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गर्मी में राहत – डुड़िया के युवा यशवंत टंडन मंदिर में नवरात्रि में पूजा में काम आने वाले ज्योति कलश व सकोरानुमा नादी में रखवा रहें दाना-पानी

पक्षियों के लिए मुहिम शुरू, घर-घर रखवा रहें सकोरे
अर्जुन्दा/बालोद। गांव में आज भी सुबह चिड़ियों की चहचहाहट के बीच ही लोगों की नींद खुलती हैं। इनकी चहक से घर, आंगन में उत्साह का संचार होता है। इनकी चहक बरकरार रहे, इसलिए डुड़िया गांव के युवाओं ने पक्षियों के संरक्षण के लिए मुहिम छेड़ी है। गांव के हर घर में सकोरानुमा मिट्टी का बर्तन रखवाकर उसमें दाना पानी का इंतजाम कर रहे हैं। युवाओं के साथ ही गांव के छोटे छोटे बच्चे भी इस मुहिम में साथ दें रहें हैं नवरात्रि में मां परमेश्वरी मंदिर प्रांगण में जो कि पूजा में उपयोग आने वाले कलश जिसे लोग तालाब या नदी किनारे फेंक देते हैं, उसे एकत्रित कर पेड़ पर या फिर लोगों के घरों में बांध रहें हैं। इसमें चांवल, गेहूं का दाना और पानी डालकर छोड़ दें रहें है, ताकि इस भीषण गर्मी में कोई भी पक्षी भूखा प्यास न रहे। गांव के युवा यशवंत कुमार टंडन ने बताया कि एक दिन वह घर में कोई वस्तु ढूंढ रहे थे। तब उन्हें केन्द्रीय मंत्री मेनका गांधी द्वारा लिखित एक किताब मिली । उस किताब का नाम था “बेजुबानों की कहानी” जिसे पढ़कर बहुत ही प्रेरित और प्रभावित हुआ कि वाकई पशु-पक्षी हमारे ही मददगार होते हैं। जैसे किसानों के मित्र की तरह होतें है।

युवाओं की टीम जुटी हुई

ऐसे भी गांव के मां परमेश्वरी मंदिर में हर साल मिट्टी के सैकड़ों कलश चढ़ते हैं। ये कलश बाद में किसी के काम के नहीं रहते। इसलिए कलश और मिट्टी के अन्य बर्तनों की सफाई कर उसे गांव के पेड़ों में बांध रहें हैं। छत पर भी सकोरानुमा बर्तन को रख रहे हैं। जिसमें लोग नियमित रूप से दाना पानी डालने लगें हैं।
इस मुहिम में गांव के जागरूक प्रियांचल टंडन, गुलशन टंडन, तरूण टंडन, हेमंत टंडन, गजेन्द्र टंडन,लिकेश टंडन,नम्रता टंडन, दामिनी टंडन का विशेष सहयोग रहा। यशवंत कुमार टंडन ने बताया कि इस मुहिम में मां परमेश्वरी मंदिर समिति का सहयोग मिला। युवाओं की इस पहल की काफी सराहना हो रही है।

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