डीबी डिजिटल मीडिया बालोद । छत्तीसगढ़ प्रदेश एनएचएम कर्मचारी संघ के आह्नान पर सरकार के बेरुखी एवं अड़ियल रवैया से परेशान कर्मचारियों ने इस बार आंदोलन को अनिश्चित कालीन करने का निर्णय लिया हैं। 15 अगस्त 2025 को सरकार की ओर से मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे नाराज कर्मचारी आज से प्रदेशभर के 16,000 से अधिक एनएचएम कर्मचारी अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार एवं काम बंद,कलमबंद हड़ताल करेंगे। इस बार संघ ने एसएनसीयू में विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (Special Newborn Care Unit) सहित आपातकालीन सेवा भी बंद रहेंगा आपातकालीन सेवाओं को भी पूर्णतः बंद रखने का निर्णय लिया है। इस संबंध में संघ द्वारा शासन को पूर्व में ही सूचना दे दी गई है। इसी क्रम में सोमवा से बालोद जिला मुख्यालय बालोद बस स्टैंड में NHM कर्मचारियों द्वारा अनिश्चितकालीन हड़ताल किया जा रहा है जिसमें जिला अध्यक्ष खिलेश साहू,संरक्षक दिनेश खर्कवाल ,उपाध्यक्ष प्रेम कुमार यादव, महिला विंग झरना नामदेव, CHO प्रकोष्ठ से श्रीमती दिव्या जगनायक, RBSK से डॉ इंद्र चंद्राकर, बीपीएम प्रकोष्ठ से योगेश साहू सहित NHM की सभी कर्मचारी उपस्थित रहे। हड़ताल की शुरुआत में दिवंगत साथियों को श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई।
क्या है एनएचएम कर्मचारियों की प्रमुख मांगे
संविलियन/स्थायीकरण,पब्लिक हेल्थ कैडर की स्थापना, ग्रेड पे का निर्धारण,कार्य मूल्यांकन व्यवस्था में पारदर्शिता,लंबित 27% प्रतिशत वेतन वृद्धि, नियमित भर्ती में सीटों का आरक्षण,अनुकम्पा नियुक्ति,मेडिकल एवं अन्य अवकाश की सुविधा,स्थानांतरण नीति, न्यूनतम 10 लाख कैसलेश चिकित्सा बीमा आदि मांगे हैं।
20 वर्षों की सेवा, फिर भी उपेक्षा
एनएचएम कर्मचारी विगत 20 वर्षों से प्रदेश के सुदूर अंचलों से लेकर प्रमुख शासकीय संस्थानों में स्वास्थ्य सेवा की रीढ़ बने हुए हैं। कोविड-19 महामारी जैसे संकट में भी इनकी भूमिका अतुलनीय रही है। इसके बावजूद, आज भी उन्हें मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा गया है, जबकि अन्य राज्यों में इसी मिशन के कर्मचारियों को बेहतर सुविधाएं प्राप्त हैं।
राजनीतिक समर्थन और अब की उपेक्षा
संघ के प्रदेश प्रवक्ता पूरन दास ने बताया कि मौजूदा सरकार के कई वरिष्ठ नेता – जैसे- विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उपमुख्यमंत्री अरुण साव, विजय शर्मा,वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी व वन मंत्री केदार कश्यप सहित बड़े नेताओ ने पूर्व में एनएचएम कर्मचारियों के मंचों पर आकर समर्थन देते रहे हैं। यहां तक कि “मोदी की गारंटी” में नियमितीकरण का वादा भी किया गया था। बावजूद इसके, पिछले 20 माह में 160 से अधिक बार ज्ञापन व आवेदन देने के बाद भी सरकार की ओर से कोई समाधान नहीं निकल पाया।अब कर्मचारी आंदोलन के लिए बाध्य हैं। सरकार से आग्रह है कि वह तत्काल संवाद स्थापित करे, जायज़ मांगों पर निर्णय ले, अन्यथा छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह बेपटरी हो सकती हैं, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी शासन की होगी।
