राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर पाररास स्कूल में किया गया पौधारोपण



बालोद – राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर शासकीय बुनियादी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पाररास बालोद में पौधारोपण किया गया। सर्वप्रथम कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता की आरती के साथ वंदे मातरम गीत का गायन हुआ। प्रभारी प्राचार्य श्री आर के कटेंद्र ने बताया कि अंग्रेजों ने भारत में अपने देश का नेशनल सॉन्ग बहुत ज्यादा प्रचलित कर लिया था वह गाते थे ” o God save are king and queen. मतलब हे प्रभु हमारे राजा और रानी के ऊपर कृपा दृष्टि बनाए रखना ,यह गीत बंकिम चंद्र चटर्जी को अच्छा नहीं लगा क्योंकि हम तो भारत को अपनी मां मानते हैं इसलिए उन्होंने ट्रेन में सफर के दौरान सन 7 नवंबर 1875 को एक पन्ने में एक गीत लिखा, ,बाद में उसे इन्होंने एक अ।लमारी में रख दिया । कुछ साल बाद उन्होंने एक नोबेल लिखा, जिसमें सन्यासी विद्रोह का वर्णन था। उसमें एक कैरेक्टर था सन्यासी, वह गा रहा है, वंदे मातरम ,सुजलाम, सुफलाम मल।यज शीतलाम , फिर इसमें आगे धरती को दुर्गा मां के रूप में जो शक्ति का प्रतीक होता है, आगे गीत को जोड़ा गया ,यह गीत लोगों को बहुत पसंद आया। सन 1882 में आनंद मठ उपन्यास के रूप में यह गीत घर-घर पहुंचा । फिर सन 1896 में कोलकाता में कांग्रेस के सेशन में रविंद्र नाथ टैगोर ने पहली बार इसे गाकर फेमस किया.. एक मैडम थी भीखा जी कामा, इन्होंने देश की आजादी के लिए कई कार्य किए है, जिसका दिल्ली में पैलेस भी है। इन्होंने जर्मनी में एक जगह है जिसका नाम है स्क्रूट गार्ड, सेकंड लेवल की नेशनल मीटिंग कॉन्फ्रेंस में झंडा फहराया था जिसके बीच में लिखा था वंदे मातरम। इसको गाने में 1 मिनट 5 सेकंड लगते हैं और यह संस्कृत भाषा में लिखा गया है।

कार्यक्रम के अंत में आभार प्रदर्शन श्री चिम्मन साहू सर ने किया। इस कार्यक्रम में शाला परिवार के इको क्लब, ग्रीन ग्रुप ,येलो ग्रुप के बच्चे शिक्षक शिक्षिकाएं, स्कूल सफाई कर्मचारी एवं भृत्य का विशेष सहयोग रहा। श्री एस के रात्रे सर ने कहा कि हमारे विद्यालय में अंशकालीन सफाई कर्मचारी के पद पर रूपेश कुमार सोनकर जी कार्यरत हैं जिनका अलग ही पहचान पर्यावरण के क्षेत्र में बना हुआ है।

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