पेड़ ही था इसका घर, यहीं होती थी जिंदगी गुजर-बसर, उसी पेड़ पर आत्माराम ने कर ली आत्महत्या, पढ़िए जिंदगी के संघर्ष की मार्मिक कहानी



बालोद/ गुरुर। गुरुर ब्लॉक के ग्राम दानीटोला में लगभग 55 वर्ष के आत्माराम सोरी ने इमली के पेड़ पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की जानकारी लोगों को 16 मार्च को सुबह हुई। लोगों का कहना है कि वह इमली का पेड़ ही उसका घर था। उस पेड़ के नीचे ही वह बिस्तर लगा कर सोया करता था। ना कोई उसका घर था ना कोई सुरक्षित बसेरा। बस इमली के पेड़ के नीचे उसकी जिंदगी गुजर बसर हो रही थी। उसका घर भी टूट फूट गया था। प्रधानमंत्री आवास योजना से घर बनेगा सोंचकर उसने जगह को साफ करवाया था।

लेकिन उसका घर भी नहीं बन पाया। वह अकेला था । उसके साथ और कोई नहीं रहता था। मानो सबने उनका साथ छोड़ दिया था। गांव में उनके भाई व रिश्तेदार रहते थे। आत्माराम की पत्नी सुशीला भी वर्षों से उनसे अलग होकर बोरीदकला में अपने बच्चों के साथ रहती थी। आत्माराम के ना रहने का ठिकाना था ना खाने पीने का।

पत्थरों को टीका कर चूल्हा बनाकर अपने लिए कुछ खाने को बनाता था। पर वह काफी नहीं था। ना तो उसके पास पकाने को ज्यादा कुछ साधन था ना ही खाने का। बताया जाता है कि वह कई बार इमली खाकर या इमली के पत्ते खाकर गुजारा करता था। लोग उसे तरस खाकर खाना देते थे। कई बार तो सिर्फ मिक्चर खा कर ही पेट भर लेता था। मानो जिंदगी उसकी इसी रंग में ढल गई हो। लेकिन होली के पहले गांव में शोक का माहौल है। लोग इस आत्माराम के जाने से दुखी हैं। लोगों को इस बात का पछतावा है की काश आत्मा की जिंदगी भी अच्छी होती है और वह संघर्षों से इस तरह न हारता। उसके इस आत्महत्या के पीछे असल वजह क्या हो सकती है ये तो हम नहीं कह सकते, लेकिन कुछ इस तरह की परिस्थितियां भी थी जिससे वह परेशान था और जिंदगी की लड़ाई लड़ते-लड़ते थक गया था। फिर उसी पेड़ जहां वह सोता था वहीं फांसी लगा ली।

पत्नी ने की बेटी की शादी, उसे बुलाया तक नही, इस बात से था दुखी

तो वही जब हम घटना के बाद पतासाजी के लिए गांव पहुंचे। तो यह बात जो आत्मा के दिल को छूने वाली बात हो सकती है, सामने आई कि कुछ दिन पहले उनकी पत्नी सुशीला ने अपनी एक बेटी की शादी ग्राम बोरीदकला में की। शादी कार्ड में आत्माराम का नाम पिता के रूप में तो था लेकिन उसने वर्षों की नाराजगी के चलते पत्नी ने आत्माराम को न्योता भी नहीं दिया। जबकि गांव के पड़ोसियों को न्योता दिया गया था। अपनी बेटी की शादी में ही न बुलाये जाने से आत्माराम को काफी दुख हुआ था। अपनी पीड़ा वह कुछ लोगों को बताया फिरता रहता। ऐसा अनुमान है कि इस उपेक्षा से वह काफी क्षुब्ध हुआ होगा और आत्मघाती कदम उठाया। फिलहाल पुलिस मर्ग कायम कर मामले की जांच कर रही। आत्मा राम के इस संघर्ष भरे जीवन ने लोगों की आत्मा को झकझोर कर रख दिया। अंततः इस दुनिया से चल बसा। लोग अब जब इस इमली के पेड़ को देखते हैं तो उन्हें एक अजब एहसास होता है।

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