जगन्नाथपुर और सांकरा के बीच सरहद को लेकर छिड़ा विवाद, सांकरा के ग्रामीणों का आरोप जगन्नाथपुरवासी कर रहे हैं हमारे गांव की जमीन पर कब्जा, करने लगे घेराबंदी,तहसीलदार के हस्तक्षेप के बाद रुकवाया काम



मामला अभी नहीं हुआ है शांत, 2 दिन के भीतर स्कूल मैदान से सारे कब्जे हटाने दोनों पंचायत प्रशासन को दिए हैं तहसीलदार ने निर्देश

बालोद । बालोद जिले के ग्राम जगन्नाथपुर और पड़ोसी गांव सांकरा में सरहद जमीन को लेकर विवाद छिड़ गया है। मामला उस वक्त तुल पकड़ा जब जगन्नाथपुर और सांकरा के बीच सीमा पर कई लोगों द्वारा स्कूल के मैदान में अवैध कब्जा कर लिया गया और जिसे सुरक्षित करने के लिए सांकरा पंचायत प्रशासन द्वारा सीमेंट के खंभे और कटीले तार लगाकर जगह को सुरक्षित करने का प्रयास किया गया। इस बीच जगन्नाथपुर के दो ग्रामीणों के घर का आवागमन बाधित हो रहा है। जिससे उक्त ग्रामीणों का कहना है कि हमें आने जाने के लिए रास्ता दिया जाए। अगर घेराबंदी की गई तो हमें चलने में दिक्कत होगी।

पर सांकरा पंचायत प्रशासन का कहना है कि हम अपनी जगह को सुरक्षित कर रहे हैं। जगन्नाथपुर पंचायत प्रशासन जाने कि वे अपने गांव के निवासियों को किधर से आवागमन के लिए सुविधा देंगे। यह भी जानकारी मिली कि पूर्व में जो भी आबादी के तहत वहां निवास किए, उनके लिए आवागमन के लिए गली था। लेकिन आज के दौरान वहां अवैध निर्माण हो चुका है और रास्ते बंद हो गए हैं। ऐसे में उक्त दो मकान के निवासियों के लिए आने जाने का रास्ता सांकरा की जमीन की ओर से है। तो सांकरा और जगन्नाथपुर के बीच स्थित स्कूल मैदान में कई लोगों द्वारा अवैध कब्जा करके सब्जी बाड़ी का निर्माण तो कोई ईट, पत्थर, रेत आदि का भंडारण कर सरकारी जमीन पर बेजा कब्जा किए हुए हैं तो वहीं गंदगी का आलम भी है। जबकि पास में ही सांकरा का आंगनबाड़ी केंद्र भी संचालित है। आसपास पूरा कचरे का ढेर है। शनिवार को जब सुबह सांकरा के लोगों द्वारा सीमा पर गड्ढे खोदकर खंभा गड़ाने का प्रयास किया गया तो विवाद छिड़ गया। सांकरा और जगन्नाथपुर दोनों गांव के निवासी आमने-सामने आ गए। मामले में माहौल बिगड़ता देख जनपद सदस्य पति सुभाष हरदेल ने तहसीलदार को सूचित किया। तहसीलदार आशुतोष शर्मा मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों को समझाइश दी गई और जो घेराबंदी की जा रही थी उसे जनपद सीईओ से बात करके रुकवाया गया। तहसीलदार का कहना था कि इस तरह से घेराबंदी नहीं कर सकते, जब तक कोई विशेष कारण ना हो ।तो वही सांकरा सरपंच लता चुरेंद्र का कहना था कि हम अपनी सीमा क्षेत्र के सरकारी जमीन को अवैध कब्जा से बचाना चाहते हैं। स्कूल मैदान को सुरक्षित करने के लिए हम घेराबंदी कर रहे हैं और अवैध कब्जा को रोकने के लिए यह जरूरी भी है। तो वही जगन्नाथपुर की सरपंच देव कुंवर कोसमा का कहना था कि सीमांकन हो जाए, किसकी जमीन कहां तक है यह तय हो जाए और किसी का आवागमन बाधित न हो इस तरह से सुलह करते हुए रास्ता निकालकर काम होना चाहिए। इस तरह सीमा पर घेराबंदी किए जाने से विवाद और बढ़ेगा और दोनों गांव के बीच तनाव की स्थिति निर्मित हो सकती है। तहसीलदार ने भी दोनों पक्षों को आश्वस्त किया कि सुलह करिए और अवैध कब्जा हटाइए। दोनों सरपंचों को जिम्मेदारी दी गई कि एक-दो दिन के भीतर जितने भी स्कूल मैदान में अवैध कब्जे दिख रहे वह साफ होना चाहिए। उसके बाद जनपद प्रशासन मामले की जांच कर अगर वहां बाउंड्री वॉल या अस्थाई घेरा बनाने की जरूरत पड़ती है तो आदेश करेगी तभी सांकरा पंचायत आगे काम करेगी। तब तक के लिए फिलहाल काम को तहसीलदार ने रुकवा दिया है। इधर ग्रामीणों का कहना है कि दोनों गांव की सीमा सरहद को लेकर काफी विवाद है। इसके पहले भी तीन से चार बार सीमांकन हो चुका है। हर कोई अलग जानकारी बताते हैं। ऐसे में अस्पष्ट जानकारी के चलते सीमा का निर्धारण नहीं हो रहा है। सांकरा पंचायत प्रशासन द्वारा जिस तरह से नाली के किनारे घेराबंदी की जा रही है वैसे में तो जगन्नाथपुर का स्कूल, पानी टंकी तक भी उनके दायरे में आ जाएगा। जबकि वह पूर्व के रिकॉर्ड के अनुसार जगन्नाथपुर के जमीन पर ही बना हुआ है। मामला पूरी तरह से विवादित हो सकता है। अगर प्रशासन इसमें जल्द सुलह नहीं करते हैं आगे विवाद और बढ़ने की आशंका है। वर्तमान में सीमा को लेकर छिड़े विवाद से दोनों गांव में तनाव की स्थिति बनती दिख रही है। तहसीलदार और पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में फिलहाल घेराबंदी पर रोक लगाया गया है। आगे क्या होगा अभी कुछ कहा नहीं जा सकता है। दोनों गांव के बीच सुलह करने का प्रयास प्रशासन भी कर रही है तो पंचायत प्रशासन भी चाहते हैं कि मिलजुल कर रहे। किसी को कोई परेशानी ना हो । पर जो भी हो, नियम से हो। अवैध कब्जा कोई भी पंचायत अपने दायरे में बर्दाश्त नहीं करना चाहते हैं। तो वही तहसीलदार ने कहा है कि जो भी अवैध कब्जा किया है, उन्हें तत्काल हटवाइए। मौके पर एक ग्रामीण द्वारा बाड़ी का निर्माण कर दिया गया था। जिसे पहले भी नोटिस दिया जा चुका था। जो तहसीलदार के आने से पूर्व और घेराबंदी किए जाने पर स्वयं से कब्जा हटाने में जुटा रहा। हालांकि अन्य लोगों ने अभी तक वहां से कब्जा नहीं हटाया है। कई लोगों ने वहां पूरा कचरा डालने के लिए ढेर (घुरवा) बना रखे हैं तो कई लोगों द्वारा निर्माण सामग्री का स्टॉक तक किया गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page