
बालोद। पंचायती राज दिवस (24 अप्रैल) के अवसर पर डौंडी ब्लॉक के अनुसूचित क्षेत्र की ग्राम पंचायत मरकाटोला–सुरडोंगर आज एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है। यहां पेसा एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन से पंचायत प्रतिनिधियों, महिला सरपंच और ग्रामीणों ने मिलकर गांव को नशामुक्त बनाने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।
ग्राम सभा का सख्त फैसला: पूर्ण शराबबंदी लागू

ग्राम सभा ने अपने संवैधानिक अधिकारों का उपयोग करते हुए गांव में—
- शराब की बिक्री, परिवहन और भंडारण पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया
- गांजा सहित अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री पर भी रोक लगाई
इस फैसले के बाद गांव का सामाजिक माहौल पूरी तरह बदल गया है।
महिला सरपंच तारा दर्रो की अगुवाई में बदलाव

महिला सरपंच श्रीमती तारा दर्रो के नेतृत्व में यह अभियान लगातार मजबूत हुआ।
उन्होंने बताया—
“पहले गांव में अवैध शराब, खासकर महुआ शराब से माहौल बिगड़ रहा था, लेकिन ग्राम सभा के निर्णय के बाद अब शांति है और होली के बाद से कोई शिकायत नहीं आई है।”
पंचायत, समिति और ग्रामीणों की संयुक्त भूमिका
इस अभियान में—
- ग्राम पंचायत
- ग्राम विकास समिति
- युवा वर्ग और महिलाएं
सभी ने मिलकर जिम्मेदारी निभाई और यह सुनिश्चित किया कि कोई भी व्यक्ति नियमों का उल्लंघन न करे।
अब घर-घर निगरानी की तैयारी
ग्राम पंचायत अब इस व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
- आगामी ग्राम सभा में निगरानी टीम गठित करने का प्रस्ताव
- टीम घर-घर जाकर जांच करेगी
- गुप्त रूप से शराब बिक्री पर नजर रखी जाएगी
सामाजिक बदलाव के दिखे सकारात्मक परिणाम
इस निर्णय के बाद—
- गांव में झगड़े और विवाद कम हुए
- महिलाओं में सुरक्षा की भावना बढ़ी
- सामाजिक वातावरण शांत और सकारात्मक हुआ
- गांव के विकास को नई गति मिली
जनप्रतिनिधियों ने बताया सामूहिक निर्णय
सरपंच श्रीमती तारा देवी दर्रो, उपसरपंच किशोर कुमार साहू, ग्राम सभा अध्यक्ष बी.आर. देवहारी, ग्राम विकास समिति अध्यक्ष तोरण सिंह मरकाम एवं युवा सेवा समिति अध्यक्ष षवेश मरकाम ने बताया कि यह फैसला महिलाओं की सुरक्षा, युवाओं के भविष्य और गांव के समग्र विकास को ध्यान में रखकर लिया गया।
पूरे छत्तीसगढ़ के लिए बना मॉडल
मरकाटोला–सुरडोंगर की यह पहल अब पेसा एक्ट के सफल क्रियान्वयन का मॉडल बन चुकी है।
यह संदेश देती है कि—
“सशक्त ग्राम सभा और जागरूक पंचायत ही सशक्त समाज की नींव है।”
अब जरूरत है कि अन्य पंचायतें भी इस मॉडल को अपनाकर नशामुक्त और सुरक्षित गांव बनाने की दिशा में कदम बढ़ाएं।
