पहले से शिकायत के बावजूद अधिकारियों ने नहीं दिया ध्यान, उजड़ गया रौना का बगीचा
बालोद। अर्जुंदा तहसील क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत रौना में फलदार आम के पेड़ों की अवैध कटाई का मामला सामने आया है। खसरा नंबर 47 जमीन के मालिक वासुदेव देशमुख ने 10 आम के पेड़ कटवाने के लिए गुण्डरदेही एसडीएम से अनुमति ली थी। अनुमति 13 अक्टूबर को मिली थी लेकिन उन्होंने 3 दिन में 16 आम के पेड़ कटवा दिए। आश्चर्यजनक बात यह है कि केवल आम वृक्ष की शाखा पतली टहनियां ही रखी हुई है। वृक्ष के मोटे तने/लट्ठे सब गायब है। इस बात की जानकारी मिलने पर देवगहन के पूर्व सरपंच लोकेंद्र साहू अपने परिवार सहित कटाई वाले स्थान पर धरने पर भी बैठ गए थे। उन्होंने बताया कि पर्यावरण संरक्षण और फलदार वृक्षों को बचाने के लिए वे कड़ी मेहनत कर रहे हैं उन्हें कुछ दिन पहले ही सूचना मिली थी कि यहां अवैध तरीके से पेड़ काटे जाने हैं। यहां का आम बगीचा को नष्ट किया जा रहा है। जिसे देखते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री तक को भी पर्यावरण संरक्षण के लिए चिट्ठी लिखी थी। जिसके बाद कलेक्टर ने तहसीलदार अर्जुंदा को आदेशित किया था कि 7 दिन के भीतर जो शिकायत आ रही है उस पर कार्यवाही करें । लोकेंद्र साहू ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में जिक्र किया था कि रौना गांव ताँदुला नदी के किनारे बसा है। जहां आम बगीचा पूर्वजों द्वारा लगाया गया है। वर्तमान में लकड़ी ठेकेदार द्वारा उक्त आम फलदार वृक्ष को काटने/ हटाने का प्रयास कई तरीके से किया जा रहा है। रात्रि के अंधेरे में जेसीबी मशीन से आम के पेड़ को जड़ खोदकर मिट्टी हटाया जाता है। पेड़ सूखकर गिरने के बाद गिरे पेड़ के नाम से काट दिया जाता है। एक पेड़ मां के नाम अभियान ने पूरे देश में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में क्रांति लाई है। ऐसे में इस प्रकार का षड्यंत्र पर्यावरण विरोधी है। कलेक्टर बालोद को निर्देशित कर इन बगीचों में आम के पेड़ की सर्वे कराकर पेड़ों का चिन्हांकित किया जाए और किसानों को पेड़ काटने/कटवाने पर सख्त निर्देश दिया जाए। उपरोक्त पेड़ों में टैग लगाया जाए ताकि लकड़ी ठेकेदार इन्हें काटने की कोशिश ना करें। उनके इस पत्र पर कलेक्टर द्वारा जांच के निर्देश दिए गए थे लेकिन संबंधित अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया । क्षेत्र के पटवारी और अन्य अधिकारी अब पेड़ कट जाने पर गोल-गोल जवाब देने लगे हैं।
