बालोद। छत्तीसगढ़ दिव्यांग सेवा संघ के बैनर तले बालोद जिले के दिव्यांगों ने कलेक्टर के जरिए मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देते हुए 6 सूत्रीय मांगों को निराकृत करने की मांग रखी गई है। उन मांगों के निराकरण में हो रही अनावश्यक विलंब के विरोध स्वरूप विश्व दिव्यांग दिवस 3 दिसंबर को बहिष्कार करने की बात भी दिव्यांगों ने कही है। दिए गए आवेदन में बताया गया है कि छत्तीसगढ़ के वास्तविक दिव्यांग जनों के अधिकार संरक्षण का कार्य संघ करता है। उनके द्वारा लंबित 6 मांग को अब तक शासन ने पूर्ण नहीं किया है।

जिसमें प्रमुख मांग है कि समस्त फर्जी दिव्यांग जनों का राज्य मेडिकल बोर्ड से दिव्यांगता का भौतिक परीक्षण कराकर फर्जी पाए जाने वालों को बर्खास्त किया जाए। दिव्यागों का मासिक पेंशन ₹500 से बढ़ाकर 5000 रुपए मासिक पेंशन किया जाए और बीपीएल की बाध्यता खत्म की जाए । समस्त विभाग में दिव्यांग कोटे के बैकलॉग पदों पर विशेष भर्ती अभियान हेतु विज्ञापन जारी की जाए। 21 वर्ष से अधिक आयु के अविवाहित दिव्यांग युवती को महतारी वंदन योजना में शामिल किया जाए। दिव्यांगता के कारण शादी न होने पर महतारी वंदन का लाभ ₹5000 मासिक पेंशन के अलावा अलग से दिया जाए। शासकीय पदों पर नियुक्त दिव्यांग शासकीय अधिकारियों कर्मचारियों को पदोन्नति पर तीन प्रतिशत पदों पर 1 नवंबर 2016 से पदोन्नति पदों की गणना कर तीन प्रतिशत पदोन्नति में आरक्षण प्रदान किया जाए। इस हेतु परिपत्र जारी किया जाए। कोरोना काल के पूर्व के स्वरोजगार हेतु दिव्यांगजनों के द्वारा लिए गए निशक्त वित्त निगम के कर्ज को माफ कर बिना गारंटर लोन दिया जाए।
