लंपी वायरस से प्रभावित मवेशियों के टीकाकरण हेतु स्काउट एंड गाइड डौंडी और मौर्य मंगल गौ सेवा समिति चला रही अभियान



बालोद/ डौंडी। डौंडी ब्लॉक में इन दिनों भारत स्काउट एवं गाइड और मोर्य मंगल गौ सेवा समिति संयुक्त रूप से मवेशियों को लंपी वायरस से बचाने के लिए टीकाकरण का अभियान चला रही है। इस अंतर्गत अवारी नाला स्थित गौशाला में पहुंचकर टीकाकरण किया गया जिसमें विशेष सहयोग भारत स्काउट गाइड संघ डौंडी से तनुजा बंजारे (गाईड कैप्टन), गाईड चमेली एवं मौर्य मंडल गौ सेवा समिति से निखिल अग्रवाल , टिकेंन्द्र ठाकुर, निलेश वैष्णव, हेमंत दामले, रॉबिन चौहान, नवीन शर्मा , राहुल गौराई , आदि का विशेष सहयोग रहा।

इस दौरान छगन यदु जी गौशाला समिति ने बताया कि लोग गाय पालन से धीरे धीरे दूरी बना रहे हैं। कई स्थानों पर चारा गाह की कमी होना भी जानकारी दी।

क्या है लंपी वायरल

लंपी वायरस एक वायरल त्वचा रोग है जो मुख्य रूप से मवेशियों को प्रभावित करता है और मच्छरों और मक्खियों जैसे खून चूसने वाले कीड़ों से फैलता है. इसके शुरुआती लक्षणों में मवेशियों को बुखार, शरीर पर गांठें बनना और दूध उत्पादन क्षमता में कमी शामिल है. इस बीमारी से बचाव का एकमात्र प्रभावी तरीका टीकाकरण है, और संक्रमित जानवरों को अलग रखना महत्वपूर्ण है.

लंपी वायरस के लक्षण

तेज बुखार आना, शरीर पर, खासकर चेहरे और गर्दन पर, कठोर गांठे बनना, पैरों में सूजन और लंगड़ापन,आंखों और नाक से पानी आना,भोजन में अरुचि,वजन कम होना और सुस्त रहना,दूध उत्पादन में कमी आदि लक्षण हैं।

फैलने का तरीका

मच्छरों, मक्खियों और अन्य खून चूसने वाले कीड़ों के काटने से
संक्रमित जानवरों के सीधे संपर्क से फैलता है।

बचाव और उपचार

टीकाकरण: लंपी स्किन डिजीज से बचाव के लिए सबसे प्रभावी तरीका टीकाकरण है. भारत में गोट पॉक्स वैक्सीन (बकरी पॉक्स वैक्सीन) का इस्तेमाल किया जाता है.

आइसोलेशन: संक्रमित जानवरों को अन्य स्वस्थ जानवरों से अलग रखना बहुत जरूरी है.

पशु चिकित्सक से संपर्क: किसी भी लक्षण दिखने पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए.
लक्षण-आधारित उपचार: अभी तक कोई विशिष्ट इलाज नहीं है, इसलिए एंटीबायोटिक्स और एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाओं का उपयोग लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है.

महत्वपूर्ण बातें

लंपी वायरस मुख्य रूप से मवेशियों (गाय, भैंस) में होता है.
यह एक अधिसूचित बीमारी है, जिसका अर्थ है कि इसका पता चलने पर इसे तुरंत रिपोर्ट किया जाना चाहिए.

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