बालोद। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय किल्लेकोडा में बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती अजय मुखर्जी( प्राचार्य एवं डॉक्टर बी. एल. साहसी व्याख्याता के नेतृत्व में मनाई गई। इस अवसर पर डॉक्टर साहसी ने उसकी जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि- बिरसा मुंडा का जन्म 1875 को झारखंड के उलहातू गांव में हुआ था, वे एक आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी थे, और मुंडा जनजाति के लोकनायक थे। उन्होंने सिर्फ 25 वर्ष की उम्र में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह कर योद्धा बने, और आदिवासियों के भगवान बन गए। उन्हें धरती आबा कहा जाने लगा ,उन्होंने नारा दिया- अबुआ दिसुम अबुआ राज अर्थात हमारे देश पर हमारा राज होगा। वाय.एस. मरकाम (व्याख्याता) ने कहा कि- उलहातू गांव का युवक 25 वर्ष की उम्र में अंग्रेजों के विरुद्ध कदम उठाने के साथ अंग्रेजों के आंखों की किरकिरी बन गए जिसने आदिवासियों के हक की लड़ाई लड़ी । इस अवसर पर संबोधित करते हुए मुखर्जी सर ने कहा कि अंग्रेजो के सबसे बड़े बाधक बिरसा मुंडा थे वह उनकी आंखों में खटकने लगे थे। वह एक महान स्वतंत्रता सेनानी बनने के साथ आदिवासियों की जननायक बन गए थे। इसलिए उन्हें धरती का पिता और भगवान कहा जाता था। उक्त अवसर पर सी.जी. पटेल व्याख्याता, जे.पी. बांधव व्याख्याता, हेमेंद्र साहू व्याख्याता, घनश्याम पटेल व्याख्याता ,श्रीमती त्रिजला ठाकुर मैडम, खगेश ठाकुर क्लर्क, कुशल देवदास सहित समस्त स्टाफ उपस्थित थे। अंत में आभार प्रदर्शन पटेल सर व्याख्याता ने किया।
किल्लेकोडा स्कूल में मनाई गई बिरसा मुंडा की 150 वीं जयंती
