गांव में फैला है झोला झाप डाक्टरों का जाल, ग्रामीणों के सेहत और जीवन से कर रहे हैं खिलवाड़, विभागीय कार्रवाई ठंडे बस्ते में



सब्बीर रिजवी सिकोसा- बालोद जिला के गुंडरदेही ब्लॉक में इन दिनों अवैध क्लीनिकों व पैथोलॉजी लैब की भरमार लग गई है l जिनकी जांच कर विभागीय तौर पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई इन अवैध क्लिनिक व पैथोलॉजी लैब पर नहीं हुई है जिसके कारण क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरो की संख्या में भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है, जो क्षेत्र के लोगों की जान माल के साथ खिलवाड़ होता दिखाई दे रहा है l गुण्डरदेही ब्लॉक के सिकोसा सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध रूप से संचालित पैथोलॉजी लैब व अवैध क्लिनिको का मकड़ जाल फैला हुआ है l बगैर डिग्री तथा बिना विभागीय लाइसेंस के लोगों की जान माल के साथ झोलाछाप डॉक्टर खिलवाड़ कर रहे हैं, ऐसे बहुत से मामले क्षेत्र में सुनाई देते हैं जो झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज करवा कर किसी गंभीर समस्या में फंसे हुए हैं किंतु मामलो में अब तक शिकायत नहीं हुई है, इसलिए मामला दब जा रहा है l इन अवैध रूप से संचालित झोलाछाप डॉक्टरों की क्लीनिको में मरीजों की संख्या बढ़ रही है व ऐसे अवैध रूप से संचालित बगैर तकनीकी जानकारी के पैथोलॉजी लैब का संचालन धड़ल्ले से क्षेत्र में हो रहा है, जिस पर कार्रवाई करने की नितांत आवश्यकता है। जिससे आम जन जीवन को ऐसे झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज से मुक्ति मिलेगी व जान माल के होने वाले खतरों से लोगों को बचाया जा सकेl क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित इन क्लिनिको में बारीकी से यदि जांच की जाए तो इनके पास भारी मात्रा में दवाइयो का स्टॉक भी मिल जाएगा। सोचने वाली बात यह भी है कि इनके पास इन दवाइयां की सप्लाई आखिर कौन कर रहा है? क्या मेडिकल स्टोर्स वाले झोलाछाप डॉक्टरों को बगैर ड्रग लाइसेंस के भारी मात्रा में दवाइयो की सप्लाई कर रहे हैं ..? अगर इन झोलाछाप डॉक्टरों को मेडिकल वालों द्वारा दवाई की सप्लाई की जा रही है तो संबंधित विभाग समय समय पर निरीक्षण कर कार्रवाई करने से क्यों चुक रहा है? कुछ दवाइयाँ ऐसी है जो बिना एमबीबीएस डॉक्टर डिग्री के मिलता ही नहीं लेकिन वह दवाइयाँ और इंजेक्शन इन झोला छाप डॉक्टरों के पास आसानी से उपलब्ध हैं। ग्राम खेरूद (खुटेरी) में एक निजी मकान में शाम के समय में क्लीनिक का संचालन किया जा रहा है। खेरूद ग्राम के कुछ ग्रामीणों द्वारा बताया गया कि झोलाछाप डॉक्टर द्वारा शाम 4 से 8 तक गांव में अवैध क्लीनिक का संचालन किया जाता है। मिली जानकारी के अनुसार उक्त झोलाछाप डॉक्टर के पास ना ही तो किसी प्रकार की कोई डिग्री है, ना ही रजिस्ट्रेशन है। अब सवाल यह है कि घर में चल रहे अवैध क्लिनिक को आखिर किसका संरक्षण प्राप्त है l

गौरतलब है की गुण्डरदेही ब्लॉक के ग्राम काँदूल में ऐसे ही एक अवैध रूप से संचालित फर्जी डॉक्टर के इलाज से एक 40 वर्षीय युवक की जान चली गई थी, वैसे ही ग्राम सिकोसा में अवैध रूप से संचालित एक बंगाली दवाखाना है, जो बवासीर व भगंदर का गारंटी के साथ इलाज किए जाने का दावा कर लोगों की जान माल के साथ खिलवाड़ कर रहा है। उक्त दवा खाना भी फर्जी तथा अवैध है। जिस पर भी कार्रवाई किए जाने की आवश्यकता है l सिकोसा के उक्त क्लीनिक का ना ही स्वास्थ्य विभाग से रजिस्ट्रेशन है और ना ही उक्त डॉक्टर के पास किसी प्रकार की डिग्री है। फिर भी पिछले 10 वर्षों से धड़ल्ले से संचालित उक्त क्लीनिक की जांच कर विभाग द्वारा अब तक किसी भी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे स्वास्थ्य विभाग की निष्क्रियता सामने आ रही हैl बालोद जिले में झोलाछाप डॉक्टरों की इस तरह सक्रियता पर सवाल उठने लगे हैं तो विभाग की निष्क्रियता भी सामने आई है, ऐसे मामलों में विभाग स्वयं से संज्ञान लेकर कार्रवाई नहीं करता, ना ही निरीक्षण करता है। जिससे झोला छाप डॉक्टर के हौसले बुलंद है। सारे नियम कायदों को ठेंगा दिखाकर आज भी बालोद जिले के गांव गांव में ऐसे झोला छाप डॉक्टरों का जाल फैला हुआ है l जिले की कलेक्टर द्वारा अनुविभागीय अधिकारियों को उक्त क्लिनिको की जांच व अवैध रूप से संचालित दवाखानों व फर्जी डॉक्टरों पर कार्रवाई किए जाने का आदेश लिखित रूप में दिया जा चुका है बावजूद इसके अब तक अवैध रूप से संचालित किसी भी क्लीनिक व डॉक्टर के ऊपर ठोस कार्रवाई होती नहीं दिखाई दे रही है। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि जिले के उच्च अधिकारियों की पकड़ अपने मातहत कर्मचारियों पर नहीं है, जिसकी वजह से उनके आदेशों का उल्लंघन जिले में होता दिखाई दे रहा है l

क्या कहा अधिकारी ने ..

उक्त विषय को लेकर जब अनुविभागीय अधिकारी गुण्डरदेही प्रतिमा ठाकरे से बात की गई तो उनके द्वारा कहा गया कि एक क्लीनिक पर कार्रवाई हुई है, आगे भी अवैध रूप से संचालित फर्जी डॉक्टरों और उनके क्लिनिको पर कार्रवाई की जाएगी l

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