ये गलत बात है- प्रदर्शन की आड़ में दादागिरी- शिक्षिका कहती रही मुझे घर जाने दो, तो लोग स्कूटी के सामने लेट गए, इधर बुधवारी बाजार में व्यापारियों ने समर्थन नहीं दिया तो जबरदस्ती बंद कराने पर हंगामा, व्यापारियों के अध्यक्ष ने कहा समाज के लोग तलवार,फरसा लेकर आए थे



हमने नहीं दिया था समर्थन जबरदस्ती करवाया बंद, तलवार फरसा लेकर भी आए थे- राजू पटेल

बालोद। बालोद जिला मुख्यालय में सर्व आदिवासी समाज का धरना प्रदर्शन और चक्का जाम शाम 5 बजे तक चला। इस दौरान कई जगह तनाव की स्थिति भी निर्मित होती रही। पुलिस प्रशासन बार-बार मोर्चा संभालती रही तो वही कई लोगों को अप्रिय स्थिति का सामना भी करना पड़ा। खास तौर से जरूरी काम से जाने वाले लोग बहुत परेशान हुए। समाज के लोग सड़क से हटने को तैयार नहीं थे अगर कोई गाड़ी चलाना चाहते थे लोग उनकी गाड़ियों के सामने लेट जाते थे। ऐसा ही एक दृश्य पड़कीभाट में दिखा। जहां एक शिक्षिका को बालोद से दुर्ग जाना था। घर पहुंचना जरूरी था लेकिन उन्हें जाने नहीं दिया गया। वह बार-बार कहती रही कि भैया मुझे जाने दो। लेकिन समाज के कुछ लोग स्कूटी के सामने ही लेट गए और हंगामा करने लगे। पुलिस प्रशासन भी वहां मौजूद था। लेकिन वह भी महिला की मदद ना कर सके। अंततः महिला को रास्ता बदलना पड़ा और उन्हें वापस बालोद लौट कर आना पड़ा जब 5 बजे के बाद चक्का जाम खत्म हुआ तब वह घर जा सकी ऐसे कई परेशानी आज दिन भर लोगों को देखनी पड़ी। समाज की मांगे अपनी जगह जायज है पर इससे जनता को नुकसान उठाना पड़े यह भी गलत है। इसलिए आज इस प्रदर्शन पर कई सवाल खड़े हुए। इधर बुधवारी बाजार में भी जोरदार हंगामे की स्थिति रही। दोपहर करीब एक बजे व्यापारी और समाज आमने-सामने आ गये। पुलिस प्रशासन ने बीच-बचाव किया। दरअसल में समाज के लोग जबरदस्ती बुधवारी बाजार की दुकानों को बंद कराने पहुंचे थे। इस मामले में व्यापारी संघ के अध्यक्ष सहित अन्य व्यापारियों ने कहा कि हमने कोई समर्थन नहीं दिया था। यह समाज का मामला है तो हम क्यों दुकान बंद करें। समाज के लोगों ने नारेबाजी करते देसी व अंग्रेजी शराब दुकान तक को भी बन्द करवाया।

अध्यक्ष बोले फरसा लेकर आये थे समाज के लोग

वहीं इस मामले में व्यापारी संघ की ओर से अध्यक्ष राजू पटेल ने कहा कि समाज के लोग 2 दिन पहले हमारे पास आए थे कि हम बंद करवा रहे हैं। इसमें दुकानदारों का समर्थन चाहिए। तो हमने कहा था कि ऐसे ही कोरोना काल में लगातार बंद से व्यापार चौपट रहा है। इसलिए बंद का समर्थन नहीं कर सकते। तो उन लोगों ने कहा था कि दल्ली चौक के पास संकेतिक प्रदर्शन करेंगे। आसपास की दुकानों को ही बंद करवाएंगे। लेकिन आज प्रदर्शन के दौरान समाज के लोग तलवार फरसा लेकर बुधवारी बाजार तक जा पहुंचे और जबरदस्ती दुकान बंद करवाने लगे। इस बात का पता चलने के बाद हमने वहां पहुंचकर विरोध भी किया। विवाद की स्थिति भी निर्मित हुई। थाना प्रभारी मनीष शर्मा भी पहुंचे। समाज के लोगों को समझाइश दी गई तब फिर मामला शांत हुआ और दोबारा दुकानें खोली गई। हमने समाज के लोगों को कहा था कि यह सामाजिक मांगे हैं। इसलिए हम बंद का समर्थन नहीं करेंगे।

पुरुर कांकेर नेशनल हाईवे पर भी चक्का जाम, पढ़िए क्या थी मांगे

पुरुर नेशनल हाइवे पर गाड़ियों को दो बजे तक रोका गया,यहां मीडियाकर्मियों को भी नहीं जाने दिया गया,बावजूद कुछ मीडियाकर्मियों ने आईडी भी दिखाई,लेकिन उनके साथ बदसलूकी की गई

समाज के लोगों ने बताया कि सरकार हमारी मांगों को अनसुनी कर रही है कई बार हम आदिवासियों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है इसलिए आज हमें चक्का जाम पर उतरना पड़ा। बालोद जिला ही नहीं बल्कि सभी जिलों में आदिवासी समाज आज आक्रोशित है और सड़क पर उतर आए हैं। हमारे अल्टीमेटम का भी शासन-प्रशासन पर असर नहीं हो रहा है। जिसके लिए अब हमें सड़क की लड़ाई लड़नी पड़ रही है। पेसा कानून को शीघ्र क्रियान्वयन करने, सिलगेर में मारे गए निर्दोष ग्रामीणों के परिवार को 50 लाख व घायलों को 5 लाख तथा मृतक के परिवारों के सदस्य को योग्यता अनुसार शासकीय सेवा देने, प्रदेश में नक्सल समस्या के स्थाई समाधान हेतु शासन तत्काल पहल करें, नक्सल प्रभाव कारण प्रदेश से बाहर गए लोगों को वापस लाएं, प्रदेश में खनिज जैसे कोयला लोहा खनन हेतु जमीन अधिग्रहण के जगह जमीन लीज पर लिया जाए, जमीन मालिक को शेयर होल्डर बनाया जाए, गौण खनिज रेती मुरूम का पूर्ण अधिकार ग्राम सभा को हो,छत्तीसगढ़ प्रदेश के 18 जनजातियों को मात्रात्मक त्रुटि सुधार किया जाए ,जाति प्रमाण पत्र जारी किया जाए, फर्जी जाति प्रमाण पत्र से नौकरी कर रहे लोगों को बर्खास्त किया जाए, आदिवासी समाज के बहन बेटियों को बहला-फुसलाकर उससे शादी करके उनके नाम से संपत्ति अर्जित करने एवं राजनीतिक लाभ लेने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई कर संपत्ति वापस की जाए, आदिवासी सलाहकार परिषद का गठन किया जाए, पांचवी अनुसूची के क्षेत्र में पेसा प्रावधान के अनुसार नगरी निकाय मंडी बोर्ड कोऑपरेटिव सोसाइटी मंडी, ग्राम पंचायत, वन समितियों में अध्यक्ष का पद अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित किया जाए ,बेरोजगार आदिवासियों को बेरोजगारी भत्ता दी जाए ,जनगणना में आदिवासियों की जनसंख्या, भूमि अधिग्रहण के कारण विस्थापन नक्सलियों का आतंक पलायन के कारण लगातार कम हो रही है, साथ ही जनगणना के समय षडयंत्र पूर्वक भी कम किया जाता है, इस पर तत्काल संज्ञान लिया जाए, आदि विभिन्न मांगों को लेकर समाज के लोगों ने प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के बैनर तले अखिल भारतीय गोंडवाना महासभा, छत्तीसगढ़ कंवर समाज अखिल भारतीय हलबा समाज उराव समाज सरना उरांव समाज चेरवा समाज सहित अन्य कई समाज के लोग शामिल थे।

सर्व समाज के जिला अध्यक्ष ने कहा- जो हुआ उसके लिए खेद है

वही जब हमने इस पूरे मामले में सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष उमेंदी राम गंगराले से बात की और उन्हें अवगत कराया कि समाज के कुछ लोगों द्वारा आज प्रदर्शन की आड़ में कई जगह लोगों से अभद्रता की गई,तलवार फरसा लेकर निकले, वाद विवाद की स्थिति निर्मित हुई तो उन्होंने भी इस मामले में खेद जताते हुए कहा कि जो हुआ ठीक नहीं हुआ। मुझे भी एसपी के जरिए इस बारे में जानकारी मिली है। मैंने इसकी शिकायत समाज में राज्य स्तर पर भी की है। बाकी जगह प्रदर्शन 2 बजे तक खत्म हो गया था। लेकिन बालोद में 5 बजे तक चला। समाज के नई जनरेशन के जो लोग हैं उन्हें प्रदर्शन में अपने आप पर काबू रखना था। हमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना था। लेकिन कुछ लोगों ने ठीक नहीं किया। हमारी लड़ाई सरकार से थी, लोगों को हमें परेशान नहीं करना था। इसके लिए हमें खेद है। मैंने सभी के सामने सार्वजनिक रूप से भी इसके लिए खेद जताया है।

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