बालोद/डौंडी।
ग्राम पंचायत बिटाल के सचिव युवराज निषाद (40) की आत्महत्या मामले में जांच व संबंधित लोगों से बयान के आधार पर महामाया थाने में ग्राम पंचायत बिटाल की सरपंच गंगा बाई आर्य के खिलाफ धारा 306 (आईपीसी 1860) के तहत अपराध दर्ज किया गया। बता दें कि इस मामले में पूरे जिले के सचिव लामबंद हो गए थे। व 3 अप्रैल तक कार्यवाही ना होने की स्थिति में 4 अप्रैल से धरने पर बैठने वाले थे। इसको लेकर अल्टीमेटम भी दिया जा चुका है। लगातार मामले में पुलिस कार्रवाई व पीड़ित परिवार को 50 लाख मुआवजा राशि दिए जाने की मांग भी उठ रही है। सरपंच की प्रताड़ना से तंग आकर सचिव द्वारा आत्महत्या किए जाने का संभवतः यह पहला मामला है। जो जिले ही नही पूरे छत्तीसगढ़ में चर्चा में है। एक महिला सरपंच द्वारा भरी सभा में सचिव को जूती फेंक कर मारे जाने सहित अन्य कारणों से लगातार खुद को प्रताड़ित महसूस करने के बाद सचिव ने आत्महत्या कर ली थी। इस संवेदनशील मामले में सचिव संघ लगातार विरोध कर रहा था कि सरपंच के खिलाफ कार्रवाई हो और पुलिस जांच के बाद मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने प्रताड़ित करने की धारा के तहत केस दर्ज किया गया।
पुलिस के अनुसार जांच के दौरान प्रार्थी बुधारूराम विनायक, गवाह बिसाखा बाई, महेश कुमार निषाद, दिलीप निषाद, नरेंद्र कुमार, सालिक राम, पवन बाई एवं अन्य से पूछताछ की गई। बिसरा का परीक्षण रिपोर्ट आदि के आधार पर पाया गया कि 6 मार्च 2021 को ग्राम बिटाल में आयोजित गौठान समिति की बैठक में सरपंच गंगा बाई आर्य द्वारा सचिव युवराज निषाद को जूती से फेंककर मारना, आए दिन छोटी-छोटी बातों को लेकर प्रताड़ित करना, एसटी-एससी एक्ट के किसी प्रकरण में फंसा देने की धमकी देना आदि तथ्य प्रमाणित हुआ हैं।
इसलिए प्रताड़ना से तंग आकर अपमानित होकर सचिव ने जहर खाकर आत्महत्या की थी। एएसआई नारदराम ठाकुर ने बताया कि पंचायत में लोगों की मौजूदगी में पंचों के सामने जूती फेंककर मारकर मृतक को आत्महत्या करने दुष्प्रेरित करना प्रथम दृष्टया सिद्ध पाए जाने पर गंगा बाई आर्य के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया।
