रहमत का अशरा मुकम्मल, अब शुरू हुआ मगफिरत का अशरा



जामा मस्जिद बालोद में रोजेदारों की रौनक, बच्चों का उत्साह काबिल-ए-तारीफ

बालोद। रमज़ान के मुबारक महीने का पहला अशरा (रहमत का अशरा) 10वें रोज़े के साथ मुकम्मल हो गया है। सोमवार को 12वां रोज़ा रखा गया और 11वें रोज़े से मगफिरत का अशरा शुरू हो चुका है।

इन दिनों जामा मस्जिद बालोद में बड़े रोजेदारों के साथ छोटे-छोटे बच्चे भी पूरे उत्साह और अकीदत के साथ रोज़े रख रहे हैं। शाम के वक्त रोजेदार मस्जिद परिसर में सामूहिक इफ्तार में शरीक होकर बेहतरीन गिज़ा से रोज़ा इफ्तार कर रहे हैं।

रमज़ान के पहले रोज़े से ही इंतजामिया कमेटी के मुतवल्ली शाहिद खान एवं नायब सदर हुसैन बाबा भाई की सरपरस्ती में सईद तिगाला, हाजी अफजल रिज़वी, इस्माईल खान, मजीद खान, अतहर बक्श, समीर खान, आदिल अमान, शेख गुलाम (भैय्यू), गुलाम मोहियुद्दीन (बबलू), आदिल गोरी, अल्ताफ तिगाला, जाबिर खान, इम्तियाज निर्बान, ज़हीर कुरैशी, जमीर खान, गोलू चौहान, याकूब खान सहित कमेटी के अन्य ओहदेदार व नौजवान मिलकर इफ्तार कार्यक्रम के इंतजाम को बेहतर तरीके से अंजाम दे रहे हैं।

असर की नमाज के बाद इफ्तार की तैयारी शुरू हो जाती है और रोजेदारों तक इफ्तार प्लेट पहुंचाई जाती है। सभी एक साथ बैठकर रोज़ा इफ्तार करते हैं। मग़रिब की नमाज के बाद लोग अपने घरों को रवाना हो जाते हैं।

छोटे बच्चों में भी खासा उत्साह देखा जा रहा है। मो. अनस, मो. हसनैन (वल्द सरफराज निर्बान), मो. दानिश (वल्द वसीम तिगाला), मोहम्मद आकीफ सिद्दीकी (वल्द मो. अबरार सिद्दीकी), आहिल रज़ा एवं राहिल रज़ा (वल्द सद्दाम रज़ा) ने पूरे जोश के साथ रोज़े रखे हैं।

रात्रि में ईशा की नमाज के बाद तरावीह की नमाज जामा मस्जिद के इमाम मौलाना शकील चिस्ती की जानिब से अदा कराई जा रही है। मस्जिद में नमाजियों की बढ़ती संख्या से माहौल खुशनुमा और रूहानी बना हुआ है।

उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी मो. जुनैद कुरैशी ने दी।

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