बालोद जिले में 9 जनवरी से प्रथम राष्ट्रीय जंबूरी , जानिए जंबूरी का इतिहास, क्या-क्या होगा इस दौरान? सब कुछ एक क्लिक पर..



बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में आगामी 9 जनवरी से राष्ट्रीय जंबूरी आयोजन होने जा रहा है, जिसे लेकर जिलेभर में उत्साह का माहौल है। दुधली में होने जा रहा यह आयोजन बालोद जिले के लिए ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार इतने बड़े स्तर पर राष्ट्रीय जंबूरी का आयोजन यहां किया जा रहा है। देश के विभिन्न राज्यों से हजारों स्काउट-गाइड, रोवर्स-रेंजर्स, प्रशिक्षक एवं पदाधिकारी इस जंबूरी में शामिल होने बालोद पहुंचेंगे। राष्ट्रीय जंबूरी के सफल आयोजन के लिए जिला प्रशासन, भारत स्काउट एवं गाइड संगठन और विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। आयोजन स्थल पर विशाल पंडाल, आवासीय टेंट, भोजनालय, प्रशिक्षण कक्ष, सांस्कृतिक मंच और प्रदर्शनी क्षेत्र बनाए जा रहे हैं। प्रतिभागियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए स्वच्छ पेयजल, शौचालय, बिजली और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

अधिकारियों ने लिया तैयारी का जायजा

बालोद जिले के ग्राम दुधली में आयोजित हो रहे राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी का बुधवार को दुर्ग संभागायुक्त श्री सत्यनारायण राठौर और दुर्ग रेंज आईजी श्री राम गोपाल गर्ग ने स्थल निरीक्षण कर तैयारियों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने प्रवेश द्वार, मंच, युवा संसद स्थल, वॉटर स्पोर्ट्स आदि का अवलोकन किया। उन्होंने राष्ट्रीय आयोजन के गरिमा के अनुरूप सभी तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा, एसपी श्री योगेश पटेल सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद थे।

क्या है आयोजन का मुख्य उद्देश्य

इस राष्ट्रीय जंबूरी का मुख्य उद्देश्य युवाओं में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, आत्मनिर्भरता, सेवा भावना और राष्ट्रीय एकता को प्रोत्साहित करना है। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न प्रशिक्षण सत्र, कार्यशालाएं और गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इनमें आपदा प्रबंधन, प्राथमिक उपचार, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता अभियान, जल संरक्षण और सामाजिक जागरूकता जैसे विषय शामिल रहेंगे। जंबूरी के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगे। देश के अलग-अलग राज्यों से आने वाले प्रतिभागी अपनी-अपनी लोक संस्कृति, पारंपरिक नृत्य, गीत और वेशभूषा के माध्यम से सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे। इससे प्रतिभागियों को भारत की विविधता में एकता को करीब से देखने और समझने का अवसर मिलेगा।

आयोजन में छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा। छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य, लोकगीत, पारंपरिक खान-पान और हस्तशिल्प प्रदर्शनी के माध्यम से राज्य की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा। जिला प्रशासन और आयोजन समिति द्वारा स्थानीय कलाकारों को मंच देने की विशेष योजना बनाई गई है। सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। आयोजन स्थल पर पुलिस बल, मेडिकल टीम, एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और स्वयंसेवकों की तैनाती की जाएगी। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए कंट्रोल रूम और निगरानी व्यवस्था भी बनाई जा रही है। राष्ट्रीय जंबूरी आयोजन से बालोद जिले के स्थानीय व्यापार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। बाहर से आने वाले हजारों प्रतिभागियों और अतिथियों के कारण होटल, परिवहन, खानपान और स्थानीय बाजारों में रौनक बढ़ेगी। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार और आय के अवसर भी मिलेंगे। जिला प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय जंबूरी बालोद जिले के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इससे जिले की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत होगी और युवाओं को सीखने तथा आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। कुल मिलाकर, 9 जनवरी से शुरू होने वाला राष्ट्रीय जंबूरी आयोजन बालोद जिले को राष्ट्रीय मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाने के साथ-साथ युवाओं में राष्ट्रनिर्माण की भावना को सशक्त करने वाला सिद्ध होगा।

इस तरह के किए गए हैं इंतजाम

इस राष्ट्रीय जंबूरी में लगभग 14000 लोग शामिल हो रहे हैं। जिसमें विदेशी भी आएंगे। इस आयोजन स्थल पर लगभग 2000 तंबू बनाए गए हैं। 15 एकड़ मैदान में पूरा इंतजाम किया गया है। 14 बड़े तंबू बनाए गए हैं। 900 शौचालय और 500 स्नानागार बनाए गए हैं। 6 बोर कराया गए हैं ताकि पानी की कोई समस्या ना हो। एक एरीना बनाया गया है, जहां लगभग 15000 लोग बैठ सकते हैं। लड़कियों और लड़कों के रुकने के लिए अलग-अलग व्यवस्था की गई है।

जंबूरी मार्केट का भी है इंतजाम

लगभग 44 दुकान अंदर मैदान में लगाई जाएगी। जहां फल फ्रूट स्टेशनरी खाने पीने की सभी चीज सहित दवाई और अन्य जरूरत के सामान मिलेंगे। सरकार की योजनाओं का स्टाल भी लगाया जाएगा। अस्थाई 30 बिस्तर हॉस्पिटल 24 घंटे चालू रहेंगे। जहां डॉक्टर और नर्स की सेवा के साथ एंबुलेंस की सुविधा रहेगी।

होंगे इस तरह के आयोजन और गतिविधियां

कार्यक्रम में उद्घाटन और समापन समारोह के बीच मार्च पास्ट, क्लोजिंग सेरेमनी, उप शिविर गतिविधियां, कैंप फायर, ग्रैंड कैंप फायर, कैंप क्राफ्ट, स्टेट गेट, पायनियरिंग प्रोजेक्ट, मार्च पास्ट, बैंड कंपटीशन, कलर पार्टी, फ्रॉक डांस, एथेनिक फैशन शो, एडवेंचर एरिया, वॉटर स्पोर्ट्स, ओवरनाइट हाइक, भौतिक गतिविधियां, राज्य प्रदर्शनी, आदिवासी कार्निवाल, राष्ट्रीय युथ डे, मास ट्री प्लांटेशन, आपदा प्रबंधन, क्विज प्रतियोगिता, युवा सांसद, बैकवुडमैन कुक आदि गतिविधियां होंगी। 11 जनवरी को स्वच्छता अभियान के तहत 200 बच्चे दुधली मालीघोरी बस्ती में भ्रमण करेंगे और स्वच्छता का संदेश भी देंगे।

प्रथम राष्ट्रीय रोवर रेंजर्स जंबूरी का है आयोजन
आयोजन की तैयारी के संबंध में प्रेस वार्ता भी हुई, जिसमें जिला आयुक्त राकेश यादव ने बताया कि भारत स्काउट एंड गाइड नई दिल्ली के तत्वाधान में 9 से 13 जनवरी 2026 तक दुधली में भारतवर्ष के इतिहास में प्रथम राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी का आयोजन हो रहा है। भारत में सिर्फ स्काउट गाइड जंबूरी का आयोजन होता रहा है। पर ग्राम दुधली में पहली बार राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी का आयोजन हो रहा है। रोवर यानी 16 से 25 आयु वर्ग के बालक वर्ग एवं रेंजर यानी 16 से 25 आयु वर्ग की बालिका इस जंबूरी में भाग लेंगे। इतने बड़े आयोजन की मेजबानी छत्तीसगढ़ राज्य को मिलना न सिर्फ बड़ी उपलब्धि है बल्कि गौरव की बात है। उक्त जंबूरी में छत्तीसगढ़ के करीब 4252, भारत के अन्य राज्यों, रेलवे, केंद्रीय विद्यालय संगठन, नवोदय विद्यालय संगठन के करीब 11696 प्रतिभागी भाग लेंगे। उनके साथ ही स्टाफ अधिकारी 2000, इस तरह कुल लगभग 14000 लोग सम्मिलित होंगे। इनके अलावा अन्य देश के प्रतिभागी भी भाग लेंगे। आयोजन से स्काउट गाइड में भाईचारा, अनुशासन, सेवा भावना, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, नेतृत्व विकास और राष्ट्रीय निर्माण की भावना को मजबूत करना है। आज जंबूरी स्काउटिंग का एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक उत्सव बन चुकी है जो युवाओं को विश्व नागरिक बने प्रेरित करती है।

अफ्रीकन भाषा से लिया गया है जंबूरी शब्द, अर्थ है आनंदपूर्ण मिलन

स्काउटिंग जंबूरी के संक्षिप्त इतिहास की बात करें तो जंबूरी शब्द अफ्रीकी भाषा से लिया गया, जिसका अर्थ है आनंद पूर्ण मिलन। स्काउटिंग जंबूरी का इतिहास विश्व स्काउट आंदोलन से जुड़ा हुआ है। स्काउट आंदोलन की स्थापना 1907 में ब्रिटेन के लॉर्ड रॉबर्ट वेडन पावेल ने की थी। इस आंदोलन को वैश्विक स्तर पर एकजुट करने की उद्देश्य से जंबूरी की परंपरा शुरू हुई। प्रथम विश्व स्काउट जंबूरी का आयोजन 1920 में लंदन ओलंपिया में किया गया। जिसमें 34 देश के स्काउट ने भाग लिया था। भारत में स्काउटिंग जंबूरी का आयोजन भारत स्काउट एवं गाइड के तत्वाधान में किया जाता है। भारत में प्रथम राष्ट्रीय एवं जंबूरी 1951 में हैदराबाद में आयोजित की गई थी। अब तक 19 बार राष्ट्रीय जंबूरी का आयोजन हो चुका है। 14वीं राष्ट्रीय स्काउट गाइड जंबूरी का आयोजन रायपुर छत्तीसगढ़ में 2002 में हुआ था। 19वीं राष्ट्रीय स्काउट गाइड जंबूरी का आयोजन लखनऊ उत्तर प्रदेश में 25 से 29 नवंबर 2025 तक हुआ था। जिसमें छत्तीसगढ़ स्काउट गाइड दल में 366 प्रतिभागियों ने भाग लिया था। जिन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए 8 इवेंट में ए और 7 इवेंट में बी ग्रेड हासिल कर अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है।

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