“गुरु” एक कविता मोना रावत की कलम से.. 

“अंधेरे जीवन में हमारे
नया सवेरा लाते हैं
उनकी ऊंची शान है
वह गुरु कहलाते हैं ।।

तरह-तरह की शिक्षा देकर
काबिल इंसान बनाते हैं
उनकी अपनी एक अलग पहचान है
गुरु वह कहलाते हैं।।

 सही-गलत और सच-झूठ का
पाठ भी वह पढ़ाते हैं
उनका सर्वोत्तम स्थान है
 गुरु वह कहलाते हैं ।।

आदर्श सच्चाई की राह पर
चलना वह सिखाते हैं
 वह तो एक चमत्कार से हैं
 पारस वह कहलाते हैं ।।

गुरुकुल में शिक्षा लेकर हम
 सीखते संस्कार है
गुरु चेलों के बीच पिता-बेटा
 जैसा प्यार है
आदर-सत्कार ,परिवार का
 ज्ञान जो करवाते हैं
 वह गुरु कहलाते हैं “।।
       धन्यवाद

मोना रावत
शिक्षिका
शास.पूर्व माध्य.शा.मरदेल (डौंडी)
जिला बालोद

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