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सिर्राभांठा में हरि नाम संकीर्तन का हुआ समापन- समाज सेवी राजेश सिन्हा ने की लोगों से प्लास्टिक छोड़ने की अपील

बालोद। जिले के गुण्डरदेही ब्लॉक के ग्राम सिर्राभांठा में सिन्हा परिवार एवं समस्त ग्राम वासियों के सहयोग से तीन दिवसीय हरि नाम संकीर्तन भजन का आयोजन किया गया था। जिसका समापन 31 दिसंबर को देर रात को हुआ। संकीर्तन में कथा वाचक के रूप में कामता प्रसाद शरण ने अपने भक्ति पूर्ण भजनों से श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। आयोजन में प्रति दिन हजारों की भीड़ देखने को मिली। गांव के विष्णु लक्ष्मी नारायण मंदिर प्रांगण में यह आयोजन हुआ। जहां छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध व्याख्याकार कथावाचक कामता प्रसाद शरण को सुनने के लिए विभिन्न ग्रामों से सभी धर्म प्रेमी श्रद्धालु जन पहुंचे थे। इस तीन दिवसीय आयोजन के दौरान महाप्रसादी भंडारा का आयोजन भी रखा गया था।

समापन के अवसर पर अतिथि के रूप में जिला पंचायत अध्यक्ष तारिणी पुष्पेंद्र चंद्राकर, पूर्व जिला पंचायत सदस्य पुष्पेंद्र चंद्राकर, क्षेत्र के पूर्व विधायक वीरेंद्र साहू, जिला पंचायत सदस्य कांति सोमेश्वरी सहित अन्य पहुंचे हुए थे। कथा प्रसंग के दौरान कामता प्रसाद शरण ने लोगों को भगवान पर भरोसा रखने की बात कही। उन्होंने अपने जीवन के पुराने दिनों और संघर्षों के बारे में भी बताया और कहा कि मालिक और माता लक्ष्मी की कृपा है जो आज वे इस मुकाम पर हैं। एक समय था जब वे एक एक रुपए के लिए तरसते थे। उन्होंने लोगों को किसी भी विकट समस्या में हार ना माने के लिए प्रेरित किया। कहा कि सुख और दुख भगवान की कृपा से ही होते हैं। आज दुख है तो कल सुख जरूर मिलेगा। उन्होंने कहा कि जो मेरी निंदा करते हैं उन्हें मैं अपना गुरु मानता हूं। कुछ लोग मुझे कहते थे कि तुम यह नहीं कर सकते,आज मैंने उनको वह सब करके दिखाया है। उन्होंने लोगों से अभिमान ना करने की अपील करते हुए कहा कि रंक को राजा और राजा को रंक बनने में देर नहीं लगती। उन्होंने भक्त चंद्रहास के महाराजा बनने के संघर्ष भरी कथा बताई।

समापन पर भजनों के दौरान महिलाएं भक्ति भाव में विभोर होकर जमकर थिरकती नजर आई। आयोजक राजेश सिन्हा ने सभी लोगों का आयोजन को सफल बनाने के लिए आभार जताया। साथ ही उन्होंने अपने बालोद जिले को प्लास्टिक मुक्त जिला बनाने संबंधी अभियान की जानकारी देते हुए लोगों को प्रेरित किया। उनके द्वारा अब तक 43 ग्रामों में 200 थाली गिलास का सेट दिया जा चुका है। जहां सार्वजनिक आयोजनों में लोग प्लास्टिक छोड़कर अब स्टील के थाली गिलास का उपयोग करते हैं। प्रत्येक ग्राम को दिए जाने वाले इस दान में 16 हजार रुपए का खर्च आता है। उनका संकल्प बालोद जिले के सभी 707 ग्रामों को थाली गिलास देकर जिले को प्लास्टिक मुक्त बनाना है। मंच संचालन अमृतानंद सिन्हा ने किया।

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