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बालोद निवासी छात्र मोक्ष साहू ने पहले ही प्रयास में सैनिक स्कूल एग्जाम में पाई सफलता,300 में पाया 274 अंक, कट ऑफ क्लियर हुआ तो मिलेगा सैनिक स्कूल में एडमिशन

बालोद। जहां एक ओर 10वीं 12वीं में टॉप टेन में आने वाले बच्चों की सफलता की चर्चा हो रही है । तो दूसरी ओर बालोद के ही एक छात्र 11 वर्षीय मोक्ष साहू की सफलता भी सैनिक स्कूल एडमिशन एग्जाम पहले ही प्रयास में उत्तीर्ण करने को लेकर चर्चा में है। मूल रूप से बालोद के रहने वाले विनोद साहू एलआईसी विकास अधिकारी के सुपुत्र मोक्ष साहू जल्द ही सेना की पढ़ाई करने जाएगा। कम उम्र में ही उसने यह सफलता अर्जित कर ली है। जानकारी अनुसार फिलहाल मोक्ष बोरसी दुर्ग में रहकर पढ़ाई कर रहा। मोक्ष साहू ने अपने पहले ही प्रयास में सैनिक स्कूल का एग्जाम क्रैक किया है। पढ़ाई के साथ संगीत में भी मोक्ष की विशेष रुचि है । मोक्ष पियानों और तबला वादन में भी दक्ष है। ताइक्वांडो में रेड बेल्ट हो चुका है। जिला स्तरीय ताइक्वांडो में भी सिल्वर मेडल जीत चुका है। मोक्ष साहू पिता विनोद साहू अभी केंद्रीय विद्यालय सी आई एस एफ उतई भिलाई में पढ़ रहा है। उनके पिता विनोद विकास अधिकारी के पद पर बालोद एलआईसी मुख्यालय में पदस्थ हैं। हर राज्य में 1 सैनिक स्कूल है। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में एक मात्र सैनिक स्कूल है जहां आसानी से एडमिशन हो रहा है। मोक्ष का मार्क्स 300 में 274 आया है जो कि अच्छा मार्क्स है और पिछले कटऑफ को देखते हुए ऑल इंडिया रैंकिंग के हिसाब से छत्तीसगढ़ के बाहर दूसरे राज्य में भी उनके एडमिशन होने के चांस बन रहे हैं। जो 20 तारीख के बाद पूरी तरह से स्पष्ट होगा। अनुमान है कि 20 तारीख के आसपास रैंक और कटऑफ जारी हो जाएगा। फिर एडमिशन की प्रक्रिया शुरू होगी। मोक्ष की इस सफलता पर परिवारजनों सहित शुभचिंतकों और एलआईसी से जुड़े हुए सदस्यों ने मोक्ष और उनके पिता को शुभकामनाएं प्रेषित की है।

आसान नहीं होती है यह परीक्षा

देश में कुल 33 सैनिक स्कूल हैं. केंद्र सरकार ने देशभर में 100 नए सैनिक स्कूल खोलने की घोषणा की है. सैनिक स्कूल क्लास 6 और 9 में एडमिशन के लिए प्रवेश परीक्षा पास करना जरूरी है. इस एंट्रेंस एग्जाम का आयोजन राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी एनटीए करती है. अखिल भारतीय सैनिक स्कूल प्रवेश परीक्षा साल में एक बार होती है. इस साल यह परीक्षा 5 अप्रैल को हुई थी।

सैनिक स्कूल में किसे एडमिशन मिल सकता है?

सैनिक स्कूल राष्ट्रीय रक्षा एकेडमी (NDA) और भारतीय सशस्त्र बलों में करियर के लिए तैयार करने के उद्देश्य से स्थापित किए गए हैं.सैनिक स्कूल कक्षा 6 में एडमिशन के लिए स्टूडेंट की आयु 10 से 12 साल के बीच होनी चाहिए (1 अप्रैल को आधार मानकर), सैनिक स्कूल कक्षा 9 में एडमिशन के लिए आयु 13 से 15 साल के बीच होनी चाहिए। सैनिक स्कूल में पहले सिर्फ लड़कों को एडमिशन मिलता था, लेकिन अब कई सैनिक स्कूल लड़कियों को भी दाखिला दे रहे हैं. ऐसे स्कूल में एडमिशन के लिए भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है. कक्षा 6 के लिए, किसी मान्यता प्राप्त स्कूल से 5वीं पास होना चाहिए. तो कक्षा 9 के लिए, 8वीं कक्षा पास होना जरूरी है।

सैनिक स्कूल में सिलेक्शन कैसे होता है?

ज्ञात हो कि एनटीए हर साल ऑल इंडिया सैनिक स्कूल एंट्रेंस एग्जामिनेशन (AISSEE) का आयोजन करती है। कक्षा 6 और 9 में एडमिशन के लिए अलग-अलग परीक्षा होती है. इसमें गणित, सामान्य ज्ञान, भाषा और इंटेलिजेंस जैसे विषय शामिल होते हैं। परीक्षा में प्रदर्शन के आधार पर मेरिट लिस्ट तैयार की जाती है। मोक्ष अभी केंद्रीय विद्यालय में पांचवी कक्षा में अध्यनरत है।

साक्षात्कार और मेडिकल टेस्ट:

– लिखित परीक्षा में सफल होने वाले स्टूडेंट्स को इंटरव्यू और मेडिकल टेस्ट के लिए बुलाया जाता है.
– मेडिकल टेस्ट में शारीरिक फिटनेस और स्वास्थ्य मानकों की जांच होती है. लिखित परीक्षा, साक्षात्कार और मेडिकल टेस्ट के आधार पर फाइनल मेरिट लिस्ट बनती है, जिसके आधार पर एडमिशन मिलता है.

सैनिक स्कूल में स्टूडेंट्स को डिसिप्लिन, लीडरशिप स्किल और फिजिकल फिटनेस की ट्रेनिंग मिलती है, जो सशस्त्र बलों (Armed Forces) में करियर के लिए जरूरी है.CBSE सिलेबस के साथ एकेडमिक एक्सीलेंस पर फोकस किया जाता है. NDA और अन्य सैन्य परीक्षाओं में सैनिक स्कूल के स्टूडेंट्स का सिलेक्शन रेट ज्यादा होता है.खेल, एडवेंचर एक्टिविटीज और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए व्यक्तित्व का विकास होता है। कई राज्य सरकारें और रक्षा मंत्रालय मेधावी स्टूडेंट्स को स्कॉलरशिप प्रदान करते हैं. इससे फीस का बोझ कम होता है.सैन्य सेवाओं के अलावा, सैनिक स्कूल के स्टूडेंट्स सिविल सेवा, इंजीनियरिंग, चिकित्सा आदि क्षेत्रों में भी सफलता हासिल करते हैं.

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