
बालोद। बालोद शहर के मधु चौक स्थित रुद्र यूनिसेक्स सैलून द्वारा बच्चों को भारतीय संस्कृति और नैतिक संस्कारों से जोड़ने के उद्देश्य से एक अनूठी पहल शुरू की गई है। इस पहल के तहत 5 से 15 वर्ष तक के बच्चों को निशुल्क हेयरकट की सुविधा दी जा रही है। इसके लिए बच्चों को केवल एक शर्त पूरी करनी होती है—उन्हें कागज पर 108 बार “जय श्री राम” लिखकर लाना होता है।
200 से अधिक बच्चे बन चुके हैं इस अभियान का हिस्सा
इस अभिनव पहल से अब तक 200 से अधिक बच्चे जुड़ चुके हैं। बच्चों द्वारा श्रद्धापूर्वक “जय श्री राम” लिखने की इस प्रक्रिया को केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि एकाग्रता, अनुशासन और सकारात्मक सोच विकसित करने का माध्यम भी माना जा रहा है।
108 संख्या का आध्यात्मिक महत्व
सनातन परंपरा में 108 संख्या को अत्यंत पवित्र और शुभ माना जाता है। इस अभ्यास से बच्चों में—
- एकाग्रता और धैर्य का विकास
- सकारात्मक सोच और मानसिक शांति
- भारतीय संस्कृति एवं आध्यात्मिक मूल्यों के प्रति जुड़ाव
- लेखन अभ्यास और अनुशासन की भावना
जैसे गुण विकसित होने की बात कही जा रही है।
मोबाइल से दूरी, संस्कारों से नजदीकी
आज के समय में जब बच्चे मोबाइल और डिजिटल उपकरणों पर अधिक समय व्यतीत कर रहे हैं, ऐसे में यह पहल उन्हें रचनात्मक गतिविधियों की ओर प्रेरित कर रही है। “जय श्री राम” लिखने की प्रक्रिया बच्चों को स्क्रीन से दूर कर भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का प्रयास बन रही है।
समाजसेवा से जुड़ा है उद्देश्य
सैलून संचालक उमेश कुमार सेन लंबे समय से सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े हुए हैं। वे पूर्व में बजरंग दल के जिला संयोजक रह चुके हैं तथा वर्तमान में विश्व हिंदू परिषद के जिला सह मंत्री के रूप में कार्य कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस पहल का उद्देश्य बच्चों में अच्छे संस्कार विकसित करना और उन्हें सकारात्मक दिशा देना है।
अभिभावकों ने की सराहना
स्थानीय अभिभावकों और नागरिकों ने इस पहल की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह केवल निशुल्क बाल कटाने की योजना नहीं, बल्कि बच्चों को भारतीय संस्कृति, अनुशासन और अच्छे संस्कारों से जोड़ने का सार्थक प्रयास है।
छोटी पहल, बड़ा संदेश
बालोद की यह अनूठी पहल यह संदेश देती है कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि अच्छी सोच और सार्थक प्रयासों की आवश्यकता होती है। रुद्र यूनिसेक्स सैलून अब केवल हेयरकट का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों में संस्कार, संस्कृति और सकारात्मक सोच विकसित करने का माध्यम बनता जा रहा है।





