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घूमने लगे कुम्हारों की उम्मीदों के चाक, दिवाली पर दीयों से घर करेंगे रोशन, लाएंगे खुशहाली

इस गांव के कुम्हार 30  सालों से बना रहे मिट्टी के दीये

संजय कुमार साहू,अंडा/बालोद। दीपावली के नजदीक आते ही कुम्हार दीये बनाने के काम में तेजी से जुट गए हैं। उन्हें उम्मीद है कि इस बार उनकी दीवाली भी रोशन रहेगी। अंडा से 10 कि. मी. के दूरी पर बालोद जिले के ग्राम गुरेदा (डगंनिया) में  डेहर सिंह कुम्हार माता शांति बाई कुम्हार, छोटा भाई जागेश्वर कुम्हार,देव किशन राज बाई कुम्हार कुम्हार द्वारा इलेक्ट्रानिक चाक से मिट्टी के दीयों को बनाना शुरू हो गया है। यह काम वे लगभग 30 सालों से करते आ रहे। पर्व दीपावली नजदीक आ चुकी है। ऐसे मेें दूसरों के घरों को रोशन करने के साथ ही अपने घर भी खुशियां लाने की उम्मीदों से कुम्हारों का चाक घूमना शुरू हो गया है।

मिट्टी के दीयों की है अपनी परंपरा

दीपावली 20 अक्तूबर को मनाई जाएगी। दीप पर्व पर मिट्टी के दीयों से घर को रोशन करने की परंपरा सदियों पुरानी है। इसका अपना महत्व भी है। ऐसे में दीपावली के नजदीक आते ही कुम्हार दीये बनाने के काम में तेजी से जुट गए हैं। उन्हें उम्मीद है कि इस बार उनकी दीवाली भी रोशन रहेगी। मिट्टी के दीपक, मटकी आदि बनाने के लिए माता-पिता के साथ उनके बच्चे भी हाथ बंटा रहे हैं। कोई मिट्टी गूंथने में लगा है तो किसी के हाथ चाक पर मिट्टी के बर्तनों को आकार दे रहे हैं।

चाइनीज झालरों पर भारी पड़ेंगे स्वदेशी दीये

हालांकि पिछले कुछ समय में आधुनिकता के इस दौर में दीयों का स्थान बिजली के झालरों ने ले लिया है। ऐसे में कुम्हारों के सामने आजीविका का संकट गहरा गया है। चाइनीज झालरों ने इन कुम्हारों को और चोट पहुंचाई। इस कारण वर्ष भर इस त्योहार की प्रतीक्षा करने वाले कुम्हारों की दीवाली अब पहले की तरह रोशन नहीं होती है। इस बार सरकार स्वदेशी को बढ़ावा देने अपील कर रही, ऐसे में कुम्हार परिवारों में उम्मीद बनी हुई है कि इस साल अच्छा कारोबार होगा।

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