बालोद जिले के ग्राम नर्रा निवासी एवं भारतीय रेलवे में सीनियर पैसेंजर ट्रेन मैनेजर के पद पर कार्यरत समाजसेवी बेनू राम साहू आज मानव सेवा, सामाजिक सरोकार और जनहित के कार्यों के कारण प्रेरणास्रोत बन चुके हैं। वर्तमान में भिलाई-3 की मानसरोवर कॉलोनी में निवासरत बेनू राम साहू वर्षों से निस्वार्थ भाव से समाजहित के कार्यों में जुटे हुए हैं।

वे केवल सामाजिक संदेश देने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि स्वयं मैदान में उतरकर सेवा कार्यों को अंजाम देते हैं। यही कारण है कि उनकी पहचान एक संवेदनशील, कर्मशील और समर्पित समाजसेवी के रूप में स्थापित हुई है।
बेटे के जन्मदिन को बनाया जनसेवा का पर्व
बेनू राम साहू के पुत्र जयंत कुमार साहू ने अपने 18वें जन्मदिन को अनूठे अंदाज में मनाकर समाज के सामने प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया। पिछले तीन वर्षों से वे जन्मदिन पर फिजूलखर्ची से दूर रहकर रायपुर एम्स अस्पताल के पास संचालित “ए मां भोजन सेवा समिति” के माध्यम से लगभग 800 जरूरतमंद लोगों को निःशुल्क भोजन करा रहे हैं।

इसी प्रकार उनकी पुत्री हर्षिता साहू के जन्मदिन पर भी पिछले चार वर्षों से जरूरतमंदों के लिए भोजन सेवा का आयोजन किया जाता है। पूजा-अर्चना और गौसेवा के बाद पूरा परिवार स्वयं भोजन परोसकर सेवा करता है। जयंत का कहना है कि जन्मदिन पर दिखावे की बजाय जरूरतमंदों की सहायता करना सबसे बड़ी खुशी है।
माता की स्मृति में स्कूलों में कराया नेवता भोज
अपनी माता स्वर्गीय सुरुज बाई साहू की पुण्य स्मृति में बेनू राम साहू ने ग्राम नर्रा और धरमपुरा के शासकीय स्कूलों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों में नेवता भोज का आयोजन कराया। इस दौरान सैकड़ों बच्चों को सम्मानपूर्वक भोजन कराया गया।
कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक पदाधिकारियों और ग्रामीणों की उपस्थिति रही। उन्होंने कहा कि उनकी माता सेवा और संस्कार की प्रतिमूर्ति थीं तथा बच्चों को भोजन कराना उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
रक्षाबंधन पर गौमाता को बांधा रेडियम रक्षासूत्र
रक्षाबंधन के अवसर पर साहू परिवार ने अनूठी पहल करते हुए लगभग 200 गौमाता एवं नंदी महाराज के गले में रेडियम बेल्ट बांधी। इसका उद्देश्य रात्रि में सड़कों पर घूमने वाले पशुओं को वाहन दुर्घटनाओं से बचाना था। इस पहल की लोगों ने खूब सराहना की।
भीषण गर्मी में ‘कर्मा प्याऊ’ से बुझा रहे हजारों लोगों की प्यास
भिलाई-3 के सिरसा गेट चौक पर संचालित निःशुल्क ‘कर्मा प्याऊ’ आज हजारों राहगीरों के लिए राहत का केंद्र बन चुका है। स्वर्गीय माता-पिता की स्मृति में शुरू की गई इस सेवा के तहत बेनू राम साहू अपनी पत्नी भारती देवी साहू के साथ स्वयं खड़े होकर लोगों को ठंडा एवं मीठा पानी पिलाते हैं।
पिछले छह वर्षों से गर्मी से लेकर मानसून तक यह सेवा निरंतर जारी है। मजदूर, रिक्शा चालक, यात्री और राहगीर इस सेवा का लाभ उठाते हैं।
अक्षय तृतीया और मातृ दिवस पर भी विशेष सेवा
अक्षय तृतीया पर स्वर्गीय सुरुज बाई साहू की स्मृति में हजारों लोगों को शरबत एवं ठंडा पानी वितरित किया गया। वहीं मातृ दिवस के अवसर पर कर्मा प्याऊ में विशेष आयोजन कर राहगीरों को आम पना और जलजीरा पिलाया गया, जिससे भीषण गर्मी में लोगों को बड़ी राहत मिली।
संघर्षों से निकले, सेवा को बनाया पहचान
ग्रामीणों के अनुसार बेनू राम साहू का परिवार बेहद साधारण एवं संघर्षपूर्ण परिस्थितियों से आगे बढ़ा है। उनके पिता स्वर्गीय मंगतू राम साहू ने कठिन परिश्रम से परिवार का पालन-पोषण किया। उन्हीं संघर्षों और संस्कारों से प्रेरणा लेकर आज बेनू राम साहू जरूरतमंदों की सेवा को अपना धर्म मानते हैं।
उनका मानना है कि अच्छे कार्य करने के लिए धन से अधिक सेवा भावना की आवश्यकता होती है।
समाजसेवा के अनेक कार्यों में सक्रिय
बेनू राम साहू रायपुर एम्स अस्पताल में संचालित “ए मां भोजन सेवा समिति” के माध्यम से मरीजों और उनके परिजनों के लिए भोजन सेवा में भी सक्रिय योगदान देते हैं। इसके अलावा गौमाता एवं अन्य बेजुबान पशुओं के लिए विभिन्न स्थानों पर पानी की व्यवस्था भी कराते हैं।
उनकी प्रेरणा से कई लोगों ने अपने-अपने क्षेत्रों में बर्तन बैंक, जल सेवा और अन्य सामाजिक गतिविधियों की शुरुआत की है।
समाज के लिए प्रेरणादायक संदेश
आज जब समाज का एक बड़ा वर्ग दिखावे और निजी जीवन तक सीमित होता जा रहा है, ऐसे समय में बेनू राम साहू जैसे समाजसेवी यह साबित कर रहे हैं कि छोटे-छोटे सेवा कार्य भी समाज में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
उनकी जीवन यात्रा एक संदेश देती है—
“मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और जरूरतमंद की मदद ही सच्ची श्रद्धांजलि।”





