डिवाइडर निर्माण में शिवसेना ने लगाया मापदंड के विपरीत काम का आरोप, बोर्ड में भी दी गई है आधी अधूरी जानकारी , पीएम कार्यालय तक हुई है शिकायत, पर कार्रवाई के बजाय रौब दिखाने में लगी है अधिकारी….



बालोद । बालोद शहर में बन रहे डिवाइडर का गलत तरीके से निर्माण और पारदर्शिता के अभाव को लेकर मामला सामने आया है। जिसमें शिवसेना के जिला अध्यक्ष विजय पारख ने जनदर्शन में शिकायत कर आरोप लगाया है कि सड़क, डिवाइडर नाली निर्माण कार्य में अनियमितता बरती जा रही है। मापदंड के विपरीत निर्माण हो रहे हैं वही निर्माण से संबंधित जो बोर्ड लगाया गया है उसमें भी जानकारी आधी अधूरी और लोगों को भ्रमित करने वाली है। बोर्ड में जो करीब 2 माह पहले लगाया गया है, उसमें कार्य पूर्ण करने की अवधि 5 महीने लिखी गई है। लेकिन कार्य प्रारंभ तिथि का कहीं कोई उल्लेख नहीं है। इस पर शिवसेना जिला अध्यक्ष विजय पारख का कहना है कि ऐसे में संबंधित ठेकेदार और विभाग अपनी जिम्मेदारी से बच जाते हैं और काम में लेट लतीफी की जाती है। 4 महीने पहले भी निर्माण में हो रही लापरवाही को लेकर शिकायत की गई थी और अभी तक काम अधूरा ही है, ना कोई उचित कार्रवाई हुई है। उनकी शिकायत के बाद बुधवार को एसडीएम कार्यालय में शिवसेना के साथियों को सुनवाई और चर्चा के लिए बुलाया गया था। जिसमें अपर कलेक्टर, एसडीएम नूतन कुमार कंवर ने संबंधित विभाग एवं ठेकेदार पर उचित कार्रवाई करने की बात कही है। साथ ही जल्द से जल्द आम जनता को एक गुणवत्तापूर्ण और सुव्यवस्थित सड़क यातायात मुहैय्या कराने का आश्वासन भी दिया गया है। जिला अध्यक्ष विजय पारख ने कहा कि 2 महीने से बोर्ड लगा है लेकिन बोर्ड में किसी तरह की कोई जानकारी नहीं है कि सड़क की चौड़ाई कितनी है, कितना मोटाई होना है, मोटाई कितनी होगी। इस तरह से मापदंड के विपरीत निर्माण तो हो ही रहा है तो वही जानकारी के नाम पर भी पारदर्शिता नहीं दिख रही है। जो बोर्ड लगाया गया है उसमें कार्य प्रारंभ तिथि भी नहीं लिखा है।

क्या-क्या है बोर्ड में

बोर्ड में उपलब्ध जानकारी अनुसार छत्तीसगढ़ शासन लोक निर्माण विभाग बालोद संभाग के अंतर्गत अनुविभागीय क्रमांक एक बालोद के अंतर्गत जिला बालोद के दल्ली चौक से पाररास बालोद रेलवे क्रासिंग तक 1.85 किलोमीटर लंबाई तक पुल पुलिया सहित सूंदरीकरण एवं मार्ग विभाजन का निर्माण कार्य होना है। जिसकी कार्य एजेंसी मेसर्स सेवा सिंह ओबेरॉय एंड कंपनी ए वर्ग ठेकेदार है। निविदा की राशि 7 करोड़ 40 लाख 79 हजार है। अनुबंध की अवधि 5 माह बताई गई है। परफॉर्मेंस गारंटी की अवधि अनुबंध पूर्णता के पश्चात 60 माह दी गई है। अनुबंध की लागत निविदा दर सहित 5 करोड़ 92 लाख 63 हजार है। बोर्ड में कार्यपालन अभियंता पूर्णिमा चंद्रा, अनुविभागीय अधिकारी अरुण कुमार बढ़ई और उप अभियंता डी के माहेश्वरी ,राजेश यादव आदि के नाम का उल्लेख है लेकिन इनसे संपर्क करने के लिए कहीं कोई नंबर आम जनता की सुविधा या जानकारी के लिए नहीं दी गई है। इसके अलावा और भी कई बातें जो बोर्ड में लिखी जानी थी वह नहीं लिखी गई है। शिवसेना जिला अध्यक्ष विजय पारख ने कहा कि हमने मामले की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय तक को भेजी है।

शिकायत को गंभीरता से न लेकर 18 साल की सर्विस का रौब दिखाने लगी मैडम

विजय पारख ने प्रेस को बताया कि संबंधित सड़क निर्माण शिकायत को गंभीरता से ना लेते हुए पीडब्ल्यूडी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी पूर्णिमा चंद्रा ने उल्टे पद की गरिमा के विपरीत अपने 18 साल के सर्विस का रौब दिखाने लगीं। जिससे साफ जाहिर होता है कि लोकनिर्माण विभाग में खुलेआम भर्राशाही बंदरबांट लुट खसोट का खेल चल रहा है। ऐसे लापरवाह अधिकारियों की वजह से ही आम जनता सरकार को नकारते आ रही है। लापरवाही ऐसी है कि बीच सड़क में बिजली खंभे हैं जिसे आज तक हटाया नहीं गया है। वहीं मुख्य निर्माणाधीन नालियां भी आड़ी तिरछी बनाई जा रही है। स्वयं कलेक्टर दिव्या मिश्रा ने शिकायत पर निरीक्षण कर संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार को सड़क नाली सुधारकर बनाने को कहा है।

अधिकारियों से मिला है ये आश्वासन

बुधवार को एसडीम अपर कलेक्टर नूतन कुमार कंवर और तहसीलदार शर्मा ने शिवसेना नेताओं से विस्तृत चर्चा की एवं आश्वासन दिया कि सड़क पूरी तरीके से अपने तय मानक में बनेगा। बोर्ड में भी उसके लंबाई, चौड़ाई लिखवाई जाएगी और नाली आड़ी तिरछी बनाई गई है, जहां पेड़ आ रहे हैं, उस पेड़ को हटाकर नाली को सीधा किया जाएगा। जिससे कि सड़क के दोनों छोर में बराबर वाहनों को आने-जाने की सुविधा हो सके। एसडीएम नूतन कुमार कंवर ने विजय पारख से यहां तक कहा कि अमीर हो या गरीब छोटे-बड़े जिनका भी सड़क निर्माण में जमीन मकान आ रहे हैं उसे हटाकर सड़क को पूर्ण व्यवस्थित किया जाने के लिए कार्रवाई की जाएगी। इसमें किसी के साथ भी भेदभाव नहीं होने देंगे।

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