विश्व आदिवासी दिवस में बालोद में ऐलान – 30 अगस्त से मांगों के समर्थन में जिले में आदिवासी समाज करेंगे आर्थिक नाकेबंदी




बालोद:- सर्व आदिवासी समाज/अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक संघ जिला बालोद के संयुक्त तत्वाधान में सोमवार को बालोद स्थित बूढ़ादेव शक्तिपीठ में विश्व आदिवासी दिवस मनाया गया. जिसमें मुख्य अतिथि यू.आर.गंगराले जिलाध्यक्ष छ0ग0सर्व आदिवासी समाज व विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ.शंकरलाल उइके, सी.पी.ठाकुर ,गजानंद प्रभाकर,डॉ.बी.एल.रात्रे, एच.एल0मानकर जिलाध्यक्ष अनु.ज.जा.शा.सेवक संघ, लता कोर्राम,एडिशनल एस.पी.डी.आर.पोर्ते, उपस्थित थे। सर्वप्रथम बूढ़ादेव शक्तिपीठ एकत्रित होकर नगर बालोद में रैली निकाला गया । रैली में मुख्य आकर्षण युवा प्रभाग के छात्र-छात्रायें आदिवासी पांरपरिक वेशभूषा में रिलो नृत्य करते हुये नगर भ्रमण किया गया। मुख्य अतिथि श्री गंगराले ने कहा कि शासन के सूची के अनुसार प्रदेश के 27 जिले में से 13 पूर्णतः अनुसूचित क्षेत्र व 6 आंशिक रूप से आदिवासी बाहुल्य है और 66 प्रतिशत भू-भाग पर आदिवासी निवास करते है जिन्हें समाज के अस्तित्व,अस्मिता,सामाजिक चेतना,राजनीतिक चेतना और आर्थिक रूप से मजबूती प्रदान करना आवश्यक है । 19 जुलाई से प्रदेशस्तर पर 9 सूत्रीय मांग को लेकर चल रहे धरना-प्रदर्शन समाप्त करते हुये 30 अगस्त से मांगों के समर्थन में जिले में आर्थिक नाकेबंदी करने की घोषणा की गई। गजानंद प्रभाकर ने विश्व आदिवासी दिवस के उद्देश्य को बताते हुये कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पूरे विश्व में शांति स्थापना के साथ-साथ विश्व के देशों में पारस्परिक मैत्रीपूर्ण समन्वय बनाना,एक दूसरे के अधिकार एवं स्वतंत्रता को सम्मान के साथ बढ़ावा देना, विश्व से गरीबी उन्मूलन, शिक्षा एवं स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के रूप में घोषणा की गई है । हमारे आदिवासी जनप्रतिनिधि चुनकर जाते हैं वे हमारी बात संसद व विधानसभा में नहीं रखते हैं इसलिए हमें राजनीतिक आदिवासी पार्टी बनाना होगा । डॉ. शंकर उइके ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस समाज की समस्या को उठाने का महत्वपूर्ण मंच है । बस्तर में नक्सलियों के नाम पर हो रहे नरसंहार कब समाप्त होगा यह प्रश्न भारत सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार से किया। लता कोर्राम उपाध्यक्ष ने कहा कि हमारे जल, जंगल, जमीन के अस्तित्व को बचाने के लिये हमारे वीर शहीदों ने बलिदान दिया है उसे संजोकर रखना हमारा दायित्व है । सी.पी.ठाकुर ने उपस्थित आदिवासी समुदाय को नशापान नहीं करेंगे,स्वस्थ रहेंगे, और अपने घर को स्वच्छ रखने संकल्प दिलाया ।

सभा को एडिशन एस.पी. डीआर पोर्ते और एच.एल.मानकर ने भी संबोधित किया । कार्यक्रम को सफल बनाने में सोनसाय लेंडिया,भूषण उइके,,सुखचैन नेताम, सज्जन चुरेन्द्र,गणेश राम ओटी, टीकम पडौटी, सुरेन्द्र नेताम, हुसैन नेताम, गोपालसिंह कतलाम, टण्डनलाल कांवरे,ईश्वर उईके, अश्वनी नायक,,एमनसिंह ठाकुर,कमलेश ध्रुव रामकिशोर खरान्शु,नन्दकुमार कतलाम,जी.एल.खुरश्याम, रविन्द्र मण्डावी,पी.आर. धनंजय, महेश पिस्दा, पी.आर.ठाकुर आदि प्रमुख हैं । मंच संचालन फिरंता उइके ने किया। आभार प्रदर्शन गणेशराम ओटी एवं सोनसाय लेंडिया ने किया ।

You cannot copy content of this page