संजीवनी 108 बालोद एंबुलेंस में मरीज की मौत का आरोप, मालीघोरी की घटना, अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टर ने मरीज को मृत घोषित किया



बालोद। संजीवनी 108 की सेवा जहां घायलों की जान बचाने के लिए जानी जाती है तो वही कभी-कभी लापरवाही की भेंट भी चढ़ जाती है। ऐसा ही एक मामला मालीघोरी में सामने आया। जहां के रहने वाले एक मरीज शैलेंद्र भरद्वाज उम्र 45 वर्ष निवासी दुधली को तबीयत खराब होने पर संजीवनी 108 बालोद की एंबुलेंस क्रमांक सीजी 04 एनई 3604 से जिला अस्पताल में भर्ती के लिए ले जाया जा रहा था। जहां अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि एंबुलेंस में मौजूद स्टाफ ने भी उनका ध्यान नहीं रखा और मरीज को एंबुलेंस में सुला कर ले जाते समय उन्हें अकेला छोड़ दिया गया। एंबुलेंस में साथ में आई महिला ईएमटी मरीज के साथ बैठने के बजाय आगे पायलेट के बगल सीट पर बैठ कर गई। जबकि नियम यही होता है कि अगर कोई मरीज की स्थिति गंभीर हो तो ईएमटी रास्ते में एंबुलेंस में ही उनके साथ बैठकर उन्हें ऑक्सीजन देते हुए या अन्य प्राथमिक उपचार करते हुए उन्हें अस्पताल पहुंचाते हैं। लेकिन इसमें कुछ ऐसा नहीं हो पाया। अंततः मरीज की मौत हो गई। घटना लगभग शनिवार दोपहर 12 बजे के आसपास की है। अब इसमें परिजन संदीप द्वारा संजीवनी 108 सेवा में शिकायत कर लापरवाही का आरोप लगाया गया है। जिस पर जांच कमेटी बैठाई जा रही है। ड्यूटी पर मौजूद संजीवनी 108 सेवा के कर्मचारियों से जवाब मांगा गया है। इस एंबुलेंस में ईएमटी के रूप में प्रियंका साहू ड्यूटी पर थी तो पायलट खेमलाल थे।

घर पर अकेले थे मरीज

बताया जाता है कि जिस मरीज शैलेंद्र भारद्वाज की मौत हुई वह दुधली में अकेले रहते थे। उनके परिवार के अन्य सदस्य पत्नी व बच्चे राजनांदगांव व अन्य जगहों पर रहते थे। मरीज को शराब पीने की भी लत थी। यह बात भी सामने आ रही है। हालांकि हम इसकी अधिकृत पुष्टि नहीं करते हैं। यह तो पीएम रिपोर्ट से भी पता चल जाएगा। 2 दिन से मरीज घर से बाहर भी नहीं आया था। इससे पड़ोसियों को भी संदेह हो रहा था कि कहीं उसकी तबीयत तो खराब नहीं है। फिर कुछ पड़ोसी उसके घर जाकर देखें तो मालूम हुआ वह बिना खाए पिए बेसुध पड़ा था।

लापरवाही के आरोपों पर ईएमटी प्रियंका ने यह कहा

जब हमने इस तरह की लापरवाही के आरोप पर संजीवनी 108 की ईएमटी प्रियंका साहू से बातचीत की। तो उन्होंने कहा कि गांव के किसी पड़ोसी ने 108 में फोन करके तबीयत खराब होने की जानकारी दी थी। जब हम गए थे वहां घर पर सिवाय मरीज के और कोई नहीं था। जिसने फोन किया था वह पड़ोसी भी मौके पर मौजूद नहीं मिला। क्योंकि बिना किसी अटेंडर के मरीज को अस्पताल ले जाकर भर्ती नहीं कर पाते। इसलिए हमने कुछ पड़ोसियों को भी कहा कि साथ में चलिए और भर्ती करवा कर वापस आ जाइए। लेकिन एक पड़ोसी ने कहा कि मरीज के बहन को फोन किया गया है वह लोग आ जाएंगे। फिर हम मरीज को एंबुलेंस से ले जा रहे थे। मरीज को जब पल्स जांच किया गया तो यह मालूम हुआ कि लगातार दो-तीन दिन से कुछ खाया नहीं था और ग्लूकोस लेवल पूरी तरह डाउन हो चुका था। ऑक्सीजन चढ़ाने की जरूरत नहीं थी, हम उन्हें तत्काल अस्पताल ले गए। जहां डॉक्टर ने चेक किया उसके बाद ड्रिप लगाने के लिए कहा फिर ईसीजी चेक करने पर उनकी मौत की पुष्टि हो गई।

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