गुरूर/बालोद। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ विधानसभा में सोमवार को राज्य का बजट पेश किया। कांग्रेस सरकार का यह तीसरा बजट प्रस्तुत हुआ है। इस बजट को जहां भाजपाई लगातार निराशाजनक बता रहे हैं तो उनका जवाब देते हुए संजारी बालोद विधानसभा की विधायक संगीता सिन्हा व जिला पंचायत सदस्य ललिता पिमन साहू ने कहा कि यह निराशा नहीं भाजपाइयों की नासमझ है। जो इस बजट को अच्छे से समझ नहीं पा रहे हैं और अनर्गल प्रतिक्रिया दें रहे हैं। उन्होंने सरकार के सभी फैसलों व प्रावधान की सराहना की। विधायक संगीता सिन्हा ने कहा कि कोरोना जैसे संकटकाल में भी सरकार ने सभी की सुविधा का ध्यान रखा है और आवश्यक प्रावधान करके शहर से लेकर गांव तक के क्षेत्र में विकास कार्यों को बढ़ावा देने का प्रयास किया है। गांव गरीब किसान हर व्यक्ति का ख्याल रखा गया है। सड़क शिक्षा स्वास्थ्य की दिशा में भी बेहतर काम होंगे।
जिला पंचायत सदस्य ललिता पिमन साहू ने कहा यह बजट प्रदेश को आगे ले जाने वाला है। छत्तीसगढ़ के स्थानीय कृषि उत्पादों जैसे ढेकी का कूटा चावल, घानी से निकला खाद्य तेल, कोदो कुटकी, मक्का से लेकर सभी तरह की दलहनी फसलें इन सभी को बढ़ावा देने के लिए भी पहल की जाएगी। सरकार की घोषणा के मुताबिक इस बजट में परंपरागत ग्रामीण व्यवसाय कौशल को पुनर्जीवित करने के लिए 4 नए विकास बोर्डो का गठन किया जाएगा। जिसमें तेल घानी, चर्म शिल्पकार, लौह शिल्पकार व रजककार विकास बोर्ड शामिल है। जो छत्तीसगढ़ को एक नई पहचान देगी। इससे खासतौर से ग्रामीण क्षेत्र के उक्त छोटे-छोटे वर्ग से जुड़े हुए कामकाजी लोगों व उक्त ग्रामीणों को काफी फायदा होगा। उनके विकास को लेकर सरकार नई नई योजनाएं लागू करेगी। बेटियों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कौशल्या मातृत्व योजना भी शुरू की है। इसमें द्वितीय संतान बालिका के जन्म पर महिलाओं को ₹5000 की एकमुश्त सहायता राशि दी जाएगी।

विधायक संगीता ने कहा ‘‘गढ़बो नवा छत्तीसगढ़’’ के मूल मंत्र में समाहित भावनाओं को आगे बढ़ाते हुये सीएम ने सदन के समक्ष अपनी सरकार का तीसरा बजट प्रस्तुत किया है। देश-दुनिया समेत छत्तीसगढ़ की सरकार के लिये भी पिछला वर्ष बहुत ही चुनौतीपूर्ण रहा है। कोविड-19 महामारी के संक्रमण से बचाव हेतु लागू लॉकडाउन के कारण राज्य में आर्थिक गतिविधियाँ प्रभावित रहीं, जिसके कारण राजस्व प्राप्तियों में कमी आयी। महामारी काल में आजीविका के साधनों की कमी के कारण आम जनता को राहत पहुंचाने हेतु कल्याणकारी योजनाओं में अधिक संसाधनों की आवश्यकता पड़ी। हमारी सरकार ने इस दो-तरफा दबाव का दृढ़ता से सामना करते हुए जनता के हित में लगातार कार्य किया और शासन-प्रशासन की सजगता एवं जनता के प्रयासों से राज्य पर इस आपदा का दुष्प्रभाव कम हुआ। हमें गर्व है कि संकट के दौर में भी हमारी सरकार के संवेदनशील और सुसंगत प्रयासों के कारण महात्मा गांधी नरेगा योजना में रोजगार देने तथा मजदूरी भुगतान करने का कीर्तिमान बना। वनोपज खरीदी का राष्ट्रीय कीर्तिमान बना। शिक्षा, स्वास्थ्य तथा पोषण के लिए किए गए नवाचारों तथा प्रवासी मजदूरों की सुरक्षित घर वापसी एवं पुनर्वास के प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली। सरकार ने संक्रमण की रोकथाम तथा उपचार के लिये त्वरित निर्णय लिये। स्वास्थ्य विभाग के लिये 670 करोड़ के अतिरिक्त बजट की तत्काल व्यवस्था की गई। कोरोना संक्रमण की जांच हेतु 6 RT-PCR लैब और 18 TrueNAT लैब की तत्काल स्थापना की गई। मार्च 2020 में शासकीय अस्पतालों में आईसीयू बिस्तर क्षमता केवल 53 थी, जिसकी संख्या बढ़कर 406 बिस्तर हो चुकी है। कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार हेतु 30 कोविड समर्पित अस्पताल तथा 178 कोविड केयर सेन्टर स्थापित किये जाने से मरीजों के उपचार में तेजी आयी व प्रदेश की जनता का मनोबल बढ़ा।

जिला पंचायत सदस्य ललिता साहू ने कहा सुराजी ग्राम योजना के तहत स्थानीय संसाधनांे के संरक्षण व पुनर्जीवन का हमारा अभियान कोरोना संकटकाल के दौरान बहुत उपयोगी सिद्ध हुआ। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ और आत्मनिर्भर बनाने हेतु प्रारंभ की गई इस योजना के तहत कृषि, पंचायत एवं वन विभाग में उपलब्ध राशि के अभिसरण से स्वीकृत लाखों विकास कार्याें के कारण संकट के दौर में भी छत्तीसगढ़ में ग्रामीण रोजगार के अवसरों में वृद्धि हुई। सरकार ने गोबर को गोधन बनाने की दिशा में सुविचारित कदम उठाते हुये गोधन न्याय योजना लागू की, जिसमें पशु पालकों से गोबर क्रय करके गोठानों में वर्मी कंपोस्ट एवं अन्य उत्पादों का निर्माण किया जा रहा है। योजना के क्रियान्वयन से जैविक खेती एवं गौ-पालन को बढ़ावा, पशु पालकों को आर्थिक लाभ तथा रोजगार के नये अवसरों का सृजन हो रहा है। हमारी सरकार की इस पहल को भारत सरकार एवं अन्य राज्यों द्वारा भी सराहा गया है। विधायक ने कहा हमारे प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में विशिष्ट सृजनात्मक कलाओं की बहुलता है, जिसे रोजगार के अवसर में ढालने के लिये शहरी क्षेत्रों में पौनी-पसारी योजना शुरू की गई थी, इस दिशा में एक कदम और आगे बढ़ाते हुए अब ग्रामीण क्षेत्रों में रूरल इंडस्ट्रियल पार्क की स्थापना की जायेगी, जहां परम्परागत व्यवसायिक गतिविधियों के संचालन एवं विपणन की सुविधा प्रदान की जायेगी।
