नवरात्रि विशेष : पंडित के स्वप्न में आकर माता ने दिया मंदिर बनाने का आदेश, बनेगी अब बालोद जिले में भी दंतेवाड़ा की तर्ज पर मां दंतेश्वरी का मंदिर



खुर्सीपार में हो रहा मंदिर निर्माण, मूर्तियां हो रही है ओडिशा में तैयार

बालोद- आज से क्वांर शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो रही है। लोग माता की आराधना में जुट जाएंगे। इस नवरात्रि विशेष के पहले दिन हम बालोद जिले के ग्राम खुर्सीपार (मनौद ) में बन रहे एक खास मंदिर से परिचय करवा रहे हैं। जो आने वाले में समय में बालोद जिले का दंतेश्वरी मंदिर कहलाएगा। यहां पर छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध दंतेवाड़ा की दंतेश्वरी मंदिर की तर्ज पर हूबहू आकृति में दंतेश्वरी मंदिर बनवाया जा रहा है। यह निर्माण इसी गांव के एक महाराज कथावाचक राजा पांडेय के द्वारा यजमानों और श्रद्धालुओं के सहयोग से किया जा रहा है। राजा महाराज मां दंतेश्वरी के परम भक्त हैं। बचपन से ही उनका जुड़ाव दंतेश्वरी माता से रहा है। जिस तरह दंतेश्वरी मंदिर दंतेवाड़ा में मूर्तियां विराजित हैं, उसी की तरह पर उसी आकृति में मूर्तियां तैयार हो रही है। मूर्तियों का निर्माण ओडिसा के एक गांव में हो रहा है। जो विशेष तरह के लाल कुंवारी पत्थर से बनाए जा रहे हैं।

सपने में आई थी माता इसलिए बनवा रहा मंदिर

पंडित राजा महाराज ने कहा कि वे 2006 से मां दंतेश्वरी से भक्त हैं। वे एक कथावाचक भी हैं। उनका कहना है कि स्वप्न में मां दंतेश्वरी आई थी। उन्होंने मंदिर बनवाने का आदेश दिया है। उनके आदेश को पूरा करते हुए में दंतेश्वरी मंदिर बनवा रहा हूं। देवउठनी तक निर्माण पूरा हो जाएगा।

लाल से काली हो जाती है पत्थर

इस पत्थर की खासियत यह है कि जब इन पत्थरों में आकृति उकेरी जा रही है तो वह लाल रंग की होती है लेकिन धीरे-धीरे पत्थरों का रंग बदलकर काला हो जाता है। जैसा कि मां दंतेश्वरी की मूर्ति है। पंडित राजा महाराज ने बताया कि यजमानो के सहयोग से मंदिर का निर्माण शुरू हो गया है । कोई श्रद्धालु गिट्टी तो कोई ईट, रेत आदि अपनी ओर से दे रहे हैं तो कोई आर्थिक सहयोग कर रहे हैं। विशेष कुंवारी पत्थर से मूर्तियों का निर्माण किया जा रहा है। स्थानीय लोगों की मान्यताओं की बात करें तो जिन पत्थरों से मूर्ति का निर्माण हो रहा है उन्हें लोग चमत्कारी मानते हैं। वह इसलिए क्योंकि जब पत्थर को खदान से निकाला जाता है तो एक 3 फीट का पत्थर भी काफी हल्का होता है। जिसे हम एक हाथ से ही उठा सकते हैं। पर जब उसमें देवी देवताओं की आकृति तराशी जाती है तो उसका वजन अपने आप बढ़ जाता है और जिसे एक हाथ से उठा सकते थे उसे सात लोगों को मिलकर उठाना पड़ता है।

2023 में राजा महाराज ने रखवाया था गांव में जात्रा पर्व

लोकार्पण में जात्रा देव का कार्यक्रम भी रखा गया है। 2023 में राजा पांडेय द्वारा ही खुर्सीपार में बालोद जिले का प्रसिद्ध जात्रा उत्सव का आयोजन किया गया था जिसमें अंतागढ़, बस्तर, बीजापुर, नारायणपुर सहित वनांचल के बैगा साधु अपने-अपने देवी देवताओं, आंगा देव के साथ एकत्रित हुए थे। जात्रा के उक्त उत्सव में एक बैगा के रूप में वर्तमान सांसद भोजराज नाग तक भी आए थे। वैसा ही भव्य आयोजन खुर्सीपार के दंतेश्वरी माता मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर होना है। बालोद जिले का यह पहला मां दंतेश्वरी मावली माता मंदिर कहलाएगा, जहां स्थापित की जाने वाली मूर्तियों को ओडिशा के कारीगर बना रहे हैं। हूबहू दंतेवाड़ा में बने मंदिर की डिजाइन में ही यह मंदिर बनाया जाएगा। दंतेश्वरी दंतेवाड़ा के मंदिर में सागौन की लकड़ियां लगाई गई है जो बालोद जिले में संभव नहीं है इसलिए लकड़ियों की जगह लोहे के पाइप से बाहरी सजावट की जाएगी जो कि दंतेवाड़ा के मंदिर के तर्ज पर ही होगा। पंडित राजा महाराज ने कहा कि देवउठनी के बाद स्थापना की तैयारी चल रही है। जल्द से जल्द निर्माण पूरा हो इसके लिए ज्यादा से ज्यादा लोगों से सहयोग की अपील की गई है। दंतेवाड़ा की तर्ज पर मंदिर की छत तैयार करने के लिए बालाघाट से तीन-तीन फीट के आकार का विशेष तरह का खपरैल मंगाया गया है। यह मंदिर बनने के बाद लोगों को बालोद जिले में ही दंतेश्वरी, मावली माता के दर्शन हो सकेंगे। जो लोग दंतेवाड़ा नहीं जा पाते हैं उन्हें अपनी माता के दर्शन की मुराद पूरी करने के लिए खुर्सीपार में ही सुविधा मिल जाएगी।

दंतेश्वरी माता का संक्षिप्त इतिहास

दंतेवाड़ा का दंतेश्वरी माता मंदिर का निर्माण 14वीं सदी में चालुक्य राजाओं ने दक्षिण भारतीय वास्तुकला से बनावाया था। कहते हैं कि यहां पर देवी सती के दांत गिरे थे। यहां देवी की षष्टभुजी कालें रंग की मूर्ति स्थापित है। छह भुजाओं में देवी ने दाएं हाथ में शंख, खड्ग, त्रिशूल और बांए हाथ में घटी, पद्घ और राक्षस के बाल धारण किए हुए हैं। मंदिर में देवी के चरण चिन्ह भी मौजूद हैं।

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