गुरुर। व्यक्ति को अहंकार नहीं करना चाहिए, अहंकार बुद्धि और ज्ञान का हरण कर लेता है। अहंकार ही मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। उक्त बातें पंडित बल्ला प्रसाद शर्मा ने भागवत ज्ञान सप्ताह के दौरान कही। ग्राम ठेकवाडीह में दयाराम साहू एवं लीलाबाई साहू की स्मृति में ईश्वर साहू एवं समस्त परिवार की ओर से श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। नौ दिवसीयश्रीमद् भागवत कथा आयोजन के पांचवें दिन श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग सुनाया गया।

श्रीकृष्ण की जन्म कथा का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो उठे। बताया कि जब अत्याचारी कंस के पापों से धरती डोलने लगी, तो भगवान कृष्ण को अवतरित होना पड़ा। सात संतानों के बाद जब देवकी गर्भवती हुई, तो उसे अपनी इस संतान की मृत्यु का भय सता रहा था। भगवान की लीला वे स्वयं ही समझ सकते हैं। भगवान कृष्ण के जन्म लेते ही जेल के बंधन टूट गए और भगवान श्री कृष्णा गोकुल पहुंच गए शर्मा ने कहा कि जब-जब धरती पर धर्म की हानि होती है, तब-तब भगवान धरती पर अवतरित होते हैं। जैसे ही कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ पूरा पंडाल जयकारों से गूंजने लगा।

श्रीकृष्ण जन्म उत्सव पर नन्द के आनंद भयो जय कन्हैयालाल की भजन प्रस्तुत किया तो श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर जमकर झूमे। कथा महोत्सव में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भजन कर भगवान श्री कृष्ण के जन्म की खुशियां मनाई। भागवत कथा का रसपान करने आसपास गांव के श्रद्धालु प्रतिदिन अधिक संख्या मे पहुंच रहे है।
भंडारा की भी है व्यवस्था
प्रतिदिन गांव सहित आसपास से पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए भंडारे भोजन की व्यवस्था की गई है। जहां प्रतिदिन ग्राम सहित दूर दराज से पहुंचे श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण कर रहे है। बृजराज साहू ने जानकारी दी की भागवत कथा का यह दूसरा वर्ष है। जहां पंडित बल्ला प्रसाद शर्मा द्वारा भागवत कथा किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि भागवत कथा 10 बजे से दोपहर 1 बजे एवं दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक किया जा रहा है। भागवत कथा के दौरान प्रतिदिन भोजन की व्यवस्था की गई है। भागवत कथा में प्रमुख रुप से गंगा देवी साहू,लता साहू ,डोमार साहू ,शकुन साहू सहित समस्त परिवार एवं ग्रामीणों का सहयोग मिल रहा है।
