ये कहां का न्याय है, शिक्षकों के साथ हो रही नाइंसाफी: 800 से अधिक मतदान अधिकारी ही रह जाएंगे मतदान से वंचित, बालोद जिले में मतदान ड्यूटी में हो रही अव्यवस्था से शिक्षक परेशान, अनुच्छेद 326 की हो रही बालोद जिले में अनदेखी….



बालोद। छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक/समग्र शिक्षक फेडरेशन के जिलाध्यक्ष देवेन्द्र हरमुख ने बताया कि ऐसा पहली बार हो रहा है कि बालोद जिले के 800 से अधिक शिक्षक ( मतदान अधिकारी ) ही स्वयं के मतदान करने के लिये वंचित हो जाएंगे, क्योंकि जिस दिन उन्हें अपने गांव में मतदान करना है उसी दिन उनकी ड्यूटी दूसरे विकासखंड में जहां उसी दिन चुनाव होना है ,वहीं लगा दिया गया है या उसी विकासखंड में लगा दिया गया है। आज चुनाव कार्यों व मतदान दलों के गठन में आ रही समस्या को लेकर छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन बालोद का एक प्रतिनिधिमंडल जिला उपाध्यक्ष एलेन्द्र यादव की अगुवाई में अपर कलेक्टर श्री कौशिक से मिला। जिला उपाध्यक्ष एलेन्द्र यादव व सहायक शिक्षक फेडरेशन बालोद की टीम चुनाव अधिकारियों एवं कर्मचारियों की विभिन्न समस्याओं को लेकर अपर कलेक्टर श्री कौशिक से मिलकर अपनी बात रखी। जिला उपाध्यक्ष एलेन्द्र यादव ने बताया कि ऐसा पहली बार किसी चुनाव में देखा जा रहा है कि कई मतदान अधिकारियों का तीन तीन बार मतदान ड्यूटी लगाया जा रहा है जबकि पूर्व में कभी ऐसा देखा नहीं गया है।

पहली बार फैली है इस तरह की अव्यवस्था, निर्वाचन आयोग के नियमों की ही हो रही है अनदेखी

इधर कुछ शिक्षकों ने नाम प्रकाशित न करने की शर्तों पर आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग की निर्देशों का खुला उल्लंघन और अनदेखी देखने को मिल रहा है। किसी को भी मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया सकता तो यह भी नियम है कि जो शिक्षक जिस क्षेत्र के निवासी हैं या जहां पदस्थ हैं उस क्षेत्र को छोड़कर उनकी ड्यूटी दूसरे क्षेत्र में लगाई जानी चाहिए। लेकिन यहां इस बार ऐसी स्थिति है कि एक ही शिक्षक को दो दो , तीन तीन ब्लॉक में ड्यूटी लगाई जा रही है। नगर पंचायत चुनाव से उनकी ड्यूटी लगनी शुरू हुई है जो लगातार उन्हीं शिक्षकों को बार-बार ड्यूटी पर भेजा जा रहा है। तो वहीं इससे बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। तो दूसरी ओर स्थानीय गांव या क्षेत्र में ही उनकी ड्यूटी लगा दिए जाने से मतदान पर पारदर्शिता संबंधित भी प्रभाव पड़ने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में निर्वाचन आयोग के नियमों का गंभीरता से पालन बालोद जिले में होता नहीं दिख रहा है। इस तरह की स्थिति पहली बार देखने को मिल रही है। इस अव्यवस्था से शिक्षा जगत के लोगों में काफी नाराजगी है। वही एक नया मामला यह भी सामने आया है कि कुछ ब्लॉक को ही छोड़कर कई ब्लॉक में महिला शिक्षकों की ड्यूटी ही नहीं लगाई गई है जबकि मतदान दल में एक महिला होना आवश्यक है।

बालोद जिले में हो रही संविधान के अनुच्छेद 326 की अवहेलना:कर्मचारी चुनाव कार्य के कारण अपने मताधिकार से हो रहे हैं वंचित, नगर पंचायत के बाद अब त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में भी लग गई है ड्यूटी

ज्ञात हो कि मतदान करने का अधिकार राजनीतिक अधिकार के अंतर्गत आता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 326 एक सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार को निर्वाचित सरकार के सभी स्तरों के चुनावों के आधार के रूप में परिभाषित करता है। सर्वजनीन मताधिकार से तात्पर्य है कि सभी नागरिक जो 18 वर्ष और उससे अधिक उम्र के हैं, वे अपनी पसंद के उम्मीदवार को उनकी जाति या शिक्षा, धर्म, रंग, प्रजाति और आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद वोट देने के लिए स्वतंत्र है। निर्वाचन आयोग का भी हमेशा 100 प्रतिशत मतदान का लक्ष्य होता है । पंचायत चुनावों में एक एक वोट का बहुत ही महत्व होता है, यहां एक एक वोटो से उम्मीदवारों की हार और जीत तय होती है। इस कारण सरकारी कर्मचारियों की वोट इसमें महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। पर वर्तमान में वहीं त्रि स्तरीय पंचायत चुनाव के तहत जिले में कुछ अलग ही परिदृश्य देखने को मिल रहा है जैसे कि

  1. यहां के कई शासकीय कर्मचारियों की ड्यूटी उनके ही विकासखंड में उसी तिथि को लगी है , जहां से वे मतदाता है , जिसमें पंचायत चुनाव हो रहा है। जिस कारण वे अपने मतदान केन्द्र में मतदान से वंचित हो रहे हैं।और कई दिक्कत भी है
  2. जिले के कई कर्मचारी पहले नगरीय निकायों चुनावों में कार्य कर चुके है, उसके बाद भी दो, दो विकासखंड में अलग अलग तिथि में उन्हें ग्राम पंचायत चुनाव सम्पन्न कराने जाना पड़ रहा है ।
  3. महिला कर्मचारियों को ज्यादा दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है, उन्हें उनके विकासखंड से अन्य विकासखंड में बदल कर ड्यूटी लगाई जा रही है।
  4. आत्मानंद स्कूलों के कई संविदा कर्मचारियों की भी ड्यूटी लगाई गई है।

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