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बीड़ी कारोबारी से बने ‘ग्रीन वॉरियर’: गुरुर के जयंत किरी ने बदली पर्यावरण संरक्षण की तस्वीर

गुरुर/बालोद। जहां एक ओर तेजी से बढ़ते शहरीकरण और कंक्रीट के विस्तार के बीच हरियाली लगातार कम होती जा रही है, वहीं गुरुर नगर के समाजसेवी एवं पर्यावरण प्रेमी जयंत किरी ने अपने संकल्प और सतत प्रयासों से यह साबित किया है कि एक व्यक्ति की सकारात्मक सोच पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल सकती है।

पिछले लगभग 11 वर्षों से वे पर्यावरण संरक्षण और समाजसेवा को मिशन बनाकर कार्य कर रहे हैं। उनकी पहल केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्हें संरक्षित कर उन्हें वृक्ष बनने तक संभालने की जिम्मेदारी भी उन्होंने निभाई। आज उनकी मेहनत से लगाए गए अनेक पौधे विशाल वृक्ष बनकर लोगों को छांव और स्वच्छ वातावरण दे रहे हैं।

हरियाली के साथ जनसेवा का भी अनूठा उदाहरण

पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ जनसुविधा के क्षेत्र में भी किरी परिवार लगातार योगदान देता रहा है। वर्ष 2024 में गुरुर तहसील कार्यालय परिसर में लोगों की सुविधा के लिए जयंत किरी एवं उनके परिवार द्वारा वाटर कूलर उपलब्ध कराया गया। इस पहल से तहसील आने वाले नागरिकों को राहत मिली। प्रशासन ने भी इस सहयोग की सराहना करते हुए इसे सामाजिक जिम्मेदारी का प्रेरणादायी उदाहरण बताया।

सहयोग पार्क: वर्षों की मेहनत से तैयार हुई हरियाली की पहचान

तहसील परिसर में वर्ष 2001 में “सहयोग पार्क” की स्थापना की गई थी। उस दौरान छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी की उपस्थिति में वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित हुआ था। इस अभियान को आगे बढ़ाने में तत्कालीन दुर्ग कलेक्टर आईसीपी केशरी (IAS) की महत्वपूर्ण भूमिका रही तथा किरी परिवार ने भी इसके विकास में उल्लेखनीय सहयोग दिया।

आज यही सहयोग पार्क क्षेत्र के लोगों के लिए हरियाली, शांति और प्राकृतिक वातावरण का केंद्र बन चुका है।

6000 से अधिक पौधों का वितरण, हजारों पौधे बन चुके हैं वृक्ष

करीब 50 वर्षीय जयंत किरी बीड़ी व्यवसाय से जुड़े होने के बावजूद पर्यावरण संरक्षण को अपने जीवन का उद्देश्य बना चुके हैं। वन विभाग और उद्यानिकी विभाग के सहयोग से उन्होंने अब तक 6000 से अधिक फलदार और छायादार पौधों का निःशुल्क वितरण किया है।

नगर पंचायत, स्कूल, कॉलेज, गौशाला, मुक्तिधाम और पंचायत परिसरों में लगाए गए सैकड़ों पौधे आज मजबूत वृक्ष बनकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं।

जयंत किरी का मानना है—
“पेड़ केवल ऑक्सीजन नहीं देते, वे आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की सुरक्षा करते हैं। आज लगाया गया एक पौधा आने वाले कल की सबसे बड़ी पूंजी है।”

सड़क सुरक्षा के लिए भी चलाया जनजागरूकता अभियान

समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं रही। सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से उन्होंने अपने खर्च पर लगभग 100 हेलमेट वितरित किए। हेलमेट पहनकर वाहन चलाने वाले लोगों को गुलाब देकर सम्मानित भी किया गया।

दिव्यांगजनों के लिए बने सहारा

समाजसेवा के क्षेत्र में भी किरी परिवार सक्रिय रहा है। अपने पिता सुंदरलाल किरी की प्रेरणा से जयंत किरी ने गुरुर, चारामा और धमतरी क्षेत्र के दिव्यांगजनों को 50 से अधिक ट्राइसिकल एवं अन्य सहायक सामग्री उपलब्ध कराई है।

‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

जिला प्रशासन द्वारा चलाए गए “एक पेड़ मां के नाम” अभियान में जयंत किरी को ब्लॉक समन्वयक और डिस्ट्रिक्ट प्लांटेशन कमेटी का सदस्य बनाया गया था। इस अभियान के माध्यम से जिले में बड़े स्तर पर वृक्षारोपण को जनआंदोलन का रूप मिला।

बिना प्रचार, लगातार सेवा का संकल्प

सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि जयंत किरी वर्षों से बिना किसी प्रचार-प्रसार के लगातार सेवा और पर्यावरण संरक्षण का कार्य कर रहे हैं। वे स्वयं पौधे लगाते हैं, लोगों को जागरूक करते हैं और संरक्षण की जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित करते हैं।

आज गुरुर तहसील परिसर की हरियाली, सहयोग पार्क और नगर में खड़े सैकड़ों वृक्ष इस बात के गवाह हैं कि यदि संकल्प मजबूत हो तो एक व्यक्ति भी पूरे समाज में बदलाव की नई शुरुआत कर सकता है।

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