भाटागांव में शुरू हुई श्रीमद् भागवत कथा, पहले दिन ही उमड़ी भीड़
बालोद/गुंडरदेही । भाटागांव (बी) में गुरुवार से श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन शुरू हुआ। जिसमें पहले दिन वृन्दावन वाले कथाकार पंडित राजीव नयन ने भागवत का महत्व बताया। पहले दिन से ही इस आयोजन में भीड़ उमड़ी। भाटागांव सहित आसपास के कई गांवों के श्रद्धालु कथा सुनने के लिए जुटे। सरपंच संध्या दोषण साहू व साहू परिवार के द्वारा आयोजित ये भागवत 25 फरवरी से 3 मार्च तक चलेगा। दूसरे गांव व बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सुबह 11 से 1 बजे तक रोज भोजन की व्यवस्था भी रहेगी। कथा दोपहर 1 से शाम 5 बजे तक चलेगी। पहले दिन कथा बताते राजीव नयन ने कहा भगवान की कथा श्रवण से व्यक्ति की चिंता मिट जाती है।भक्ति देवी है तो ज्ञान व वैराग्य उनके दो पुत्र है। भक्ति का प्रादुर्भाव दक्षिण भारत मे हुआ। आज भी दक्षिण में कई जगह संस्कृत बोला जाता है।वृंदावन भक्ति की भूमि है वहां जो जाते हैं वे राधे राधे जरूर बोलते हैं।

जहां भक्ति है वहाँ भगवान हैं,इसलिए श्री राम सबरी के आश्रम में गए। उन्होंने कहा
गंगा किनारे भागवत सुनना 100 भागवत के पुण्य के बराबर है। परआप कहीं गौठान में भागवत सुनते हैं वहां एक करोड़ भागवत का पुण्य है। इससे पवित्र स्थल कुछ नही हो सकता। भांठागांव में गौठान में भागवत का आयोजन होना इस गांव के लिए धन्य है। गोबर में लक्ष्मी निवास करती है। सबसे पवित्र स्थल वह है जहां गाय का गोबर गिरता है। छग में तो गोबर से लीपा जाता है। इसके पीछे यही महत्व है। गौशाला व गौठान में कथा सुनने बहुत पुण्य है।

कथा श्रवण से मुक्ति हाथ मे आ जाती है। जो पुण्य गंगा जमुना स्नान से नही मिलता वह पुण्य भागवत की कथा श्रवण करने से प्राप्त होता है। जिसने मनुष्य योनि को पाकर भागवत का श्रवण नही किया वह कैसा मनुष्य है। जीवन में कभी मत कहिए कि मेरे पास भागवत सुनने समय नही है। थोड़ा सा ही वक्त सही जरूर इसमे दे। जिसने मन भगवान के चरणों मे नही लगाया वह चंडाल व गधे की तरह है। उन्होंने कहा पूत कपूत तो क्यो धन संचय, पूत सपूत तो क्यो धन संचय।
बच्चों को वसीयत में संपति नही संस्कार दो। लक्ष्मी का नाम चंचला है आज तुम्हारे पास है कल किसी और के पास होगा। मनुष्य की जिंदगी मकड़ी जैसी है जो खुद जाल बुनती है और अंत मे खुद फस जाती है और मर जाती है। कथा श्रवण के दौरान पूर्व विधायक वीरेंद्र साहू सहित अन्य मौजूद थे। कथा के अंत मे आरती व प्रसाद वितरण हुआ।
