छत्तीसगढ़ का ‘मिनी त्र्यंबकेश्वर’: ओना-कोना मंदिर बना आस्था, वास्तुकला और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम

बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के गुरूर विकासखंड में गंगरेल बांध के बैकवाटर के किनारे स्थित ओना-कोना शिव मंदिर आज धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है। अपनी अनूठी बिना बीम (बीमलेस) वास्तुकला, विशाल शिवलिंग, प्राकृतिक सौंदर्य और भव्य प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के कारण यह मंदिर प्रदेश ही नहीं, बल्कि आसपास के राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भी आकर्षित कर रहा है।
बिना बीम का अद्भुत मंदिर
ओना-कोना मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी बीमलेस संरचना है। आधुनिक इंजीनियरिंग और प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला के अद्भुत मेल से निर्मित यह मंदिर अपनी वास्तुकला के कारण विशेष पहचान बना चुका है। धमतरी निवासी तीरथराज फूटान ने इसका निर्माण महाराष्ट्र के प्रसिद्ध त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर की तर्ज पर कराया है।

मंदिर की बाहरी दीवारों पर खजुराहो शैली की कलात्मक नक्काशी और देवी-देवताओं की आकर्षक मूर्तियां इसकी भव्यता में चार चांद लगाती हैं।
12 देवी-देवताओं की हुई प्राण-प्रतिष्ठा
हाल ही में आयोजित पांच दिवसीय प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव में वैदिक मंत्रोच्चार एवं यज्ञ-हवन के बीच राजस्थान से लाई गई 12 देवी-देवताओं की प्रतिमाओं की स्थापना की गई। मंदिर के गर्भगृह में स्थापित विशाल शिवलिंग और लगभग तीन टन शुद्ध पीतल से निर्मित जलहरी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र हैं।

गंगरेल बैकवाटर का मनमोहक दृश्य

मंदिर के सामने फैला गंगरेल बांध का विशाल जल क्षेत्र किसी समुद्र का आभास कराता है। चारों ओर हरियाली, पहाड़ियां और शांत वातावरण श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति के साथ प्रकृति की अनुपम छटा का अनुभव कराते हैं।
यहां बोटिंग की सुविधा भी उपलब्ध है, जिसके कारण सप्ताहांत और अवकाश के दिनों में बड़ी संख्या में पर्यटक परिवार सहित यहां पहुंचते हैं।
पर्यटन सुविधाओं का हो रहा विस्तार
स्थानीय प्रशासन एवं ग्राम पंचायत द्वारा सड़क, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। सौर ऊर्जा आधारित पेयजल व्यवस्था भी यहां स्थापित की गई है, जिससे यह क्षेत्र एक विकसित पर्यटन स्थल के रूप में उभर रहा है।
प्रवेश शुल्क और नियम
मंदिर परिसर की स्वच्छता एवं सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए ग्राम समिति द्वारा ₹20 से ₹50 तक का प्रवेश शुल्क लिया जाता है। परिसर में मांसाहारी भोजन पूरी तरह प्रतिबंधित है।
कैसे पहुंचे
- रायपुर से: लगभग 90 किलोमीटर
- धमतरी से: लगभग 35 किलोमीटर
- बालोद से: लगभग 50 किलोमीटर
- राष्ट्रीय राजमार्ग-30 (रायपुर-बस्तर मार्ग) से गुरूर के पास लगभग 5 किलोमीटर अंदर स्थित।
आस्था और पर्यटन का संगम
ओना-कोना मंदिर आज केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर और उभरते धार्मिक पर्यटन का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। यहां आने वाले श्रद्धालु भगवान शिव की आराधना के साथ प्रकृति की अनुपम सुंदरता का भी आनंद लेते हैं। यही कारण है कि ओना-कोना मंदिर को अब छत्तीसगढ़ का ‘मिनी त्र्यंबकेश्वर’ कहा जाने लगा है।





