बालोद। मुकेश कुमार पात्रे विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) बालोद के न्यायालय द्वारा आरोपी कन्हैया शिववंशी पिता राजेश शिववंशी, उम्र 22 वर्ष, निवासी वार्ड क. 06 समनापुर, थाना-नैनपुर जिला मंडला (म.प्र.) को भारतीय दंड संहिता की धारा 363 के अपराध में तीन वर्ष का सश्रम कारावास, भारतीय दंड संहिता की धारा 366 के अपराध में पांच वर्ष का सश्रम कारावास तथा धारा 376 भा. द.वि. व लैंगिक अपराध की धारा 4 के अपराध में दस वर्ष का सश्रम कारावास व कुल 8,000/- रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया। प्रकरण विशेष लोक अभियोजक छन्नू लाल साहू के अनुसार अभियोगी / सूचनाकर्ता पीड़िता की माता है, जो थाना राजहरा में आकर रिपोर्ट दर्ज करायी कि उसकी नाबालिग लड़की को घटना दिनांक 18 मई 2018 को रोजगार गारंटी में काम करने चली गई थी. पीड़िता घर पर अकेली थी, जब वह काम से 10:30 बजे वापस आई तो पीड़िता घर में नहीं थी, उसे जानकारी मिली कि पीड़िता सुबह 9:30 बजे घर से निकलकर अपनी सहेली के यहां कारूटोला गई थी। पीड़िता की सहेली ने उसे फोन करके बताई कि पीड़िता डोंगरगढ़ मेरी मम्मी पापा के साथ घुमने गई है। कारूटोला जाकर पता किये किंतु पीड़िता को कोई पता नहीं चला, उसके बाद कोई अज्ञात व्यक्ति के द्वारा पीडिता को बहला-फुसलाकर भगा ले गया है कि मौखिक रिपोर्ट थाना राजहरा में दर्ज कराया गया। पीड़िता बतायी कि अभियुक्त उसे चिखलाकसा से दल्लीराजहरा रेल्वे स्टेशन ले गया, जहां से ट्रेन में बैठकर दुर्ग ले गया. उसके बाद दुर्ग से बस बैठकर डोंगरगढ़ ले गया तथा उसी रात को मंदिर गये। अभियुक्त डोंगरगढ़ में झाड़ियों के पीछे ले जाकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाया, उस समय वह कुछ बोल पाने में असमर्थ थी, क्योंकि उसके चेहरे में सूजन हो गया था. फिर सुबह डोंगरगढ़ से बस में राजनांदगांव ले गया। जब वह राजनांदगांव रेल्वे स्टेशन में सीढ़ी के पास बैठी थी उसी समय वह अपने बड़े भाई को देखी, तब अपने भाई को फोन के माध्यम से अपने पास बुलायी। अभियुक्त को जब पता चला कि उसका भाई रेल्वे स्टेशन में आया है तो वह भागने का प्रयास किया किंतु पीड़िता के भाई ने उसे पकड़ लिया तब अभियुक्त उसके भाई के हाथ को काटकर भाग गया। पीड़िता की माता की मौखिक रिपोर्ट के आधार पर आरक्षी केन्द्र दल्लीराजहरा के सहायक उप निरीक्षक हेमन सिंह ठाकुर द्वारा अभियुक्त के खिलाफ अपराध क० 90/ 2018 धारा 363, 366, आईपीसी, 4.6 पोक्सो एक्ट का अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। विवेचना पूर्ण कर न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया। जहां विचारण न्यायालय द्वारा नाबालिग स्त्री की सहमति महत्वहीन होती है, के आधार पर उक्त दण्ड से दण्डित किया गया।
बालोद में जज ने बताया आधार – नाबालिग स्त्री की सहमति महत्वहीन होती है, इसलिए नाबालिग से दुष्कर्म करने वाले को 10 वर्ष का कारावास

One thought on “बालोद में जज ने बताया आधार – नाबालिग स्त्री की सहमति महत्वहीन होती है, इसलिए नाबालिग से दुष्कर्म करने वाले को 10 वर्ष का कारावास”
Comments are closed.