बदलाव की शुरुआत: 25 हजार के अर्थदंड का दिखा असर: महिलाओं के नेतृत्व में जगन्नाथपुर बना नशामुक्त व अनुशासित, मजाक को चुनौती बनाकर नारी शक्ति ने कर दिखाया



बालोद। ग्राम जगन्नाथपुर में लागू किए गए ₹25,000 के अर्थदंड के नियम का असर अब साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। अवैध शराब बिक्री और शराब पीकर हुल्लड़ मचाने वालों पर सख्ती के बाद गांव का माहौल तेजी से बदल रहा है। यह सख्त और प्रभावी फैसला ग्राम विकास समिति ने लिया है, जिसकी कमान पूरी तरह महिलाओं के हाथों में है। महिलाओं की सतत निगरानी और दृढ़ इच्छाशक्ति के चलते अब गांव में शांति, अनुशासन और सामाजिक सद्भाव का वातावरण बन गया है।

गौरतलब है कि ग्राम विकास समिति की अध्यक्ष सहित सभी पदों पर महिलाएं हैं। इन्हीं महिलाओं ने यह नियम बनाया कि गांव में अवैध शराब बेचने या नशे की हालत में उपद्रव करने वालों से ₹25,000 का अर्थदंड वसूला जाएगा। इस नियम के लागू होते ही खुलेआम नशाखोरी करने वालों में खौफ देखने को मिल रहा है। नतीजतन, मानस गान, मेला और कबड्डी जैसे सांस्कृतिक व खेल आयोजनों का आयोजन पूरी तरह शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।

आयोजनों के दौरान ग्राम विकास समिति की महिलाओं ने असामाजिक तत्वों पर कड़ी नजर रखी। हर गतिविधि पर निगरानी के कारण किसी भी तरह की अव्यवस्था या विवाद की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई। यह पहल इस बात का मजबूत प्रमाण है कि जब महिलाएं संगठित होकर नेतृत्व संभालती हैं, तो गांव और समाज में सकारात्मक बदलाव निश्चित रूप से आता है।

मेले के दिन महिलाओं द्वारा एक और सराहनीय पहल की गई। पहली बार गांव के वरिष्ठ नागरिकों, देव पंचों और गांव के विकास में उत्कृष्ट योगदान देने वाले लोगों का सार्वजनिक रूप से सम्मान किया गया। इस सम्मान समारोह ने न केवल बुजुर्गों का मान बढ़ाया, बल्कि युवाओं को संस्कार, अनुशासन और समाज सेवा की प्रेरणा भी दी। इस पहल की अतिथियों और ग्रामीणों ने जमकर सराहना की।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला पंचायत सदस्य पूजा वैभव साहू के प्रतिनिधि वैभव साहू उपस्थित रहे। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि “₹25,000 के अर्थदंड का नियम केवल दंड नहीं, बल्कि सामाजिक सुधार का एक मजबूत माध्यम बन गया है। जगन्नाथपुर की महिलाएं आज पूरे जिले के लिए प्रेरणा हैं। नारी शक्ति जब नेतृत्व करती है, तो समाज में अनुशासन के साथ संवेदनशीलता और विकास भी सुनिश्चित होता है।” उन्होंने ग्राम विकास समिति के साहसिक निर्णय की सराहना करते हुए हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता जनपद सदस्य दमयंती सुभाष हरदेल ने की। उन्होंने कहा कि “जगन्नाथपुर की महिलाओं ने यह साबित कर दिया है कि महिलाएं केवल घर तक सीमित नहीं हैं। यदि उन्हें जिम्मेदारी और विश्वास दिया जाए, तो वे गांव को नशामुक्त, सुरक्षित और विकास के रास्ते पर ले जा सकती हैं। ₹25 हजार के अर्थदंड का असर आज पूरे गांव में नजर आ रहा है।”

ग्राम विकास समिति की अध्यक्ष कोमिन साहू ने बताया कि गांव में कुछ लोगों द्वारा अवैध शराब बेचने की शिकायतें मिली हैं। ऐसे लोगों को पहले चेतावनी दी जाएगी, लेकिन यदि इसके बाद भी सुधार नहीं हुआ तो समिति की बैठक लेकर उनसे ₹25,000 का अर्थदंड वसूला जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस नियम का उद्देश्य दंड देना नहीं, बल्कि गांव को नशे से मुक्त करना है।

उन्होंने यह भी बताया कि जब महिलाओं को ग्राम विकास समिति की जिम्मेदारी दी गई थी, तब कुछ विरोधी तत्व महिलाओं का मजाक उड़ाते थे और कहते थे कि महिलाएं कुछ नहीं कर पाएंगी। “हमारे आत्मविश्वास का मजाक उड़ाया गया, लेकिन हमने उस मजाक को चुनौती के रूप में लिया और आज परिणाम सबके सामने है,” अध्यक्ष कोमिन साहू ने कहा। उन्होंने युवाओं और वरिष्ठ बुजुर्गों के सहयोग को अहम बताते हुए मीडिया का भी आभार जताया, जो समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए निरंतर प्रेरित करता है।

उपाध्यक्ष चित्रांगनि ठाकुर, पंच राधाबाई और मोनिका साहू ने संयुक्त रूप से कहा कि गांव में शराब भट्टी खुलवाने तक का दबाव बनाया गया, लेकिन समिति ने इसका कड़ा विरोध किया। “हम नहीं चाहते कि आने वाली पीढ़ी नशे की गर्त में जाए। हमारा लक्ष्य गांव का समग्र विकास और भावी पीढ़ी को नशामुक्त बनाना है,” उन्होंने कहा।

जगन्नाथपुर की यह पहल नारी सशक्तिकरण का जीवंत उदाहरण है, जहां महिलाओं ने मजाक को चुनौती में बदलकर यह साबित कर दिया कि सशक्त नेतृत्व से गांव, समाज और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित और उज्ज्वल बनाया जा सकता है।

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