बालोद | ओबीसी महासभा ने राष्ट्रीय जनगणना 2027 के प्रथम चरण मकान सूचीकरण (हाउसलिस्टिंग) में शामिल 33 बिंदु प्रश्नावली के प्रश्न क्रमांक 12 में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की श्रेणी को शामिल करने की जोरदार मांग करते हुए देशभर में ज्ञापन सौंपा है। यह ज्ञापन महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृहमंत्री भारत सरकार, पंजीयक जनरल एवं जनगणना आयुक्त, तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के चेयरमैन के नाम सौंपा गया है।
ओबीसी महासभा ने स्पष्ट किया कि प्रश्न क्रमांक 12 में केवल अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और “अन्य” का विकल्प दिया गया है, जबकि OBC का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है, जब केंद्र सरकार स्वयं सार्वजनिक रूप से यह घोषणा कर चुकी है कि जनगणना 2027 में जाति आधारित गणना की जाएगी। ऐसे में प्रथम आधिकारिक प्रश्नावली में OBC श्रेणी का न होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
क्या OBC जाति जनगणना को कमजोर किया जा रहा है?
ओबीसी महासभा का कहना है कि OBC भारत की सामाजिक संरचना, आरक्षण व्यवस्था और कल्याणकारी नीतियों का सबसे बड़ा आधार है। इसके बावजूद प्रश्नावली में OBC का उल्लेख न होना इस बात पर संदेह उत्पन्न करता है कि OBC परिवारों की पहचान, वर्गीकरण और गणना किस प्रकार की जाएगी। महासभा ने आशंका जताई है कि यह संकेत OBC जाति जनगणना को टालने या कमजोर करने की दिशा में कदम हो सकता है।
सरकार से मांगी स्पष्ट जानकारी
महासभा ने सरकार से निम्नलिखित बिंदुओं पर तत्काल लिखित स्पष्टीकरण की मांग की है—
(क) OBC जाति गणना किस चरण में और किस प्रकार की जाएगी?
(ख) क्या इसे जनसंख्या गणना (द्वितीय चरण) में शामिल किया गया है?
(ग) OBC से संबंधित कौन-कौन से प्रश्न पूछे जाएंगे?
(घ) क्या इसकी कार्यप्रणाली (Methodology) को अंतिम रूप दे दिया गया है?
(ङ) जाति आधारित गणना की संपूर्ण रूपरेखा सार्वजनिक की जाए तथा
(च) राजनीतिक दलों, राज्य सरकारों, OBC संगठनों एवं विशेषज्ञों से व्यापक परामर्श किया जाए।
UGC के समानता विनियम 2026 का समर्थन
इसी क्रम में ओबीसी महासभा ने 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित UGC के “उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाले विनियम, 2026” का भी पूर्ण समर्थन व्यक्त किया है। महासभा का कहना है कि ये विनियम उच्च शिक्षा संस्थानों में निष्पक्ष, समावेशी और सुरक्षित वातावरण बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम हैं और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप हैं।
इन विनियमों के तहत प्रत्येक उच्च शिक्षा संस्थान में समान अवसर केंद्र (Equal Opportunity Centre – EOC) और समानता समिति (Equity Committee) की स्थापना अनिवार्य की गई है, जिसमें SC, ST, OBC, दिव्यांगजन एवं महिलाओं का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा। इसके साथ ही 24×7 समानता हेल्पलाइन, समानता दूत और समानता दल जैसी व्यवस्थाएं भी की गई हैं।
नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान
महासभा ने बताया कि इन विनियमों में निगरानी और जवाबदेही की स्पष्ट व्यवस्था है। नियमों का पालन न करने वाले संस्थानों पर यूजीसी द्वारा वित्तीय सहायता रोकने, डिग्री प्रदान करने का अधिकार छीनने या मान्यता समाप्त करने जैसी कठोर कार्रवाई की जा सकती है।
बालोद सहित पूरे प्रदेश में सौंपा गया ज्ञापन
यह ज्ञापन केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में ओबीसी महासभा द्वारा सौंपा गया है। इसी क्रम में बालोद जिले के डौंडी लोहारा विकासखंड में तहसीलदार के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान ओबीसी महासभा के प्रदेश अध्यक्ष राधेश्याम, प्रदेश कोषाध्यक्ष महावीर कलिहारी, प्रदेश सह-सचिव एमडी साहू एवं पुनेश्वर देवांगन, कर्मचारी मोर्चा जिला अध्यक्ष भागवत राम इंदौरिया, भालूकोन्हा ग्रामीण अध्यक्ष प्रभु राम यादव, कसही ग्रामीण अध्यक्ष राममिलन साहू, धनगांव ग्रामीण अध्यक्ष पदारथ पटेल, एडवोकेट टुमन लाल साहू, एडवोकेट भीषम चंद्राकर, संजय कुमार यादव, विशेश्वर विश्वकर्मा, एडवोकेट चंद्रभूषण पटेल, एडवोकेट विजय कुमार यादव, एडवोकेट थानेश्वर साहू सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे। वहीं बालोद नगर में जिला अध्यक्ष यज्ञदेव पटेल, नगर अध्यक्ष सतीश यादव, कांग्रेस जिला अध्यक्ष चंद्रेश हिरवानी, महिला मोर्चा जिला महासचिव पद्मनी साहू, तथा गुरुर ब्लॉक में ब्लॉक अध्यक्ष ओमप्रकाश साहू और बालोद ब्लॉक अध्यक्ष पवन कुमार साहू सहित अनेक पदाधिकारी शामिल हुए। ओबीसी महासभा ने दो टूक कहा है कि यदि प्रश्नावली में OBC श्रेणी को स्पष्ट रूप से शामिल नहीं किया गया, तो यह जनगणना की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े करेगा।
