छत्तीसगढ़ के भाँचा राम..!!



सगा सोदर के नत्ता म भाँचा अउ बहिनी के नाव सबले आघु म आथे, हमर छत्तीसगढ़ म ममा अउ भाँचा के नत्ता ल सबले ऊपर रखे गेहे, हमर छत्तीसगढ़ म ममा भाँचा के कहानी मन घला प्रचलित हाबे, जइसे भगवान राजीवलोचन अउ भगवान कुलेश्वरनाथ दुनो ममा भाँचा के कहानी काकरो मुहू ले सुनेच होहु।।

हमर छत्तीसगढ़ म एक इहो प्रचलन हाबे की ममा ह चाहे उमर म बड़का राहय या छोटका, भाँचा के पाँव परे के रिवाज हे, एकर पाछु के कहानी इही हरे की भगवान श्री राम के माता कौशल्या देवी ह हमर छत्तीसगढ़ म ही जनम ले रिहिस, अउ छत्तीसगढ़ ल प्राचीन काल म दक्षिण कौशल नाम से जाने जाये, त माता कौशिल्या के मईके हमर छत्तीसगढ़ अउ कौशल्या के बेटा भगवान राम, तेन ढँग ले भगवान राम जी ह हमर छत्तीसगढ़ वाले मन के भाँचा होथे, अब खुद भगवान राम ह भाँचा हरे, त हमर दीदी मन के बेटा भगवान कस भाँचा ल पाँव छुआ के पाप के भागी नइ बनन।।

एक अउ लेख हे कि हमर छत्तीसगढ़ के सिहावा नगरी म जन्मे श्रृंगी ऋषि के नत्ता राजा राम अउ राजा दशरथ ले जुड़े हे, राजा दशरथ जी के बेटी शांता देवी अउ शांता देवी के पति रहिस श्रृंगी ऋषि, तेन ढँग ले राजा दशरथ के दमांद होथे संत श्रृंगी ऋषि जी ह।।

प्रभु राम जी के जनम धरे में संत श्रृंगी ऋषि के बड़का सहयोग हे, जब राजा दशरथ जी ल चौथा पन म घला संतान नइ मिलत रहिस, त राजा दशरथ जी अपन कुल गुरु ऋषि वशिष्ठ जी कर गिस अउ अपन मन के पीरा ल बताइस, तब ऋषि वशिष्ठ जी राजा दशरथ ल किहिस की आपके भाग म चार लइका के संयोग लिखाए हे, फेर एकर बर आप ल पुत्रेष्टि यज्ञ करे बर पड़ही।

त कुलगुरु वशिष्ठ ह पुत्रयेष्ठि यज्ञ के महिमा अउ शक्ति ल बताइस अउ जल्दी यज्ञ करे के सुझाव दिस, वो युग म पृथ्वी के एक मात्र सँत श्रृंगी ऋषि जी ल बस ये यज्ञ के विधि विधान पता रिहिस, ये उही संत श्रृंगी ऋषि हरे जेकर जनम हिरण के गरभ ले होय रिहिस, अउ ओकर पिता जी के नाम विभाण्डक रिहिस, सोमतीति अउ लछमन रेखा के मंत्र के आविष्कार घला श्रृंगी ऋषि ही करे रिहिस।।

तहाँ राजा दशरथ के बुलावा पाके श्रृंगी ऋषि महाराज ह अयोध्या म रहिके पूरा आठ दिन ले बिधि विधान ले पुत्रेष्टि यज्ञ के अनुष्ठान करिस, आठ दिन बाद हवन कुंड ले साक्षात भगवान अग्नि देव प्रकट होईस अउ एक चारु फल दिस जेन ह खीर के रूप म रिहिस, उही खीर ल खा के माता सुमित्रा लछमन अउ शत्रुहन ल, माता कैकेयी ह भरत ल, अउ माता कौशल्या ले राजा राम के जनम होईस, चारो भाई के जनम धरे ले अवधपुर म खुशहाली बगरगे।।

सिहावा के संत श्रृंगी ऋषि ग, महिमा तोर महान।
तोर किरिपा ल जनम धरय, राजा दशरथ घर संतान।।
तीनो रानी के झोली भरगे, रिहिस हे जेंन ह बिरान।
सोहर मंगल गावय सबो, अवध म जनम धरे भगवान।।

मोर गोठ पुरगे….,
त प्रेम से बोलो सियावर रामचंद्र की!! जय….

लिखईया – डुपेश कुमार (डुपु)
गाँव:- मोतिमपुर (कुंडेल)
त.:-मगरलोड जि.:-धमतरी
छत्तीसगढ़

You cannot copy content of this page