विद्यांजलि 2.0 के माध्यम से कोई भी व्यक्ति अथवा स्वयंसेवी संगठन विद्या या परिसंपत्ति विद्यालय के नाम कर सकता है दान



जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने व्याख्याता रघुनंदन गंगबोईर को दी नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी

बालोद। जब‍ से‍ कोविड-19 महामारी का प्रकोप हुआ है, सामान्य‍ जन जीवन गंभीर‍ रूप‍ से‍ बाधित हुआ है, जिसमें शिक्षण कार्य
2020 और 2021 में स्कूलों का बंद होना भी शामिल है। इसने स्कूलों में नामांकित‍ ‍240‍ मिलियन से अधिक बच्चों को प्रभावित किया है।
जैसा कि स्कूल शिक्षा और‍ साक्षरता‍ विभाग‍ द्वारा‍ तैयार‍ की‍ गई है। विद्यांजलि योजना 2.0 के संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी पीसी मर्कले ने बताते हुए कहा कि स्कूलों को न केवल शिक्षण और अधिगम के तरीकों को फिर से
तैयार‍ करना‍ और स्कूल में स्कूल शिक्षा‍ के मिश्रण ‍ के ‍माध्यम‍ से‍
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए उपयुक्त तरीका केंद्र एवं राज्य सरकार के द्वारा किया जा रहा है साथ ही जनसाधारण एवं समुदाय संगठन से विद्यालय के मूलभूत आवश्यकता अनुरूप शिक्षा दान एवं परिसंपत्ति अर्पण करने की योजना बनाई जा रही है। जिसका नाम ही विद्यांजलि है ।योजना के संबंध में जिला में नव पदस्थ परियोजना समन्वयक अनुराग त्रिवेदी ने बताया कि प्राथमिक स्तर और विशेष रूप से निम्न प्राथमिक स्तर पर माता-पिता और समुदाय की भूमिका हो सकती है ।


सहायता प्रदान करने में पीयर मित्रों, माता, माता-पिता, सेवानिवृत्त शिक्षक आदि सहित समुदाय के अन्य प्रेरित
सदस्यों‍ की‍ भागीदारी होगी ।
समुदाय अथवा संगठन की भागीदारी प्रबंधन के लिए जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय बालोद से व्याख्याता रघुनंदन गंगबोईर को नोडल अधिकारी के रूप में दी गई जिम्मेदारी के संबंध में उन्होंने बताया कि विद्यांजली 2.0 वेब पोर्टल /मोबाइल ऐप पर ऐसे व्यक्ति अथवा संगठन‍ (एनजीओ)‍ या‍ समुदाय के ‍ रूप‍ में‍ अपना पंजीकरण‍ कर‍ सकता‍ है‍ और‍
मोबाइल‍ नंबर‍ और‍ ईमेल‍ आई डी उपलब्ध करा कर प्रोफाइल को पूरा कर सकता है ।एक‍”स्वयंसेवक” से अभिप्राय: भारत‍ का‍ नागरिक/नॉन रेसिडेंट भाग इंडियन (एनआरई)/भारतीय मूल का
व्‍यक्ति भारत में पजीकृत एक संगठन/संस्थान/कंपनी/समूह से है जो स्कूल गतिविधियों में भाग
लेकर सेवाएं प्रदान करने स्कूल को निशुल्क परिसंपत्ति
/सामग्री/उपकरण‍ प्रदान करने का इच्छुक हो वह उपरोक्त पोर्टल के माध्यम से पंजीयन कराकर कर सकता है। बच्चों के अधिगम में सुधार के लिए पूर्व विद्यार्थी और समुदाय के सम्मिलित प्रयासों को प्रोत्साहित
किया जाएगा।जिला समग्र शिक्षा कार्यालय के परियोजना समन्वयक द्वय जीएल खुरश्याम एवं चतुर्भुज साहू ने इच्छुक व्यक्ति अथवा स्वयंसेवी संगठन के द्वारा जिला के विद्यालयों की आवश्यकता के अनुरूप परिसंपत्ति का दान कर अपना तथा अपने पूर्वजों का नाम चिरकाल तक स्थापित कर सकता है। उपरोक्त संबंध में राज्य शैक्षिक अनुसंधान प्रशिक्षण परिषद रायपुर के द्वारा आयोजित वेबीनार में जिला के नोडल अधिकारी के रूप में रघुनंदन गंगबोईर ने कार्यशाला में वर्चुअल उपस्थित होकर जानकारी हासिल की।

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