सांकरा की ओस जल फैक्ट्री विवादों में घिरी, पानी की गुणवत्ता पर उठे सवाल, 15 दिन के भीतर दो बार निरीक्षण और जांच में पहुंची टीम फिर भी नहीं सुधरी व्यवस्था



गंदगी का दिखा आलम ,अफसर ने लगाई संचालक और कर्मियों को फटकार

लिया गया पाउच, जार और बोतल में भरे पानी का सैंपल, जांच रिपोर्ट का है इंतजार

सुप्रीत शर्मा, बालोद। बालोद ब्लॉक के ग्राम सांकरा (करहीभदर) स्थित ओस जल फैक्ट्री इन दिनों विवादों में घिरी हुई है। फैक्ट्री से सप्लाई किए जा रहे पानी की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों ने सवाल खड़े किए हैं। शिकायत के बाद खाद्य विभाग की टीम ने फैक्ट्री का निरीक्षण कर पानी के नमूने लिए हैं, जिनकी रिपोर्ट का फिलहाल इंतजार किया जा रहा है। बड़ी बात यह है कि 15 दिन के भीतर दो-दो बार यहां खाद्य विभाग की टीम जांच के लिए पहुंच चुकी है। लेकिन पहले निरीक्षण के दौरान ही जो खामियां पाई गई थी उसे अब तक नहीं सुधारा गया है। जिसको लेकर दोबारा विभाग के अधिकारी 17 मई को जांच में पहुंचे थे। इस दौरान खाद्य सुरक्षा अधिकारी भारत भूषण पटेल ने संबंधित लोगों को कड़ी फटकार लगाई है तो वहां काम करने वाली महिलाओं को भी सख्त हिदायत दी है कि साफ सफाई पर पूरा ध्यान रखें। 15 दिन के भीतर यह दूसरा निरीक्षण था। पानी की क्वालिटी भीतर से कैसी है इसे जानने के लिए कुछ बंद बोतल, जार, पाउच आदि में भरे पानी के सैंपल लिए गए हैं। जिन्हें जांच के लिए रायपुर भेजा जाएगा। पूर्व में भी बोतल के सैंपल लिए गए थे। लेकिन रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। विभाग के अफसर ने संचालक को कड़ी फटकार लगाई है कि पूर्व में निरीक्षण के दौरान जो निर्देश दिए गए थे उसका अब तक पालन क्यों नहीं हुआ है। जहां पर पानी को साफ करने मशीनरी लगी हुई है उसी के नीचे पूरा गंदा पानी ठहरा हुआ है। जिससे दुर्गंध भी उठ रही थी। इसे देखकर अधिकारियों ने वहां काम करने वाले लोगों को भी चेताया कि ऐसा नहीं होना चाहिए। पानी ठहर रहा है तो उसे यहां से तत्काल साफ करना चाहिए। ना कि पूरे हफ्ते दिन तक पानी जमा रहे। इससे दुष्प्रभाव पड़ सकता है। इस तरह गंदे पानी का जमाव होना जल फैक्ट्री संचालन के मापदंडों के विपरीत भी है। लापरवाही पर लापरवाही बरतते हुए जल फैक्ट्री के संचालक द्वारा नियम कायदों को ताक पर रखकर संचालन किया जा रहा है।

जांच में सामने आईं ये खामियां

खाद्य सुरक्षा अधिकारी भारत भूषण पटेल ने पुष्टि की है कि जांच टीम ने हाल ही में दो बार फैक्ट्री का दौरा किया था। निरीक्षण के दौरान वहां पानी के ठहराव और साफ-सफाई की कमी पाई गई। अधिकारियों ने फैक्ट्री संचालक को आवश्यक सुधार के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि पानी की गुणवत्ता का निर्धारण केवल सामान्य आंखों से देखकर संभव नहीं है, इसलिए सैंपल जांच के लिए रायपुर कालीबाड़ी स्थित प्रयोगशाला भेजे गए हैं, जिसकी रिपोर्ट 15 दिन में आने की उम्मीद है। नमूनों की संख्या ज्यादा होती है तो रिपोर्ट आने में देर भी हो जाती है।

ग्रामीणों की चिंता, स्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा

कुछ ग्रामीणों ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया कि फैक्ट्री मापदंडों को दरकिनार कर मनमानी की जा रही है और ग्रामीणों के भोलेपन का फायदा उठाकर निम्न गुणवत्ता का पानी सप्लाई किया जा रहा है। विशेष रूप से शादी-ब्याह जैसे आयोजनों में यहां से ही जल आपूर्ति होती है। ग्रामीणों को आशंका है कि इस पानी के पीने से स्वास्थ्य समस्याएं, जैसे पीलिया आदि का खतरा बढ़ सकता है। हाल ही में बालोद जिले में के ग्राम खुर्सीपार (गोड़ेला) में जिस तरह पीलिया का प्रकोप चल रहा है। उससे सांकरा करहीभदर सहित आसपास के निवासी और बालोद शहर के लोग जो उसी फैक्ट्री से पानी मंगवाते हैं, इस बात से दहशत में है कि कहीं इस फैक्ट्री से मिलने वाले पानी में अगर किसी तरह की अशुद्धि है तो उससे जल जनित बीमारी का शिकार ना हो जाए।

खाद्य अधिकारी ने क्या कहा?

इन 15 दिनों के भीतर दो बार उसी ओस जल फैक्ट्री का निरीक्षण किए जाने को लेकर जब हमने खाद्य सुरक्षा अधिकारी भारत भूषण पटेल से जानकारी ली तो उन्होंने कहा कि कुछ लोगों द्वारा उक्त फैक्ट्री के संबंध में शिकायत आई थी। जिसके कारण हम 17 मई को दोबारा जांच में गए थे। इसके पहले भी हमने रुटीन चेकअप किया था और वहां की कुछ अव्यवस्थाओं को लेकर निर्देशित किए थे कि सुधार करें और औचक निरीक्षण में आते रहेंगे । कुछ जगह पानी ठहरने और कीचड़ होने की शिकायत आई थी। जिस पर फैक्ट्री वालों का कहना है कि पानी को गाड़ी में लोड करने के लिए गाड़ी अंदर गोदाम तक आती है। जिससे टायर का कीचड़ वहां जमा हो जाता है ।वहीं पानी ठहरने को लेकर कहा गया है कि नीचे वाटर होस्टिंग सिस्टम लगा हुआ है, पानी धीरे-धीरे सोख लेता है। फिर भी हमने वहां ज्यादा दिनों तक पानी नहीं भरे रहने देने की हिदायत दी है। वही दोबारा जांच के लिए पानी के नमूने लिए गए हैं तो संचालक को फैक्ट्री संचालन से संबंधित जो भी सर्टिफिकेट हैं उनकी प्रतिलिपि सोमवार तक विभाग में जमा करने के लिए कहा गया है ताकि पूरी छानबीन हो सके। पानी की गुणवत्ता की पुष्टि रायपुर से रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगी। फैक्ट्री में जांच के दौरान की पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग भी साक्ष्य के तौर पर की गई है।

क्यों जरूरी हैं नियमों का पालन?

जार जल फैक्ट्रियों के संचालन के लिए केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा निर्धारित कई मानक होते हैं:

पर्यावरण संरक्षण: जल स्रोत का संरक्षण, शुद्धिकरण प्रक्रिया, और अपशिष्ट प्रबंधन अनिवार्य हैं।

पानी की गुणवत्ता: नियमित लैब टेस्ट, सुरक्षित पैकेजिंग सामग्री और साफ-सफाई आवश्यक है।

कर्मचारी सुरक्षा: श्रमिकों को उचित सुरक्षा उपकरण और प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।

लाइसेंसिंग: फैक्ट्री को वैध पंजीकरण और लाइसेंस प्राप्त होना अनिवार्य है।

लेबलिंग: प्रत्येक बोतल या जार पर गुणवत्ता, निर्माण और एक्सपायरी की स्पष्ट जानकारी होनी चाहिए।

सांकरा की यह जल फैक्ट्री अब जांच के घेरे में है। जब तक पानी की गुणवत्ता पर प्रयोगशाला रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक ग्रामीणों की चिंता वाजिब मानी जा सकती है। यह मामला ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित ऐसी अन्य जल फैक्ट्रियों की निगरानी और सख्ती की भी आवश्यकता को उजागर करता है।

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