नव चेतना समाजसेवी संगठन ने मूक-बधिर बच्चों के साथ मनाई अपनत्व की स्नेहमयी होली



बालोद। नव चेतना समाजसेवी संगठन ने अपने आदर्श वाक्य “सेवा ही सर्वोत्तम धर्म है” को चरितार्थ करते हुए एक बार फिर संवेदनशील सामाजिक पहल की मिसाल पेश की। प्रकृति-प्रेम, संरक्षण, जीव-दया, सामाजिक सेवा तथा धर्म एवं संस्कृति संरक्षण जैसे उपक्रमों के माध्यम से संगठन निरंतर समाज में करुणा और उत्तरदायित्व का संदेश दे रहा है।

इसी क्रम में संगठन की बहनों ने जय स्तंभ चौक स्थित “घरौंदा” (मूक-बधिर केंद्र) में विशेष बच्चों के साथ स्नेह, आत्मीयता और अपनत्व की रंगभरी होली मनाई। बहनों ने हर्बल गुलाल से बच्चों के कपोलों को स्पर्श कर प्रेमपूर्वक रंग लगाया। देखते ही देखते मासूम चेहरों पर खुशी की लाली खिल उठी और पूरा परिसर हर्षोल्लास से गूंज उठा।

संगठन की ओर से बच्चों को मिठाइयाँ एवं विविध पकवान स्नेहपूर्वक परोसे गए। इस अवसर को और भी विशेष बनाते हुए संगठन की सचिव डिलेश्वरी साहू ने बच्चों के साथ अपना जन्मदिन भी मनाया। केक काटते समय वे भावुक हो उठीं और इसे अपने जीवन का सबसे यादगार जन्मदिन बताया। उन्होंने संगठन की अध्यक्ष पद्मिनी देवेंद्र साहू के प्रति आभार व्यक्त किया, जिनके सहयोग से यह आयोजन संभव हो सका।

कार्यक्रम में संयोजिका पद्मिनी देवेंद्र साहू, सहसंयोजिका दुर्गा जोशी, सहसचिव रीता पाठक, कोषाध्यक्ष रुक्मणी कोसरे, सहकोषाध्यक्ष वंदना यादव, सरिता साहू, भगवती सोनकर, राजेश्वरी नेताम, सुशीला गरिया सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहीं।

संगठन ने संदेश दिया कि होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि हृदयों को जोड़ने का पावन पर्व है। यदि इसे सेवा, सद्भाव और सहभागिता के साथ मनाया जाए, तो यह किसी के जीवन में स्थायी खुशियों के रंग भर सकता है।

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