टिकेश्वरी लाल देशमुख को मिला कीर्ति शेष श्री कोदूराम वर्मा सम्मान



अंडा। पूर्ववर्ती दुर्ग जिले में 1990 से 2003 तक जिला साक्षरता समिति दुर्ग द्वारा संचालित साक्षरता ,उत्तर साक्षरता ,सतत शिक्षा कार्यक्रम में सहभागी होकर दिए गए उत्कृष्ट व अनुकरणीय योगदान के लिए श्री टिकेश्वरी लाल देशमुख को कीर्ति शेष श्री कोदूराम वर्मा सम्मान प्रदान किया गया। गौरतलब हो कि स्वर्गीय कोदूराम वर्मा करमा लोकगीत एवं नृत्य को लेकर देश में करमा सम्राट के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने लोक संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन तथा प्रदर्शन के लिए काम करते हुए करमा को देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया। उन्होंने साक्षरता अभियान दुर्ग जिला तत्कालीन मध्य प्रदेश में करमा गीत संगीत एवं नृत्य को माध्यम बनाकर जन मानस तक चेतना जागृत करने हेतु बड़ा योगदान दिया था जो स्मरणीय है।कीर्ति शेष कोदूराम वर्मा के योगदान को साथ-साथ रहकर आगे बढ़ने वाला कलाकार टिकेश्वरी देशमुख ने साक्षरता, उत्तर साक्षरता ,सतत शिक्षा अभियान के दौरान चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों में कला जत्था के माध्यम से अभियान से जुड़कर हजारों नाटकों का प्रदर्शन किया। 13 वर्षों में उनके द्वारा संचालित कार्यक्रम में गांव-गांव मशाल रैलिया एवं नुक्कड़ नाटक के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य जागरूकता ,महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण, अंध श्रद्धा उन्मूलन तथा लोक संस्कृति के संरक्षण के क्षेत्र में कार्यक्रम दिए। उनके द्वारा कई कला जत्था का निर्देशन एवं संयोजन किया गया तथा जनप्रतिनिधि कला जत्था का निर्माण किया गया ,जो देश के लिए एक नया प्रयोग था। देशमुख द्वारा भारत के स्वतंत्रता की रजत जयंती अवसर पर नई दिल्ली सहित कई राष्ट्रीय सेमिनारों में अपने कला का प्रदर्शन दिया जा चुका है और आज भी अपनी कला यात्रा को जारी रखा है। विगत दिनों सेक्टर 6 में आयोजित साक्षरता मित्र मंच द्वारा यह सम्मान प्रदान किया गया। जिसमें वर्मा जी के परिवार से प्रेमलाल वर्मा सहित सह परिवार देशमुख का अभिनंदन किया। इस अवसर पर सम्मान समारोह में मुख्य रूप से पूर्व कमिश्नर दुर्ग संभाग श्री बी.एल., तिवारी, साक्षरता मंच के अध्यक्ष श्री डी एन शर्मा ,पद्मश्री शमशाद बेगम पद्मश्री डोमार सिंह कुंवर, साहित्यकार परदेसी राम वर्मा ,शरद कोकस ,अनीता सावंत ,शशि दुबे, शैल देवी वर्मा ,चुन्नीलाल शर्मा ,पुन्नू यादव ,ज्ञानचंद जैन ,प्रीति बेहरा, संध्या मदन मोहन ,रत्ना नामदेव, सहित सैकड़ो साहित्यकार ,रचनाकार ,पत्रकार, कलाकार तथा स्वयंसेवी कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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