भीषण गर्मी में बच्चों का समर क्लास, फेडरेशन ने जताया विरोध, की मांग: ग्रीष्मावकाश बंद कर अन्य कर्मचारियों की तरह मिले छुट्टियां



बस्तर/बालोद। छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा विभाग के द्वारा पूर्व नियोजित (घोषित) ग्रीष्मावकाश 30 अप्रैल से शुरू हो जाता है, किन्तु बढ़ते गर्मी को देखते हुए इस बार 25 अप्रैल से 15 जून तक बच्चों के लिए अवकाश की घोषणा कर दिया गया। वही एक ओर स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी के द्वारा एक फरमान जारी कर 44-45 डिग्री भीषण गर्मी में समर क्लास लगाने आदेशित किया जाता है। जिसमें कहा गया है यह ऐच्छिक है। छत्तीसगढ़ नियमित सर्व शिक्षक फेडरेशन इसका विरोध करते हुए कहा कि जब 25 अप्रैल को गर्मी अधिक होने से अवकाश दे दिया गया था तो क्या अब मई महीनें में ये गर्मी कम हो गया होगा। सचिव के द्वारा आदेशित ऐच्छिक समर क्लास को बस्तर जिले में कठोरता से पालन करने हेतु कलेक्टर एवं जिला परियोजना अधिकारी ने समय सारणी जारी कर आदेशित किया है। इस बात से सभी अवगत है,कि जिले में कार्यरत लगभग आधे से अधिक शिक्षक 300 से 500 किलोमीटर दूर के निवासी है। जो लगातार शैक्षणिक एवं गैरशैक्षणिक कार्यों के दबाव चुनाव, सर्वे कार्य, नियद नेल्लार सर्वे, जाति निवास जैसे कार्यों के चलते शिक्षक अपने घर नही जा पाते। शिक्षकों के लिए एक मात्र अवकाश ग्रीष्मावकाश ही होता है जिसमें शिक्षक अपने परिवार को समय दे पाता है। फेडरेशन का कहना है कि शिक्षकों का ग्रीष्मावकाश को बंद कर अन्य कार्यालयीन कर्मचारियों की तरह अर्जित अवकाश व शनिवार को अवकाश दिया जाए। वही बीते सत्र में एफएलएन प्रशिक्षण के दौरान कवर्धा जिले में भीषण गर्मी के चलते एक शिक्षक की मृत्यु हो गई थी।

You cannot copy content of this page