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बालोद के कारोबारी से 1.13 करोड़ की ठगी: 45 करोड़ का निवेश दिलाने और ‘ब्लैक मनी’ को असली नोट बनाने का झांसा, अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश

रायपुर पुलिस ने नागपुर से दो महिला आरोपियों को दबोचा, 15 वर्षों से देशभर में सक्रिय बताए जा रहे गिरोह के तार कई राज्यों से जुड़े

बालोद। बालोद जिले के एक कारोबारी को 45 करोड़ रुपये का निवेश दिलाने और कथित “ब्लैक मनी” को विशेष केमिकल के जरिए असली भारतीय नोटों में बदलने का झांसा देकर 1 करोड़ 13 लाख रुपये की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का रायपुर पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। इस मामले में नागपुर से दो महिला आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पुलिस का दावा है कि यह गिरोह पिछले करीब 15 वर्षों से देश के विभिन्न राज्यों में इसी तरह लोगों को अपना शिकार बनाता रहा है।

बालोद के उद्योगपति को बनाया निशाना

पुलिस के अनुसार बालोद जिले के ग्राम बोरिदकला निवासी उमेश कुमार सिन्हा, जो सालिक ग्रीन रिन्यूएबल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर हैं, ने तेलीबांधा थाना में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि कंपनी के विस्तार और नए प्लांट की स्थापना के लिए करीब 45 करोड़ रुपये के निवेश की आवश्यकता थी। इसी दौरान उनकी मुलाकात राकेश कौशिक के माध्यम से दीपक सिंह, अभिषेक सिंह, योगी एवं अन्य लोगों से हुई। आरोपियों ने खुद को प्रभावशाली लोगों और विदेशी निवेशकों से जुड़ा बताते हुए बड़े निवेश का भरोसा दिलाया।

भरोसा जीतने के लिए रचा गया पूरा ड्रामा

जांच में सामने आया कि गिरोह ने पहले पीड़ित को चेन्नई और नागपुर बुलाया। वहां बड़े अधिकारियों से मुलाकात, फाइल प्रोसेसिंग, विदेशी परीक्षण, सुरक्षा मंजूरी और हाई-पावर केमिकल जैसी मनगढ़ंत कहानियां सुनाकर भरोसा कायम किया गया। इसके बाद एक कथित रासायनिक प्रक्रिया का प्रदर्शन किया गया, जिसमें दावा किया गया कि काले रंग से ढके नोटों को विशेष विदेशी केमिकल से असली भारतीय मुद्रा में बदला जा सकता है। इस दौरान पहले से तैयार असली नोटों का इस्तेमाल कर पीड़ित को पूरी तरह विश्वास में ले लिया गया।

किस्तों में ऐंठ लिए 1.13 करोड़ रुपये

गिरोह ने कभी विदेशी केमिकल खरीदने, कभी परीक्षण कराने, तो कभी वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति का बहाना बनाकर अलग-अलग किश्तों में पैसे मंगाए। निवेश जल्द जारी होने का भरोसा दिलाते हुए आरोपियों ने पीड़ित से कुल 1 करोड़ 13 लाख रुपये वसूल लिए। जब लंबे समय तक न निवेश मिला और न ही रकम वापस हुई, तब पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

तकनीकी जांच से नागपुर तक पहुंची पुलिस

मामला दर्ज होने के बाद पुलिस उपायुक्त (क्राइम एवं साइबर) स्मृतिक राजनाला तथा पुलिस उपायुक्त (मध्य) तारकेश्वर पटेल के निर्देशन में एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट और तेलीबांधा थाना पुलिस की संयुक्त टीम गठित की गई। मोबाइल नंबर, बैंक खातों और डिजिटल लेन-देन की गहन जांच के बाद दोनों महिला आरोपियों की लोकेशन नागपुर में मिली। इसके बाद पुलिस ने कनिज फातमा उर्फ भावना पांडेय (कोलकाता) तथा दीपिका पालीवाल (उदयपुर, राजस्थान) को गिरफ्तार कर लिया।

15 साल से सक्रिय, कई राज्यों में फैला नेटवर्क

पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह नागपुर, लखनऊ सहित देश के कई राज्यों में इसी तरह निवेश दिलाने और ब्लैक मनी को असली नोट में बदलने का झांसा देकर करोड़ों रुपये की ठगी कर चुका है। रायपुर पुलिस अब अन्य राज्यों की पुलिस से संपर्क कर आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड और उनके खिलाफ दर्ज मामलों की जानकारी जुटा रही है। गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश भी तेज कर दी गई है।

मोबाइल, नकदी और दस्तावेज जब्त

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से तीन मोबाइल फोन, 26 हजार रुपये नकद, एटीएम कार्ड, आधार कार्ड सहित करीब 70 हजार रुपये मूल्य का सामान जब्त किया है। आरोपियों के खिलाफ तेलीबांधा थाना में अपराध क्रमांक 330/2026 के तहत बीएनएस की धारा 318(4) एवं 61(2) के अंतर्गत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का मानना है कि गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद इस हाई-प्रोफाइल ठगी नेटवर्क से जुड़े कई और अहम खुलासे हो सकते हैं।

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