
बालोद। जिले के अर्जुन्दा क्षेत्र की बेटी सुधा यादव ने ग्रामीण महिला सुरक्षा समूह “महिला कमांडो” पर महत्वपूर्ण शोध कर पीएचडी की उपाधि प्राप्त कर क्षेत्र का नाम गौरवान्वित किया है। वर्तमान में वे बेलौदी कॉलेज में व्याख्याता के रूप में कार्यरत हैं। उनका शोध ग्रामीण महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक स्थिति, महिला सशक्तिकरण तथा सामाजिक सुधार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित रहा।
ग्राम ओड़ारसकरी, पोस्ट गब्दी (तहसील अर्जुन्दा, जिला बालोद) की निवासी सुधा यादव ने हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग से 16 अगस्त 2024 को पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उनके पिता का नाम रविशंकर यादव है।

चार वर्षों के शोध में ग्रामीण बदलावों का किया अध्ययन
सुधा यादव ने लगभग चार वर्षों तक इस विषय पर गहन शोध किया। इस दौरान कोरोना महामारी के कारण करीब एक वर्ष तक शोध कार्य प्रभावित भी रहा। अध्ययन के लिए उन्होंने बालोद जिले के बोरगहन, खेरूद, सिकोसा, खुटेरी, मटेवा और माहुद सहित चयनित गांवों का विस्तृत सर्वेक्षण किया।
उनके शोध का विषय था—
“छत्तीसगढ़ राज्य की महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक स्थिति के संवर्धन में महिला कमांडो (ग्रामीण महिला सुरक्षा समूह) की भूमिका”।
शोध में सामने आए महत्वपूर्ण निष्कर्ष
शोध के दौरान यह तथ्य सामने आया कि महिला कमांडो के सामाजिक अभियानों से ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिले। अध्ययन के अनुसार महिला कमांडो की सक्रियता से—
- नशाबंदी अभियान को मजबूती मिली।
- महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिला।
- स्वच्छता एवं बालिका शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी।
- बाल विवाह और दहेज प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों में कमी आई।
- अवैध शराब बिक्री और नशाखोरी पर नियंत्रण में मदद मिली।
- ग्रामीण महिलाओं में आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार की भावना विकसित हुई।
शोध में यह भी उल्लेख किया गया है कि महिला कमांडो समूह महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ प्रशिक्षण एवं स्वरोजगार के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
महिला कमांडो को संसाधन और प्रशिक्षण देने की सिफारिश
अपने शोध में सुधा यादव ने महिला कमांडो समूहों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई सुझाव दिए हैं। उन्होंने कहा कि रात्रिकालीन गश्त के लिए टॉर्च, लाठी, छाता तथा अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाने चाहिए। साथ ही सुरक्षा प्रशिक्षण, यात्रा भत्ता, मानदेय, वेशभूषा और पंचायत स्तर पर संस्थागत सहयोग की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि महिला कमांडो द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्यों की नियमित समीक्षा एवं मूल्यांकन कर उन्हें समय-समय पर प्रोत्साहित किया जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में महिला सुरक्षा, सामाजिक सुधार और महिला सशक्तिकरण के प्रयास और अधिक प्रभावी बन सकें।
क्षेत्र में खुशी का माहौल
सुधा यादव की इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर क्षेत्र के शिक्षकों, सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उनकी सफलता को क्षेत्र की बेटियों के लिए प्रेरणादायी उपलब्धि माना जा रहा है।





