करंट की चपेट में आया बंदर, गौ सेवक सहित पार्षद सुमित शर्मा और साथियों ने बचाई जान, पशु चिकित्सा विभाग की लापरवाही आई सामने, नदारद मिले अस्पताल से डॉक्टर



बालोद । गुरुवार की रात को करीब 8.30 बजे बालोद के एलआईसी ऑफिस के पास एक बंदर करंट की चपेट में आ गया था। उक्त घटना को वहां मौजूद नेमीचंद साहू ने देखा। जिनका मकान घटनास्थल के पास ही है। बंदर को तड़पते देखकर उन्होंने गौ सेवा और समाज सेवा के लिए सदैव तत्पर रहने वाले गौ सेवक अजय यादव और सर्प प्रेमी जागेश्वर ढीमर उर्फ जग्गू को भी सूचना दी। इसके अलावा अन्य सेवा कार्यों में जुटे रहने वाले साथियों पार्षद सुमित शर्मा, राहुल सोनी, यश परचानी,विशाल माधवनी ,धर्मेंद्र आहूजा, गब्बर सोनी आदि भी घटना स्थल पर पहुंचे और काफी मशक्कत के बाद बंदर को करंट से बचाया गया। पर इस घटना के उपरांत पशु चिकित्सा विभाग की लापरवाही और उदासीनता देखने को मिली। गौ सेवकों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि इतनी बड़ी घटना हुई थी पर बंदर की जान बचाने और तत्परता से इलाज लेकर कोई भी गंभीरता नहीं दिखा रहा था। पशु चिकित्सालय में कोई भी जिम्मेदार डॉक्टर मौजूद नहीं थे और अफसरो को जब फोन किया जाता था तो कोई भी कॉल नहीं उठाया जाता था। एक पशु चिकित्सक टीडी देवांगन से गौ सेवक अजय यादव ने बात की पर वे भी आवश्यक कार्य से बाहर थे। उनके निर्देशन पर फोन से ही चर्चा कर गौ सेवकों ने प्राथमिक उपचार किया। रात में बंदर चलने की स्थिति में नहीं था। दवाई, मलहम पट्टी कर उक्त बंदर को नेमीचंद साहू के घर के पास छोड़ दिया गया था। इस घटना की जानकारी देने के लिए गौ सेवकों सहित पार्षद और युवाओं ने डीएफओ को भी कॉल किया। शुक्रवार को बंदर की हालत में थोड़ा सुधार आने के बाद उसे वन विभाग को सूचित कर पर्यावरण पार्क बालोद में छोड़ा गया।

पशु और वन्य प्राणी की सुरक्षा और चिकित्सा की हो उचित व्यवस्था

इस घटना से पशु एवं वन्य प्राणी की सुरक्षा और चिकित्सा को लेकर सवाल उठने लगा है। सरकार और पशु चिकित्सा विभाग गंभीर नजर नहीं आ रही है। इस घटना पर चिंता जाहिर करते हुए गौ सेवकों सहित युवाओं ने कहा कि वन मंत्री केदार कश्यप से हम अनुरोध और मांग करते हैं कि पशुओं को लेकर रोजाना कुछ न कुछ घटनाएं होती रहती है। इसलिए चिकित्सालय में स्टाफ या डॉक्टर होना चाहिए, जैसे इंसानों के अस्पतालों में व्यवस्था होती है। जिला स्तर के पशु चिकित्सालय में आपात स्थिति में डॉक्टर का ना होना लापरवाही और उदासीनता को उजागर करता है। चाहे शासकीय अवकाश हो या ना हो ,आपात स्थिति में कोई डॉक्टर आसपास होना चाहिए। जो व्यवस्था को संभाल सके। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

नगरवासियों से की गई बेजुबानों की मदद की अपील

साथ ही गौ सेवकों ने बालोद के सभी नागरिकों से अपील की है कि इस तरह की सेवा के लिए आगे और अपना सहयोग प्रदान करें। गौ सेवा, पशु पक्षी की सेवा किसी एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं, यह सभी की नैतिक जिम्मेदारी है। सभी नागरिकों से ऐसे बेजुबानों की मदद की गई है। ज्ञात हो कि गौ सेवक अजय यादव सहित उनकी टीम लगातार बेजुबानों की सेवा करती रहती है। तो वहीं युवा पार्षद सुमित शर्मा भी जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए हमेशा आगे रहते हैं।

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