बालोद। विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल द्वारा गोपाष्टमी के दिन गौ माता का पूजा अर्चना करप्रसाद खिलाया गया । आईटीआई के पास स्थित गौशाला और ताण्दुला डैम के आसपास विचरण कर रही गौ माता की पूजा कर उन्हें प्रसाद खिलाया गया। इस अवसर परप्रदीप मिनपाल जिला संयोजक बजरंग दल,
नगर सहसंयोजक राजा यादव, नगर विद्यार्थी प्रमुख प्रवीण सोनकर, गौ रक्षा प्रमुख प्रथम सोनी, घनश्याम यादव, लोकेश यादव, लकी सिंह, अंश योगी, कोमल यादव आदि बजरंगी उपस्थित थे। उमेश कुमार सेन विश्व हिंदू परिषद जिला सह मंत्री ने बताया कि पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण ने ब्रजवासियों को भगवान इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिये गोवर्धन पूजा के दिन गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा यानी छोटी उंगली पर उठाया था।

सात दिनों तक भगवान इंद्र के भयंकर वर्षा करने के बाद उन्होंने गोपाष्टमी के दिन अपनी हार स्वीकार की थी। कहा जाता है कि भगवान कृष्ण ने ब्रजवासियों की ओर से इंद्रदेव को दी जाने वाली वार्षिक भेंट को रोकने का सुझाव दिया था। इस बात से भगवान इंद्र गुस्सा हो गए थे और उन्होंने ब्रज को डुबाने का फैसला किया था, लेकिन इंद्रदेव अपने इस उद्देश्य में विफल रहे, क्योंकि पूरा ब्रज गोवर्धन पर्वत के नीचे सुरक्षित हो गया था।
क्यों पड़ा भगवान श्रीकृष्ण का नाम गोविंद:
भगवान श्रीकृष्ण का गोविंद नाम इसलिए पड़ा क्योंकि उन्होंने गोपालन, गोसंरक्षण-संवर्दन व गो सेवा के प्रति सभी लोगों को प्रेरित किया था। ऐसा भी माना जाता है कि गोपाष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के समय से ही मनाई जाती है। इस दिन गाय, गोवत्स (बछड़ों) तथा गोपालों के पूजन का विधान है। गोपाष्टमी के दिन गाय को हरा चारा या हरी मटर खिलाना अत्यंत शुभ माना जाता है। कहते हैं कि ऐसा करने से तरक्की मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि व खुशहाली आती है।
गोपाष्टमी के दिन गाय को गुड़ खिलाना अत्यंत लाभकारी माना गया है। कहते हैं कि ऐसा करने से सामाजिक मान-प्रतिष्ठा के साथ भाग्य का साथ मिलता है।
