कोरबा/बालोद – मीडिया संस्थानों और पत्रकारों के नाम पर ठगी का नया सिस्टम शुरू हो गया है। अब कोरबा में पुलिस ने खुद को पत्रकार बताने वाले 4 शातिरों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपी ग्रामीण क्षेत्र में रविवार को दुकानें खुली होने पर उनसे वसूली कर रहे थे। आरोपियों के पास से पुलिस ने अलग-अलग मीडिया संस्थानों के 8 ID कार्ड भी बरामद किए हैं। मामला उरगा थाना क्षेत्र का है। जानकारी के मुताबिक, संजय नगर निवासी राकेश कुमार श्रीवास का सैलून है। वह रविवार शाम करीब 6 बजे दुकान में साफ-सफाई कर रहा था। इसी दौरान दो बाइक से चार लोग पहुंचे और उसकी दुकान की मोबाइल से फोटो लेने लगे। संजय ने कारण पूछा तो लॉकडाउन में दुकान खोलने की बात कही। फोटो पेपर में छापने और जेल भिजवाने की धमकी दी। आरोपियों ने कहा 5 हजार रुपए दो। संजय माफी मांगने लगा तो उससे एक हजार रुपए लेकर चले गए।
बस्ती में पहुंचा तो पता चला कि और भी दुकानदारों से की है ठगी
दुकान बंद करके राकेश श्रीवास बस्ती की ओर गया तो पता चला कि गांव के ही निरंजन राठौर से 4000 रुपए, ईश्वरी राठौर से 550 रुपए और गांव के अन्य लोगों को भी डर धमका कर रुपयों की उगाही की है। इसके बाद उसने थाने पहुंच कर पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पुलिस ने टीम बनाकर चांपा के कुरदा निवासी सुखसागर माथुर, राजेन्द्र प्रसाद जायसवाल, पवन कुमार नामदेव और कीर्तन पटेल को गिरफ्तार कर लिया।
जांजगीर के चांपा थाने में भी वसूली के मामले दर्ज
पुलिस ने आरोपियों के पास से वारदात में प्रयुक्त दोनों बाइक सहित 6900 रुपए, 4 मोबाइल और अलग-अलग मीडिया संस्थानों के 8 आईडी कार्ड बरामद किए हैं। पुलिस अफसरों ने बताया कि पकड़े गए सभी आरोपी जांजगीर के रहने वाले हैं। इनके खिलाफ जांजगीर के चांपा थाने में भी वसूली और धमकी देने की FIR दर्ज है। फिलहाल पुलिस ने सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश किया। जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। इससे पहले भी पत्रकारों के नाम पर मुंगेली और जगदलपुर में ठगी के मामले आए हैं।
ऐसे लुटेरों से पत्रकारिता पर लग रहा कलंक
कोरबा ही नहीं बालोद सहित कई जिले में आपको ऐसे लूट खसोट पत्रकार आपके आसपास मिल जाएंगे जो आपको कभी भी अपना शिकार बना सकते हैं. कोई डरा धमका कर तो कोई किसी तरह का ब्लैक मेल करके आपसे पैसे ऐठ सकता है. इसलिए आपको सावधान रहने की जरूरत है.बालोद जिले में भी कुछ ऐसे तथाकथित पत्रकार भी हैं जो अवैध वसूली,रेत,मुरुम खदान में वसूली को लेकर विवाद, आदिवासी नेता से उलझने,नौकरी के नाम पर लोगों को झांसे में लेने के नाम से अच्छा खासा नाम कमा चुके हैं और जिले में पत्रकारिता को कलंकित( बदनाम) कर चुके हैं. उनकी वजह से पुरी मीडिया जगत की बदनामी होती है, फिर ऐसे लोग नाक पोछकर फिर नाक कटाने निकलने से भी बाज नहीं आते.ऐसे में आम जनता को ही अब अपनी समझदारी दिखानी है. स्वच्छ छवि को पहचानने की जरूरत है. आपके साथ अगर कोई मीडिया का भय दिखाकर अवैध उगाही वसूली या अफसरों से पहुंच का हवाला देकर नौकरी लगाने के नाम से पैसे ऐठने का प्रयास करता है तो ऐसे लोगों की सूचना पुलिस व हमें भी जरुर दें. कुछ दिन पहले राजनांदगांव के डोंगरगाँव पुलिस ने भी कुछ तथाकथित पत्रकारों को इसी तरह के एक मामले में गिरफ्तार किया था.जिन पर एक ठेकेदार ने रेत निकासी के दौरान वसूली करने का आरोप लगाया था.
