बालोद के इस गांव में लोगों की सुबह की शुरुआत होती है बेवड़ो के साथ



सुबह 7 बजे से रात 11 बजे तक बिकती रहती है अवैध शराब

बालोद। बालोद ब्लॉक का ग्राम जगन्नाथपुर, जिसे सोशल मीडिया के जरिए मदिरापुर का नाम मिल ही चुका है, इस गांव में माहौल सुधारने की कोशिश पुलिस प्रशासन द्वारा दिसंबर में की गई थी। लगातार 4 कोचिए जेल गए लेकिन माहौल बदलते अब चार माह भी नहीं लगे। फिर से यहां पियक्कड़ों का हुजूम बढ़ने लगा है। हाल ऐसा है कि यहां के लोगों की सुबह की शुरुआत बेवड़ो के साथ होती है। सुबह 7 बजे से ही गांव के चौक चौराहे और आउटर में अवैध रूप से शराब बिक्री शुरू हो जाती है। जिसका सिलसिला रात 10 से 11 बजे तक चलता है। 10 से ज्यादा ऐसे नामी कोचिए है जो इस काम में हद से ज्यादा संलिप्त हैं। सुबह यहां के खासतौर से महिलाओं का चलना ही दूभर हो जाता है। क्योंकि रास्ते में बेवड़े नजर आते हैं। जो शराब के नशे में धुत पड़े रहते हैं तो वहीं शाम रात को माहौल तो और बिगड़ जाता है। चौक व मुख्य रास्तों पर महिलाओं का चलना दूभर हो जाता है। यहां के माहौल का जायजा लेने जब हम इस गांव में पहुंचे तो वाकई में स्थिति बद से बदतर नजर आई। सुबह 7 बजे से ही यहां कोचिए बिजली ऑफिस व सोसाइटी के आसपास तो कुछ तो चौक पर ही शराब बेचते नजर आए। कुछ तो खुलेआम जाम छलकाते तो कुछ चोरी-छिपे बैग या बाइक की डिक्की से शराब सरकाते दिखे। एक व्यक्ति तो नशे में धुत बिजली ऑफिस के सामने सड़क किनारे पड़ा रहा। जब हमने उनसे पूछा कि कहां के हो तो वह जवाब भी नहीं दे पा रहा था। वह बोलने की स्थिति में भी नहीं था। इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि यहां कितनी सुबह से ही मदिरा प्रेमियों को शराब आसानी से मिल जाती है। जहां मदिरा दुकाने अपने निर्धारित समय में खुलती है तो वहां जगन्नाथपुर में मदिरा लेने का कोई समय निर्धारित नहीं है। आप जब चाहे तब यहां आकर कोचियों को फोन करके अपने पास शराब मंगवा सकते हैं। कुछ एक कोचिए की पहुंच तो अब जगन्नाथपुर ही नहीं बल्कि आसपास के गांव परसदा, कोबा सहित कई गांवों तक हो गई है। जिनके ग्राहक उन्हें ढूंढते हुए गांव तक आते हैं। जब वे चौक चौराहों पर नजर नहीं आते, तो लोग उनके घरों में जाकर उनसे शराब खरीदते हैं।

पुलिस को ना हो शक इसलिए बाइक और बैग के जरिए बेच रहे शराब

4 लोगों की गिरफ्तारी के बाद शराब कोचियों की चालाकी और बढ़ गई है। पुलिस व आबकारी विभाग को शक ना हो इसलिए वे बाइक की डिक्की या फिर बैग में रख कर शराब बेचते हैं। शराब दुकानों से ज्यादा मात्रा में शराब लाकर रख लेते हैं और थोड़ी-थोड़ी मात्रा में उसे घर से निकाल कर बेचने के लिए निकलते हैं। सुबह से देर रात तक इसी तरह से उन कोचियों की अच्छी खासी कमाई हो जाती है।

मनरेगा कार्य स्थल पर ग्राम सभा में भी उठा मुद्दा

गांव की महिलाओं के बीच गांव में बढ़ रहे शराब खोरी को लेकर आक्रोश पनपने लगा है। महिलाएं इस नशे के कारोबार से परेशान हो गई है। क्योंकि इससे उनके घर गृहस्थी पर भी आंच आने लगी है। इसमें शासन प्रशासन से भी मांग उठने लगी है कि गांव में शराबबंदी हो, सरकार को भी इस ओर ध्यान देना चाहिए। क्योंकि कांग्रेस सरकार ने घोषणा भी की है कि हम शराबबंदी करेंगे। इस पर जल्द से जल्द अमल करने की मांग यहां की महिलाएं भी कर रही हैं। विगत दिनों मनरेगा कार्य स्थल पर भी आयोजित ग्राम सभा में इस बात को लेकर ग्रामीणों ने प्रमुखता से उठाया कि शराब की अवैध बिक्री तो बंद ही हो, शराबबंदी भी हो। गांव के बिगड़ते माहौल को लेकर महिलाओं ने चिंता जाहिर की। वहीं कोचियों के प्रति आक्रोश भी जताया। वहीं सरपंच अरुण साहू से भी अपेक्षित कार्रवाई की मांग की। इस पर सरपंच ने कहा कि मैंने बहुत प्रयास कर लिया लेकिन उचित कार्रवाई ही नहीं हो पाती। यहां तो कोचिए यह हल्ला मचाते हैं कि हमारी तो पुलिस से सेटिंग है। पुलिस हमारा क्या कर लेगी। हम तो शराब बेचेंगे ही।

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