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दशहरा विशेष- तालाब में रावण को तैरा कर करते हैं दहन, सिरसिदा में 1994 में जारी है अनूठी परंपरा

इस बार भी 40 फीट ऊंचे रावण का पुतला है तैयार, भव्य आतिशबाजी के साथ होगा दहन आज

गुण्डरदेही /अंडा- (संवाददाता संजय कुमार साहू की विशेष रिपोर्ट)

तालाब में तैरते हुए 40 फीट ऊंचा रावण का पुतला, भव्य आतिशबाजी और हजारों की उमड़ी भीड़ यह सब आज रात सिरसिदा गांव के तालाब में दिखेगा। राक्षसों के जमीन अथवा आसमान में नहीं मरने जैसे चतुराई वाले वरदानों के किस्से जरूर सुने होंगे। 2 अक्टूबर को गुण्डरदेही ब्लॉक के अंतिम छोर पर बसे ग्राम सिरसिदा में ऐसा ही कुछ रोचक रोमांच भरा नजारा देखा जा सकता है। अंडा से 7 कि. मी. दूरी व बालोद जिला  मुख्यालय से अंतिम छोर 40 किमी दूर जिले के ग्राम सिरसिदा में दशहरा पर जमीन अथवा आसमान में नहीं बल्कि तालाब के बीचोबीच तैरते हुए रावण का दहन किया जाता है। रावण दहन के दौरान तालाब के बीच आकर्षक अतिशबाजी भी होती है। गांव के कुछ लोगों का अलग करने का शौक/ जुनून और अब तालाब के बीच रावण दहन की परंपरा आगे बढ़ रही है। 27 वर्षों से इसी तरह से ग्रामीण 40 फीट का पुतला का भव्य आतिशबाजी के साथ दहन करते आ रहे। आज दशहरा के दिन 2 अक्टूबर पर गांव के तालाब में यह आयोजन रखा गया है। रावण के पुतले को तालाब के बीच में पानी के ओर खड़े कर विशेष तकनीक से तीर चलाते हुए श्री राम की वेशभूषा में कलाकार द्वारा पुतला दहन का कार्यक्रम होगा। ग्रामीणों ने इसे अब परंपरा बना लिया है और आने वाली पीढ़ी भी इसी के अनुसार दशहरा मनाने को तैयार है। कार्यक्रम में अतिथि गण अध्यक्ष जनपद पंचायत गुण्डरदेही पुरुषोत्तम चंद्राकर, ग्राम पंचायत सिरसिदा सरपंच सरस्वती इन्द्रजीत चंद्राकर, सिरसिदा के समिति के अध्यक्ष कुलेश्वर प्रसाद देवांगन, उपाध्यक्ष अक्षय चंद्राकर, सचिव नेलशन देवांगन, सदस्य खेमन, प्रहलाद, लवण, रामगोपाल, चंद्र प्रकाश, ढालसिंह, टोमेन्द्र, डोगेन्द्र, बालगोविंद, तोरण गिरधर, प्रेमलाल, धर्मराज, खिल्लू, गुलाब, कोमेंद्र, रितेश, जितेश्वर, तानु देवेन्द्र , छन्नु धन्ना, गौरव, यशवंत, चंदन, आशीष, तुलेश्वर, रामकृष्ण, मिलन, दीपक, खिलेंद्र आत्मा साहू लक्ष्मण चंद्राकर आदि ने बताया कि कुछ अलग करने के जुनून में वर्ष 1994 में पहली बार तालाब के बीच रावण का पुतला खड़ा कर जलाया गया था। शुरुआत के कुछ सालों को छोड़ कर हर बार 40 फीट का पुतला जलाया जा रहा है। पूर्व सरपंच खेमन लाल चन्द्राकर सहित समिति के सदस्यों ने बताया कि रात्रि कालीन 11 बजे छत्तीसगढ़ी कार्यक्रम  रंग मया कोड़ेवा की प्रस्तुति होगी।

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