“नवरात्रि विशेष : बंजारी धाम जुंगेरा की गाथा”



​बलौद जिला मुख्यालय ले राजनांदगांव रोड म चार किलोमीटर दूरिहा जुंगेरा गांव म बंजारी मैया के मंदिर लोगन के आस्था के बड़े केंद्र आय। ये मंदिर अपन चमत्कार के सेती तीर तार में लोगन के बीच चर्चा म रहिथे।
​किहे जाथे के बहुत साल पहिली, जब रद्दा बने नई रहिस, त बंजारा मन अपन बड़-बड़ व्यापारिक काफिला लेके बहुत दूर तक जावत रहिन। जुंगेरा के ये जगा तब बड़ भारी जंगल रीहिस, ये जगा उंकर बर एक जरूरी पड़ाव रहिस। अपन यात्रा के सफलता अउ सुरक्षा बर, ओ मन अपन कुलदेवी बंजारी मैया के एक ठन पत्थर के मूरती ला एक चौंरा म रखिन। ये जगा जल्दीच लोगन के आस्था के केंद्र बनगे।

​चमत्कारिक घटना
​ये मंदिर जब ले बने हे, तब ले अपन दैवीय शक्ति के सेती जाने जाथे। सियान मन बताथें के दुपहरिया के बखत बंजारी मैया अपन पूरा लाव-लश्कर के संग गांव के शीतला मंदिर के तरिया म नहाए बर जावत रहिन। ये बेरा जउन भी रद्दागीर ओ रद्दा म रेंगत रहिन, ओ मन जड़वत हो जावत रहिन। लोगन देवी के ये चमत्कारिक रूप ला देख के डर अउ श्रद्धा ले भर जावत रहिन। ये चमत्कार मन ले आस-पास के गांव म बंजारी मैया के ऊपर लोगन के आस्था दिन-ब-दिन बढ़त गइस।

​मंदिर के निर्माण अउ साधु-संत के आगमन
​जइसे-जइसे देवी के ख्याति फइलत गइस, लोगन के आस्था घलोक गहिर होत गइस। 1970 के दशक म, गांव के मन आपस म चंदा इकट्ठा करके सबके सहयोग ले एक ठन मंदिर बनवाइन। मंदिर बने के बाद इहाँ दूरिहा-दूरिहा ले साधु-संत मन आय लगे अउ रुके लगे, जेकर ले ए जगा के आध्यात्मिक ऊर्जा अउ बाढ़त गइस।
​आज ए मंदिर सिर्फ पूजा करे के जगा नई ये, बल्कि आस-पास के लगभग दस-बारह गांव के मनखे मन के मति पुकाए अउ उंकर आस्था के एक ठन मजबूत केंद्र आय। ए कहानी हमन ला बताथे के कइसे एक ठन माटी के चौंरा म रखे एक सामान्य मूरती, अपन दैवीय शक्ति अउ भक्त मन के अटूट आस्था के वजह ले एक पूजनीय तीर्थस्थल बनगे। ये जगा मं श्रद्धालू अपन परिजन के सुरता अउ मनकामना पूरा करे के बाद मंदिर बनवाय हे चैत अउ कुवॉंर नवरात्रि में इहॉं आस्था के जोत जलथे। आज ए जगा म छत्तीसगढ़ के दुरिहा दुरिहा के श्रद्धालू मन के सहयोग ले बड़े मंदिर बन गे हवे, अब इहॉं सैकड़ों के संख्या म जोत कलश स्थापित करे जाथे। जुंगेरा गांव के मनखे मन अपन पुरखा मन के परंपरा के रक्षा करके ओला संजो के रखे के जउन कोसिस करे हें, ओ बहुत तारीफ़ के काबिल हे। आज भी ए मंदिर मनखे मन के मनकामना पुकाए के केंद्र आय।

लेखक : डॉ.अशोक आकाश कोहंगाटोला बालोद

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