रीवास्तव, विनोद गुप्ता, डॉ कोमल वैष्णव, प्रांतीय सचिव मनोज सनाढ्य प्रांतीय कोषाध्यक्ष शैलेन्द्र पारीक सहित सभी पदाधिकारियों ने कहा है कि 2008 में तत्कालीन शिक्षा सचिव नंदकुमार जी ने सेटअप जारी किया था। उस समय शिक्षक संगठनों से सुझाव लिया गया था। 14 वर्ष बाद सेटअप जारी किया गया उसमें शिक्षक संगठनों से सुझाव ही नही लिया गया।एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने बताया कि छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन द्वारा वर्तमान सेटअप की विसंगतियों को रेखांकित कर सेटअप में सुधार हेतु ज्ञापन दिया गया था। ऐसे त्रुटियों को बताने के बाद सेटअप सम्बन्धी आदेश को निरस्त किया गया। संजय शर्मा ने कहा कि शिक्षा विभाग प्रयोगशाला बन गया है। शिक्षा विभाग 2 कदम आगे 4 कदम पीछे की रणनीति पर काम कर रहा है। ऑनलाइन ट्रांसफर, सेटअप, पदोन्नति जैसे बड़े मामलों पर शिक्षा विभाग ने निर्णय लिया लेकिन किसी भी निर्णय को पूर्णता नही दे पाये।ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा सितंबर 2021 तक की गई विद्यार्थियों की प्रविष्टि जानकारी को आधार मानकर cg school.in में नवीन सेटअप अपलोड किए गए हैं। ट्रांसफर पोर्टल में भी वही प्रदर्शित हो रहा है, ऐसे में शिक्षकं व प्रदेश के बीच शालाओं के सेटअप पर स्थिति स्पष्ट होना ही चाहिए।

पदाधिकारियों ने कहा कि छात्र संख्या लाखो में बढ़े तो शिक्षको की संख्या भी बढ़ाये विभाग!इस मांग पर शिक्षा विभाग बैकफुट में आ गया। वास्तविकता है कि 2008 के सेटअप से शालाओं का संचालन किया जा रहा है, इन 14 वर्षों में छात्रों की तादाद लाखो में बढ़ गई परन्तु विभाग ने शिक्षको की संख्या में अपेक्षित वृद्धि नही की। अभी प्रदेश के कई शालाओं में छात्रों की संख्या में भारी वृद्धि हो गई है, परन्तु वहाँ पुराना सेटअप ही लागू है, जिससे शिक्षको को अध्यापन में परेशानी है। ऐसे शालाओं में छात्र संख्या के अनुपात में सेटअप बढ़ाना ही पड़ता किन्तु वित्त विभाग से पद वृद्धि नही ली गई है, जिससे सेटअप संबंधी आदेश को वापस लेना पड़ा। शिक्षा विभाग ज्यादा छात्र संख्या वाले शालाओं के सेटअप में वृद्धि कर उचित शिक्षण का पहल करे। संस्कृत व वाणिज्य के पदों पर कटौती किये जाने पर टीचर्स एसोसिएशन ने मोर्चा खोल दिया था परिणामस्वरूप अंततः आदेश रद्द करना ही उपाय था। प्रत्येक शाला में प्रधान पाठक व विद्यार्थियों के अनुपात में शिक्षकों की पदस्थापना होने से गुणवत्ता पूर्ण अध्यापन होगा यह सुझाव शासन को दिया गया है।

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